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📚 राजस्थान की कृषि एवं आर्थिक समीक्षा
विषय: GK & GS Paper अंक: 40 समय: 40 Minutes कुल प्रश्न: 40 व्याख्या: 40 / 40 दिनांक: Batch: RAS FOUNDATION COURSE
1
राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र के योगदान से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. स्थिर मूल्यों (2011-12) पर वर्ष 2025-26 (AE) में कृषि क्षेत्र का GSVA में योगदान 25.33% रहा है। B. वर्तमान मूल्यों पर वर्ष 2025-26 (AE) में कृषि क्षेत्र का कुल मूल्य ₹4.41 लाख करोड़ दर्ज किया गया है। C. स्थिर मूल्यों पर कृषि क्षेत्र की वर्ष 2021-22 से 2025-26 की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 8.10% रही है। D. भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि के औसत योगदान (17.77%) की तुलना में राजस्थान का कृषि योगदान अधिक है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A, B और D पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन C असत्य है। राजस्थान की आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अग्रिम अनुमानों (AE) के अनुसार, स्थिर (2011-12) मूल्यों पर कृषि क्षेत्र का GSVA में योगदान 25.33% (₹2.33 लाख करोड़) है तथा वर्तमान मूल्यों पर यह 25.74% (₹4.41 लाख करोड़) है। 5 वर्षों (2021-25) के दौरान कृषि क्षेत्र की स्थिर मूल्यों पर चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 3.82% रही है, जबकि वर्तमान मूल्यों पर CAGR 8.10% दर्ज की गई है; अतः कथन C में 8.10% को स्थिर मूल्यों पर बताना गलत है। भारत के राष्ट्रीय स्तर पर कृषि का GVA योगदान 17.77% है, जिसकी तुलना में राजस्थान का योगदान (25.74%) काफी अधिक है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। अन्य विकल्प इसलिए गलत हैं क्योंकि वे कथन C को सत्य मानते हैं या सही कथनों के संयोजन को छोड़ते हैं।
2
कृषि उप-क्षेत्रों के योगदान (वर्तमान मूल्यों पर 2025-26 AE) तथा सकल मूल्य उत्पाद (GVO) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्र में सर्वाधिक योगदान (49.35%) पशुधन (Livestock) उप-क्षेत्र का है। B. फसलों (Crops) उप-क्षेत्र का योगदान 42.61% है, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 5.20% की वृद्धि दर्ज की गई है। C. वानिकी उप-क्षेत्र का योगदान 7.49% तथा मत्स्य उप-क्षेत्र का योगदान 0.54% है। D. पशुधन उत्पादों के सकल मूल्य उत्पाद (GVO) में दूध की हिस्सेदारी सर्वाधिक (79.60%) है।
(A) केवल A, C और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A, C और D सत्य हैं, जबकि कथन B असत्य है। राजस्थान के कृषि उप-क्षेत्रों में वर्तमान मूल्यों पर 2025-26 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार पशुधन क्षेत्र ₹2.17 लाख करोड़ (49.35%) के साथ प्रथम स्थान पर है और इसमें 5.20% की धनात्मक वृद्धि दर्ज हुई है। फसलों का हिस्सा 42.61% (₹1.88 लाख करोड़) है, परंतु इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 5.01% की गिरावट (गिरावट, न कि वृद्धि) आई है; इसलिए कथन B गलत है। वानिकी का योगदान 7.49% (2.67% वृद्धि) एवं मत्स्य का 0.54% (0.87% वृद्धि) है। पशुधन उत्पादों के कुल उत्पादित मूल्य (GVO) में दुग्ध का अंश 79.60%, मांस (पोल्ट्री सहित) का 7.46%, अंडों का 0.67% और अन्य उत्पादों का 12.27% है। विकल्प B, C और D असत्य हैं क्योंकि वे गलत कथन B को शामिल करते हैं।
3
सूची-I एवं सूची-II का मिलान कीजिए:
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-2, C-3, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। वर्ष 2025-26 में रबी एवं खरीफ फसलों के GVO आँकड़ों के अनुसार गेहूं रबी फसलों में सर्वाधिक ₹38,394 करोड़ GVO के साथ शीर्ष पर है (2024-25 में ₹40,970 करोड़)। राई-सरसों ₹34,826 करोड़ GVO के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसमें पिछले वर्ष (₹31,760 करोड़) से वृद्धि हुई है। खरीफ फसलों में मूंगफली का GVO ₹15,978 करोड़ (पिछले वर्ष ₹10,961 करोड़) तथा बाजरा का GVO ₹9,781 करोड़ (पिछले वर्ष ₹12,991 करोड़) रहा है। यह वर्गीकरण राज्य की फसल आधारित अर्थव्यवस्था में रबी खाद्यान्न व तिलहन के वर्चस्व को स्पष्ट करता है। गलत विकल्पों में फसलों के GVO मूल्यों की अंतरा-अदला-बदली की गई है।
4
राजस्थान में प्रचालित भूमि जोतों (Operational Land Holdings - कृषि संगणना 2015-16) से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. राज्य में कुल प्रचालित जोतों की संख्या 76.55 लाख है, जिसमें 2010-11 की तुलना में 11.14% की वृद्धि हुई है। B. कुल प्रचालित क्षेत्रफल घट कर 208 लाख हेक्टेयर रह गया है, जिसमें 1.24% की कमी आई है। C. औसत जोत आकार 2010-11 के 3.07 हेक्टेयर से घटकर 2015-16 में 2.73 हेक्टेयर (-11.07%) रह गया है। D. कुल जोतों में सीमांत (Marginal) जोतों का प्रतिशत सर्वाधिक (40.12%) है तथा बड़े जोतों (Large) का प्रतिशत केवल 4.69% है।
(A) केवल A और B
(B) केवल C और D
(C) केवल A, B और C
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
सभी चारों कथन A, B, C और D पूर्णतः सही हैं। कृषि संगणना 2015-16 के अनुसार राजस्थान में प्रचालित जोतों की संख्या 2010-11 के 68.88 लाख से बढ़कर 76.55 लाख (+11.14%) हो गई, जबकि कुल प्रचालित क्षेत्रफल 211 लाख हेक्टेयर से घटकर 208 लाख हेक्टेयर (-1.24%) रह गया। इसके परिणामस्वरूप औसत जोत का आकार 3.07 हेक्टेयर से घटकर 2.73 हेक्टेयर (-11.07%) पर आ गया। जोतों के श्रेणीवार वितरण में सीमांत जोत (<1 ha) 40.12%, लघु (1-2 ha) 21.90%, अर्द्ध-मध्यम (2-4 ha) 18.50%, मध्यम (4-10 ha) 14.79% और बड़े जोत (>10 ha) 4.69% हैं। बड़े जोतों की संख्या में 11.14% तथा क्षेत्रफल में 13.20% की गिरावट देखी गई है, जबकि सीमांत जोतों के क्षेत्रफल में 19.79% की वृद्धि हुई है।
5
कृषि संगणना 2015-16 के अनुसार राजस्थान में महिला भूमि जोतों (Female Operational Holdings) के संबंध में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(A) महिला प्रचालित जोतों की कुल संख्या 7.75 लाख है, जिसमें 41.94% की वृद्धि दर्ज की गई है।
(B) महिलाओं के तहत प्रचालित कुल क्षेत्रफल 16.55 लाख हेक्टेयर है।
(C) महिला जोतों में सीमांत (Marginal) श्रेणी की महिलाओं की हिस्सेदारी सर्वाधिक 49.55% है।
(D) महिला जोतों में बड़े (Large) आकार की जोतों की हिस्सेदारी 15.50% है।
📝 व्याख्या (Explanation)
विकल्प D असत्य कथन है और यही उत्तर है। कृषि संगणना 2015-16 के अनुसार महिला जोतों में बड़े (Large >10 ha) आकार की जोतों का हिस्सा केवल 2.97% (न कि 15.50%) है, यद्यपि इनकी संख्या में 9.52% की वृद्धि हुई है। 2010-11 में महिला जोतें 5.46 लाख (13.30 लाख हेक्टेयर) थीं, जो 2015-16 में बढ़कर 7.75 लाख जोतें (41.94% वृद्धि) और 16.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल (24.44% वृद्धि) हो गईं। श्रेणीवार वितरण में सीमांत महिला जोतें 49.55%, लघु 20.77%, अर्द्ध-मध्यम 14.97% तथा मध्यम 11.74% हैं। जोतों के निरंतर घटते आकार को देखते हुए बजट 2026-27 में 5,000 किसानों को वर्टिकल सपोर्ट सिस्टम आधारित सब्जी उत्पादन हेतु वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है।
6
राजस्थान में खाद्यान्न उत्पादन आंकड़ों (2024-25 vs 2025-26) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. वर्ष 2025-26 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 309.62 लाख टन अनुमानित है, जो 2024-25 के 283.98 लाख टन से अधिक है। B. खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में 2025-26 में 21.60% की गिरावट दर्ज की गई है। C. कुल दलहन उत्पादन में 12.75% की वृद्धि के साथ यह 2025-26 में 47.13 लाख टन पहुँच गया है। D. कुल तिलहन उत्पादन 100.46 लाख टन (7.18% वृद्धि) रहने का अनुमान है।
(A) केवल A और B
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन B, C और D सत्य हैं, जबकि कथन A असत्य है। वर्ष 2025-26 में राजस्थान का कुल खाद्यान्न उत्पादन 283.98 लाख टन अनुमानित है, जो वर्ष 2024-25 के 309.62 लाख टन की तुलना में 8.28% कम (-8.28%) है; अतः कथन A में आँकड़ों का क्रम उल्टा लिखा गया है। खरीफ खाद्यान्न 114.24 लाख टन से घटकर 89.55 लाख टन (-21.60%) रहा, जबकि रबी खाद्यान्न 195.38 लाख टन से घटकर 194.43 लाख टन (-0.49%) रहा। कुल दलहन 41.80 लाख टन से बढ़कर 47.13 लाख टन (+12.75%) तथा कुल तिलहन 93.73 लाख टन से बढ़कर 100.46 लाख टन (+7.18%) दर्ज हुआ। गन्ना उत्पादन में 22.37% की कमी (3.61 लाख टन) आई है तथा कपास उत्पादन 17.94 लाख गांठ रहा है।
7
प्रमुख कृषि फसलों के राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान की रैंकिंग एवं राष्ट्रीय हिस्सेदारी का मिलान कीजिए: सूची-I (फसल): सूची-II (हिस्सेदारी):
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। राजस्थान 'BMS-GOT' फसलों में देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य ग्वार उत्पादन में 88.80% के भारी राष्ट्रीय योगदान के साथ देश में एक छत्र प्रथम स्थान पर है। राई-सरसों में 43.43% हिस्सेदारी के साथ प्रथम (मध्य प्रदेश द्वितीय, उत्तर प्रदेश तृतीय), बाजरा में 41.34% हिस्सेदारी के साथ प्रथम (उत्तर प्रदेश द्वितीय, गुजरात तृतीय), कुल तिलहन में 23.61% के साथ प्रथम और कुल मोटे अनाज में 14.21% हिस्सेदारी के साथ प्रथम स्थान पर है। मूंगफली में राजस्थान देश में 19.91% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर (गुजरात प्रथम) है, जबकि चना (17.39%), कुल दलहन (13.76%) और सोयाबीन (8.96%) में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर (मध्य प्रदेश प्रथम) है।
8
राजस्थान में फसलों की उत्पादकता प्रवृत्तियों (Productivity Trends - 2020-21 से 2024-25) पर विचार कीजिए: A. अनाज (Cereals) की उत्पादकता 2020-21 के 2,423 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 2,537 किग्रा/हेक्टेयर हो गई है। B. दलहन (Pulses) की उत्पादकता में निरंतर वृद्धि देखी गई और यह 2024-25 में 773 किग्रा/हेक्टेयर तक पहुँच गई। C. कपास (Cotton Lint) की उत्पादकता में गिरावट आई है और यह 675 किग्रा/हेक्टेयर से घटकर 484 किग्रा/हेक्टेयर रह गई है। D. ग्वार बीज की उत्पादकता में वृद्धि दर्ज की गई है तथा यह 2024-25 में 662 किग्रा/हेक्टेयर पहुँची है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A, C और D सत्य हैं, जबकि कथन B असत्य (आंशिक रूप से भ्रामक) है। दलहन की उत्पादकता 2020-21 में 671 किग्रा/हेक्टेयर थी, जो 2021-22 में घटकर 628, 2022-23 में 657, 2023-24 में घटकर 609 हुई और 2024-25 में बढ़कर 773 किग्रा/हेक्टेयर हुई। अतः इसमें 'निरंतर' वृद्धि नहीं हुई बल्कि उतार-चढ़ाव रहा है। अनाज की उत्पादकता 2,423 से बढ़कर 2,537 किग्रा/हे. हुई (बढ़ने की प्रवृत्ति)। कपास में कीटों व मानसूनी भिन्नता के कारण उत्पादकता 675 से घटकर 484 किग्रा/हे. (घटने की प्रवृत्ति) रह गई है। ग्वार बीज 458 से बढ़कर 662 किग्रा/हे. हुआ। गन्ना उत्पादकता 79,111 से घटकर 76,835 किग्रा/हे. दर्ज की गई है।
9
राजस्थान के कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) का संबंधित जिलों से सुमेलन कीजिए: सूची-I (जलवायु क्षेत्र): सूची-II (जिले):
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। राजस्थान को 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बाँटा गया है। Zone I-B (उत्तर-पश्चिमी सिंचित) में श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ आते हैं जहाँ मुख्य फसलें कपास, गेहूं, सरसों हैं। Zone II-A (अन्त:स्थलीय जलोत्सरण) में शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनूं, नागौर, चूरू) आता है। Zone III-A (अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदान) में जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक शामिल हैं। Zone V (आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान) में हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़) आता है जहाँ सोयाबीन, गेहूं, सरसों प्रमुखता से उगाई जाती हैं। शुष्क पश्चिमी (I-A) में जोधपुर, बाड़मेर; अति शुष्क (I-C) में बीकानेर, जैसलमेर; लूनी बेसिन (II-B) में जालोर, पाली, सिरोही; बाढ़ सम्भाव्य (III-B) में अलवर, भरतपुर; अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी (IV-A) में उदयपुर, भीलवाड़ा; तथा आर्द्र दक्षिणी (IV-B) में बांसवाड़ा, डूंगरपुर शामिल हैं।
10
राजस्थान में बागवानी उत्पादन (Horticulture) तथा बजट 2026-27 की घोषणाओं के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: A. वर्ष 2024-25 में राज्य में फल उत्पादन 13.84 लाख मीट्रिक टन (MT) तथा सब्जी उत्पादन 28.60 लाख MT दर्ज हुआ। B. वर्ष 2024-25 में मसाला उत्पादन में भारी उछाल के साथ यह 14.69 लाख मीट्रिक टन तक पहुँच गया। C. बजट 2026-27 में 4,000 किसानों को एडवांस टेक्नोलॉजी पॉलीहाउस/शेडनेट के लिए ₹200 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। D. जीरा, धनिया, सौंफ और मेथी के मसाले वाले क्षेत्र में 4,000 हेक्टेयर विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
सभी कथन A, B, C और D सही हैं। आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार राज्य में बागवानी फसलों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। फल क्षेत्र 92,993 हेक्टेयर पर 13.84 लाख MT फल उत्पादन हुआ। सब्जी क्षेत्र 2,04,755 हेक्टेयर पर 28.60 लाख MT उत्पादन हुआ। मसालों के क्षेत्रफल में 13.64 लाख हेक्टेयर पर उत्पादन बढ़कर 14.69 लाख MT (2023-24 में 3.79 लाख MT था) हो गया। बागवानी को बढ़ावा देने हेतु बजट 2026-27 में 4,000 किसानों को संरक्षित खेती (पॉलीहाउस/शेडनेट) हेतु ₹200 करोड़ सब्सिडी, 500 सोलर क्रॉप ड्रायर्स तथा प्रमुख बीजीय मसालों (जीरा, धनिया, सौंफ, मेथी) के क्षेत्रफल में 4,000 हेक्टेयर अतिरिक्त विस्तार की घोषणा की गई है।
11
मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना एवं बीज वितरण कार्यक्रमों से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना की शुरुआत वर्ष 2017 में 3 कृषि-जलवायु क्षेत्रों (कोटा, भीलवाड़ा, उदयपुर) से की गई थी। B. वर्ष 2018-19 से यह योजना राज्य के सभी 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में लागू की जा चुकी है। C. इस योजना के तहत 10 वर्ष से कम पुरानी किस्मों के गेहूं, जौ, चना, सरसों, सोयाबीन, मूंग, मोठ आदि के बीजों का निर्माण कराया जाता है। D. बजट 2026-27 में 90% अनुदान पर 70,000 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज एवं मिनी-किट वितरण की घोषणा की गई है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। कृषकों को स्वयं के खेतों में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन हेतु आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना' 2017 में 3 ज़ोन से प्रारंभ होकर 2018-19 से सभी 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में क्रियान्वित है। इसमें 10 वर्ष से कम अवधि की प्रमाणित किस्मों को शामिल किया गया है। बीज प्रमाणीकरण का कार्य 'राजस्थान राज्य बीज एवं जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण एजेंसी' (RSSOCA) द्वारा तथा नोडल एजेंसी 'राजस्थान राज्य बीज निगम' (RSSCL) द्वारा किया जाता है। बजट 2026-27 में 90% अनुदान पर 70,000 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज, मूंग के 5 लाख मिनी-किट, मोठ के 1 लाख मिनी-किट तथा 50,000 कैंचा किट वितरित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
12
राजस्थान में मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) तथा उर्वरक प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की राष्ट्रीय शुरुआत 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से हुई थी। B. वर्ष 2025-26 में राज्य में 4.15 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए, जो 4.05 लाख के निर्धारित लक्ष्य से अधिक हैं। C. गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक के 50 किसानों को वर्मी कम्पोस्ट हेतु ₹10,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। D. बजट 2026-27 में 1 लाख हेक्टेयर में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के ड्रोन प्रदर्शन छिड़काव पर 50% सब्सिडी का प्रावधान है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A, B, C और D सभी सही हैं। देश में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) से 'स्वस्थ धरा, खेत हरा' नारे के साथ किया गया था, इसलिए 19 फरवरी को Soil Health Card Day मनाया जाता है। राज्य के सभी 352 ब्लॉकों में 2025-26 में 4.79 लाख नमूनों की जाँच कर लक्ष्य (4.05 लाख) से अधिक 4.14-4.15 लाख कार्ड बांटे गए। रासायनिक उर्वरकों का विकल्प देने हेतु गोवर्धन योजना में वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापना पर ₹10,000 प्रति किसान अनुदान दिया जाता है। बजट 2026-27 में नैनो उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख हेक्टेयर में ड्रोन छिड़काव पर 50% सब्सिडी और पश्चिमी राजस्थान के 1,000 किसानों को इसबगोल, अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलों के उन्नत बीज देने की घोषणा की गई है।
13
महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण आजीविका योजनाओं का उनके प्रमुख प्रावधानों से सुमेलन कीजिए: सूची-I (योजना): सूची-I: A. नमो ड्रोन दीदी B. लखपति दीदी C. कृषि सखी D. पशु सखी (A-HELP) सूची-II: 1. SHGs को ड्रोन हेतु 80% केंद्र सब्सिडी (अधिकतम ₹8 लाख), राजस्थान में शुरुआत कोटा से। 2. स्वयं सहायता समूह महिला की वार्षिक आय न्यूनतम ₹1 लाख करना (ऋण सीमा ₹1.50 लाख)। 3. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना; NCONF द्वारा 50,000 महिलाओं को प्रशिक्षण। 4. पशु स्वास्थ्य एवं बांझपन निवारण में सहयोग; राजस्थान उत्तर भारत में दूसरा राज्य।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। महिला सशक्तिकरण हेतु 'नमो ड्रोन दीदी' योजना में 30 जिलों में 50 ड्रोन दिए गए हैं, जिसमें 80% अनुदान (अधिकतम ₹8 लाख) केंद्र द्वारा दिया जाता है और इसकी शुरुआत कोटा से हुई। 'लखपति दीदी' के तहत राज्य की 16 लाख से अधिक महिलाएं लखपति बनी हैं, बजट 2026-27 में ऋण सीमा बढ़ाकर ₹1.50 लाख की गई है। 'कृषि सखी' के रूप में 36,787 महिलाएं कार्यरत हैं जिन्हें प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है। 'पशु सखी' (A-HELP योजना) के तहत 37,369 महिलाएं कार्यरत हैं और राजस्थान उत्तर भारत में इस मामले में दूसरा राज्य है। इन सभी योजनाओं का नोडल विभाग 'ग्रामीण विकास विभाग' है।
14
राजस्थान में सहकारी साख ढाँचे (Cooperative Credit Structure) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (RSCB) की स्थापना 14 अक्टूबर 1953 को हुई थी और इसका मुख्यालय जयपुर में है। B. राज्य में अल्पकालिक साख व्यवस्था हेतु 29 जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक (DCCB) कार्यरत हैं। C. प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) की कुल संख्या 9,086 है; राज्य की पहली सहकारिता समिति भिनाय (अजमेर) में 1905 में बनी थी। D. राजस्थान सहकारी भूमि विकास बैंक (RLDB) दीर्घकालिक (5-15 वर्ष) कृषि ऋण प्रदान करता है जिसकी राज्य में 36 शाखाएं हैं।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A, B और D सत्य हैं। राज्य की पहली सहकारी समिति 1904 में भिनाय (अजमेर) में स्थापित हुई थी, अतः 1905 वाला कथन C असत्य है। सही विकल्प A है।
15
प्रमुख कृषि साख एवं ऋण योजनाओं का उनकी ब्याज दर / ऋण सीमा से सुमेलन कीजिए: सूची-I (योजना): सूची-I: A. शून्य ब्याज दर कृषि ऋण B. कोऑपरेटिव गोपाल क्रेडिट कार्ड C. सहकार किसान कल्याण योजना D. कृषि उपज प्रतिभू ऋण सूची-II: 1. ₹18,085 करोड़ वितरित; 2026-27 का लक्ष्य 35 लाख किसान। 2. ₹1 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण (2.5 लाख डेयरी परिवार)। 3. कृषि व सम्बद्ध कार्यों हेतु ₹10 लाख तक का ऋण। 4. उपज गिरवी रखने पर केवल 3% ब्याज दर।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। 2012-13 से संचालित 'शून्य ब्याज दर कृषि ऋण योजना' के तहत 2025-26 में 30.45 लाख किसानों को ₹18,085.89 करोड़ बांटे गए; बजट 2026-27 में 35 लाख किसानों को ₹25,000 करोड़ बांटने का लक्ष्य है। 'गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना' में डेयरी किसानों को शेड व उपकरण हेतु ₹1 लाख तक का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जाता है। 'सहकार किसान कल्याण योजना' में कृषि आवश्यकताओं हेतु ₹10 लाख तक का ऋण मिलता है। किसान अपनी उपज मंडी गोदाम में रखकर मूल्य गिरावट से बचने हेतु 3% रियायती ब्याज दर पर 'कृषि उपज प्रतिभू ऋण' ले सकते हैं। कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत राज्य में 4,900 परियोजनाओं हेतु ₹4,212.54 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
16
राष्ट्रीय बागवानी मिशन (National Horticulture Mission - NHM) तथा बजट 2026-27 की नवीन घोषणाओं के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: A. राष्ट्रीय बागवानी मिशन राजस्थान के सभी 41 जिलों में केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से लागू है। B. वर्ष 2025-26 तक इसके तहत फल बगीचों, ग्रीनहाउस एवं प्याज भंडारण संरचनाओं का विकास किया गया है। C. बजट 2026-27 में अलवर (प्याज-सब्जी), श्रीगंगानगर (किन्नू) एवं बांसवाड़ा (आम) में नए उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) बनाने की घोषणा हुई है। D. राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के तहत वार्षिक कार्य योजना हेतु ₹100 लाख का प्रावधान किया गया है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। राजस्थान में उद्यानिकी के सर्वांगीण विकास हेतु NHM सभी 41 जिलों में संचालित है। 2025-26 तक इसके तहत 2,358 हेक्टेयर में फल बगीचे, 3.13 लाख वर्ग मीटर ग्रीनहाउस, 1,129 प्याज भंडारण ढाँचे विकसित किए गए। बजट 2026-27 में बागवानी क्लस्टर्स को बढ़ावा देने के लिए अलवर में प्याज व सब्जी, श्रीगंगानगर में किन्नू तथा बांसवाड़ा में आम का 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने की घोषणा की गई है। बांस की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु राष्ट्रीय बांस मिशन में ₹100 लाख तथा एग्रो-फॉरेस्ट्री योजना में जोधपुर, पाली व कोटा में हाई-टेक नर्सरियाँ विकसित करने का प्रावधान किया गया है।
17
राष्ट्रीय कृषि विस्तार एवं प्रौद्योगिकी मिशन (NMAET) के उप-मिशनों का उनके मुख्य उद्देश्य से सुमेलन कीजिए: सूची-I (उप-मिशन): सूची-I: A. SMAE (कृषि विस्तार) B. SMSP (बीज व रोपण) C. SMAM (कृषि यंत्रीकरण) D. Custom Hiring Centre (CHC) सूची-II: 1. कृषकों तक नवीन तकनीकों का हस्तांतरण व प्रशिक्षण। 2. उच्च गुणवत्तायुक्त बीजों का उत्पादन व उपलब्धता। 3. लघु/सीमांत/महिला/SC/ST को 50% तथा अन्य को 40% अनुदान। 4. राजकिसान ऐप से कृषि यंत्रों की बुकिंग; बजट 2026-27 में 500 नए केंद्र।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। NMAET के 4 प्रमुख घटक हैं: (1) कृषि विस्तार पर उप-मिशन (SMAE) - किसानों को तकनीकी जानकारी देना। (2) बीज और रोपण सामग्री पर उप-मिशन (SMSP) - गुणवत्तापूर्ण बीजों की श्रृंखला। (3) कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM) - छोटे व सीमांत किसानों को आधुनिक यंत्रों पर 50% (अन्य को 40%) अनुदान देना। (4) कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) - SMAM के तहत स्थापित, जहाँ किसान 'RajKisan Custom Hiring App' से सस्ते किराए पर ट्रैक्टर व उपकरण बुक कर सकते हैं। बजट 2026-27 में ₹96 करोड़ की लागत से 500 नए CHC स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
18
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF - 2025-26) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. योजना के तहत राजस्थान में 2,000 क्लस्टर (1,800 केंद्रीय + 200 राज्य) गठित कर 2.50 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है। B. प्रत्येक क्लस्टर का आकार 50 हेक्टेयर तथा 125 किसान निर्धारित किया गया है। C. क्लस्टरों में किसानों को ₹4,000 प्रति एकड़ की सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) से दी जाती है। D. क्लस्टरों में सहायता हेतु 180 बायो-इनपुट संसाधन केंद्र (Bio-Input Resource Centres) स्थापित किए जा रहे हैं।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। रसायन मुक्त एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2025-26 से राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसके तहत राज्य में कुल 2,000 क्लस्टरों में 1.0 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर 2.50 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण व प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रत्येक 50 हेक्टेयर के क्लस्टर (125 किसान) में एक 'कृषि सखी / CRP' की तैनाती की गई है। किसानों को जीवामृत, बीजामृत तैयार करने हेतु ₹4,000/एकड़ DBT द्वारा दिए जाते हैं तथा जैविक आदानों की सुलभता हेतु ₹1 लाख प्रति केंद्र की दर से 180 बायो-इनपुट संसाधन केंद्र बनाए जा रहे हैं।
19
वर्ष 2025-26 में घोषित 'पीएम धन-धान्य कृषि योजना' (PMDDKY) के अंतर्गत राजस्थान के कितने और कौन-से जिले शामिल किए गए हैं?
(A) 5 जिले: बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, जोधपुर।
(B) 8 जिले: बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, जालोर।
(C) 10 जिले: कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, जालोर।
(D) 6 जिले: जयपुर, अजमेर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर।
📝 व्याख्या (Explanation)
सही विकल्प B है। देश के 100 आकांक्षी जिलों में कृषि समृद्धि एवं 11 केंद्रीय मंत्रालयों की योजनाओं के एकीकरण हेतु घोषित 6-वर्षीय 'पीएम धन-धान्य कृषि योजना' (PMDDKY) में राजस्थान के 8 पश्चिमी एवं शुष्क जिलों - बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू और जालोर को शामिल किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन शुष्क क्षेत्रों में एकीकृत कृषि, जल संरक्षण और फसलों के विविधीकरण द्वारा किसानों की आय बढ़ाना है। अन्य विकल्प जिलों की संख्या व सूचियों के गलत संयोजन को दर्शाते हैं।
20
वर्ष 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) में राजस्थान कृषि विभाग की भौतिक उपलब्धियों का मिलान कीजिए: सूची-I (घटक): सूची-I: A. फार्म पॉण्ड (Farm Ponds) B. सिंचाई पाइपलाइन (Pipeline) C. काँटेदार तार बाड़बंदी (Fencing) D. बीज मिनी-किट वितरण सूची-II: 1. 25,000 लक्ष्य के विरुद्ध 10,626 निर्मित। 2. 20,000 किमी लक्ष्य के विरुद्ध 10,073 किमी बिछाई गई। 3.0 करोड़ मीटर के विरुद्ध 94.69 लाख मीटर। 4. 31.50 लाख लक्ष्य के विरुद्ध 31.49 लाख वितरित (लगभग 100%)।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। कृषि विभाग की वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक) की भौतिक प्रगति के अनुसार: खेत में जल संचयन हेतु फार्म पॉण्ड निर्माण में 25,000 के लक्ष्य पर 10,626 फार्म पॉण्ड बने। डिग्गी निर्माण में 10,000 के लक्ष्य पर 4,979 डिग्गियाँ बनीं। सिंचाई जल दक्षता हेतु 20,000 किमी पाइपलाइन लक्ष्य पर 10,073 किमी पाइपलाइन बिछी। आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा हेतु तारबंदी में 94.69 लाख मीटर कार्य हुआ। बीज मिनी-किट वितरण में 31.50 लाख के लक्ष्य में से 31.49 लाख किट बाँटकर शप्रतिशत सफलता पाई गई। मृदा स्वास्थ्य कार्ड 4.05 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 4.14 लाख जारी हुए।
21
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 एवं राजस्थान में इसके क्रियान्वयन के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: A. NFSA 2013 को राजस्थान में 2 अक्टूबर 2013 से लागू किया गया। B. अधिनियम के तहत अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवारों को 35 किग्रा खाद्यान्न प्रति परिवार प्रति माह दिया जाता है। C. राजस्थान में 1 मार्च 2019 से ₹1 प्रति किग्रा की रियायती दर पर गेहूं का वितरण किया जा रहा है। D. अपात्रों द्वारा स्वैच्छिक लाभ त्याग हेतु नवंबर 2024 से 'दे दो अभियान' (Give Up Campaign) शुरू किया गया है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। NFSA 2013 संसद द्वारा 10 सितंबर 2013 को अधिसूचित हुआ तथा राजस्थान में इसे महात्मा गांधी जयंती (2 अक्टूबर 2013) को लागू किया गया। यह राज्य की 67% आबादी (ग्रामीण 75%, शहरी 50%) को विधिक खाद्य सुरक्षा देता है। AAY परिवारों को 35 किग्रा/माह तथा प्राथमिक परिवारों को 5 किग्रा/व्यक्ति/माह खाद्यान्न मिलता है। राज्य सरकार 1 मार्च 2019 से ₹1/किग्रा पर गेहूं दे रही है तथा जनवरी 2024 से PM गरीब कल्याण अन्न योजना में 5 वर्ष हेतु मुफ़्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। सक्षम व अपात्र लोगों को एनएफएसए सूची से नाम हटवाने हेतु प्रेरित करने के लिए नवंबर 2024 में 'दे दो अभियान' शुरू किया गया।
22
जनवरी 2026 में जारी राजस्थान खाद्य सुरक्षा सूचकांक (Food Security Index) में किस जिले ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया तथा कौन-सा जिला सर्वाधिक संवेदनशील रहा?
(A) शीर्ष जिला: जयपुर | सर्वाधिक संवेदनशील: बाड़मेर
(B) शीर्ष जिला: झुंझुनूं | सर्वाधिक संवेदनशील: जैसलमेर
(C) शीर्ष जिला: कोटा | सर्वाधिक संवेदनशील: डूंगरपुर
(D) शीर्ष जिला: श्रीगंगानगर | सर्वाधिक संवेदनशील: चूरू
📝 व्याख्या (Explanation)
सही उत्तर विकल्प B है। राज्य में खाद्य सुरक्षा प्रणाली के सुदृढ़ीकरण एवं जिलों के प्रदर्शन मूल्यांकन हेतु जारी राजस्थान खाद्य सुरक्षा सूचकांक (जनवरी 2026) में झुंझुनूं जिला प्रथम (शीर्ष) स्थान पर रहा। दूसरी ओर, अति-शुष्क एवं विषम परिस्थितियों वाला जैसलमेर जिला खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से 'सर्वाधिक संवेदनशील' श्रेणी में दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त विशेष जनजातीय सहायता के तहत सहरिया, खैरवा एवं कथौड़ी जनजातियों को प्रति माह मुफ़्त 250 मिली घी, 500 मिली तेल और 500 ग्राम दालें दी जाती हैं, जिसके लिए बजट 2026-27 में ₹1,200/माह DBT का प्रावधान किया गया है।
23
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) के घटकों का उनके हस्तक्षेप क्षेत्र से सुमेलन कीजिए: सूची-I (घटक): सूची-I: A. गेहूं एवं दलहन मिशन B. दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025-26 से) C. श्री अन्न (Shri Anna) D. वाणिज्यिक फसल (कपास) सूची-II: 1. गेहूं 18 जिलों में तथा दलहन राज्य के सभी 41 जिलों में लागू। 2. NAFED एवं NCCF द्वारा राज्य भर से 100% खरीद (₹274.19 करोड़)। 3. बाजरा (28 जिले) एवं ज्वार (11 जिले) में उन्नत बीज व संवर्द्धन। 4. 18 जिलों में फेरोमोन ट्रैप एवं एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM)।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। NFSNM के तहत गेहूं घटक 18 जिलों में और दलहन घटक सभी 41 जिलों में संचालित है। दलहन में देश को आत्मनिर्भर बनाने हेतु 2025-26 से शुरू मिशन में NAFED/NCCF द्वारा 100% समर्थन मूल्य पर खरीद का प्रावधान है। मिलेट्स/श्री अन्न के तहत बाजरा हेतु 28 जिले और ज्वार हेतु 11 जिले चिह्नित हैं जहाँ गुणवत्तापूर्ण बीज मिनी-किट व क्लस्टर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। कपास के उत्पादन व गुणवत्ता सुधार हेतु 18 जिलों में गुलाबी सुंडी नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप व IPM प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।
24
खाद्य तेल-तिलहन राष्ट्रीय मिशन (NMEO-Oilseeds) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. इस मिशन में केंद्र और राज्य सरकार का वित्तीय अंशदान 60:40 के अनुपात में है। B. योजना हेतु वर्ष 2025-26 में ₹125 करोड़ का प्रावधान किया गया, जिसमें से ₹105.73 करोड़ व्यय हुए। C. इसके तहत कृषकों के खेतों पर एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) आधारित किसान फील्ड स्कूल (FFS) आयोजित किए जाते हैं। D. राजस्थान तिलहन उत्पादन में देश में द्वितीय स्थान पर है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A, B और C सत्य हैं, जबकि कथन D असत्य है। राजस्थान देश के कुल तिलहन उत्पादन का 23.61% उत्पादित करके भारत में प्रथम स्थान (न कि द्वितीय) पर है; अतः कथन D गलत है। NMEO-Oilseeds एक केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) है जिसमें केंद्र व राज्य की भागीदारी 60:40 है। 2025-26 में ₹125 करोड़ के बजट आवंटन पर ₹105.73 करोड़ का सफल व्यय कर तिलहनी फसलों (सरसों, मूंगफली, सोयाबीन) के अग्रपंक्ति प्रदर्शन एवं किसान फील्ड स्कूल (FFS) के जरिए किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा गया है। विकल्प B, C, D में गलत कथन D शामिल होने से वे असत्य हैं।
25
राजस्थान राज्य भण्डागार निगम (RSWC) के संदर्भ में सामान्य श्रेणी, SC/ST, FPO तथा सहकारी समितियों को मिलने वाली भंडारण सब्सिडी का सही क्रम क्या है?
(A) SC/ST: 70% | FPO: 60% | सामान्य किसान: 30% | सहकारिता: 10%
(B) SC/ST: 50% | FPO: 40% | सामान्य किसान: 20% | सहकारिता: 10%
(C) SC/ST: 90% | FPO: 70% | सामान्य किसान: 50% | सहकारिता: 30%
(D) SC/ST: 60% | FPO: 50% | सामान्य किसान: 40% | सहकारिता: 20%
📝 व्याख्या (Explanation)
सही उत्तर विकल्प A है। राजस्थान राज्य भण्डागार निगम (RSWC) द्वारा किसानों को अपनी कृषि उपज गोदामों में रखने पर देश में सर्वाधिक सब्सिडी दी जाती है। इसके तहत SC/ST वर्ग के किसानों को 70% सब्सिडी, कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) को 60% सब्सिडी, सामान्य श्रेणी के किसानों को 30% सब्सिडी तथा सहकारी समितियों को 10% सब्सिडी दी जाती है। RSWC 36 जिलों में 97 गोदामों के माध्यम से 17.25 लाख मीट्रिक टन क्षमता का संचालन कर रहा है। बजट 2025-26 के तहत 500 MT के 100 नए गोदाम और 250 MT के 50 नए गोदामों का निर्माण प्रगति पर है।
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राजस्थान राज्य भण्डागार निगम (RSWC) के भौतिक एवं वित्तीय प्रदर्शन (2025-26) से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. दिसंबर 2025 तक RSWC के पास 97 गोदामों में कुल 17.25 लाख मीट्रिक टन औसत भंडारण क्षमता उपलब्ध है। B. गोदामों की औसत उपयोग क्षमता (Capacity Utilization) 48% दर्ज की गई है। C. RSWC की कुल आय 2024-25 के ₹142.62 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में अनंतिम रूप से ₹181.61 करोड़ पहुँची है। D. सहकारिता क्षेत्र के अंतर्गत राज्य में कुल 8,912 गोदामों का संचालन एवं निर्माण किया जा रहा है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। RSWC राज्य में फसलोत्तर प्रबंधन व भंडारण की मुख्य नोडल एजेंसी है। इसके पास 36 जिलों में 97 गोदाम हैं जिनकी औसत भंडारण क्षमता 17.25 लाख MT है। 2021-22 में 70% उपयोग के बाद 2022-23 (38%), 2023-24 (44%) व 2024-25 (47%) के बाद 2025-26 में गोदाम उपयोग 48% (8.25 लाख MT) रहा है। निगम की आय में निरंतर वृद्धि हुई है जो ₹181.61 करोड़ तक पहुँच गई है। इसके अलावा बजट 2025-26 में सहकारिता के तहत 100 पुराने गोदामों (100 MT) के नवीनीकरण का कार्य भी हाथ में लिया गया है।
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खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) क्षेत्र की योजनाओं एवं हालिया पहलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. 'राइजिंग राजस्थान 2024' समिट के तहत कृषि-खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में ₹43,794 करोड़ के 2,524 MoU हस्ताक्षरित हुए। B. PM-FME योजना के तहत असंगठित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के उन्नयन हेतु 35% (अधिकतम ₹10 लाख) की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी दी जाती है। C. 8 सितंबर 2025 को जयपुर में आयोजित 'राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव 2025' में 'राज स्पाइस ऐप' (Raj Spice App) लॉन्च किया गया। D. 'मिशन राज गिफ्ट' (Mission Raj GIFT) का उद्देश्य राज्य के कृषि उत्पादों को भौगोलिक संकेत (GI Tag) दिलाना है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सही हैं। राजस्थान को फूड प्रोसेसिंग हब बनाने हेतु 'राइजिंग राजस्थान 2024' में 2,524 MoU से ₹43,794 करोड़ का निवेश आया। असंगठित सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 2020-21 से लागू केंद्र प्रायोजित PM-FME योजना में 35% अनुदान (अधिकतम ₹10 लाख) दिया जाता है, जिसके तहत 2025-26 में ₹23.54 करोड़ मंजूर हुए। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित मसाला कॉन्क्लेव में पंजीकृत 4,000+ व्यापारियों हेतु 'राज स्पाइस ऐप' जारी हुआ। बजट 2026-27 में 'मिशन राज गिफ्ट' के तहत पारंपरिक कृषि व बागवानी उत्पादों को GI टैग दिलाने तथा बांसवाड़ा व उदयपुर में आंवला, महुआ, इमली प्रसंस्करण हेतु MFP Processing Centres स्थापित करने की घोषणा की गई है।
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राजस्थान में कृषक उपज के बेहतर विपणन हेतु संचालित 'कृषक उपहार योजना' के अंतर्गत क्या प्रावधान किया गया है?
(A) e-NAM मंडी पोर्टल पर ₹10,000 की कृषि उपज बेचने पर किसानों को लॉटरी कूपन दिया जाता है।
(B) केवल 100 क्विंटल से अधिक अनाज बेचने पर ₹50,000 का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
(C) जैविक खेती करने वाले किसानों को ₹1 लाख का उपहार चेक दिया जाता है।
(D) मंडी में उपज लाने वाले प्रत्येक किसान को मुफ़्त भोजन उपहार में दिया जाता है।
📝 व्याख्या (Explanation)
सही उत्तर विकल्प A है। कृषि विपणन निदेशालय (स्थापना 1974) द्वारा किसानों को अपनी उपज ई-नाम (e-NAM) और ऑनलाइन माध्यम से बेचने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु 'कृषक उपहार योजना' चलाई जा रही है। इसके तहत e-NAM पोर्टल पर ₹10,000 या उससे अधिक की बिक्री या भुगतान प्राप्त करने पर किसानों को ई-कूपन जारी किया जाता है। वर्ष 2025-26 (दिसंबर तक) में 798 लॉटरियों के माध्यम से पात्र किसानों को ₹1.38 करोड़ के पुरस्कार वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त कृषि विपणन सुदृढ़ीकरण हेतु गठित 'किसान कल्याण कोष' की राशि ₹1,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹7,500 करोड़ कर दी गई है।
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राजस्थान की शीर्ष सहकारी विपणन संस्थाओं (RAJFED एवं CONFED) के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: A. राजफेड (RAJFED) की स्थापना 26 नवंबर 1957 को हुई थी और यह मुख्य रूप से किसानों (Farmers) के लिए कार्य करती है। B. कॉनफेड (CONFED) की स्थापना 27 मार्च 1967 को हुई थी और यह उपभोक्ताओं (Consumers) के लिए थोक आपूर्ति का कार्य करती है। C. कॉनफेड द्वारा राज्य के 63,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को ₹662.50 करोड़ का पूरक पोषाहार आपूर्ति किया गया है। D. 'राष्ट्रीय सहकारी मसाला मेला 2025' का आयोजन 9-18 मई 2025 को जवाहर कला केंद्र, जयपुर में किया गया।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। राज्य में कृषि विपणन और उपभोक्ता वस्तुओं के वितरण हेतु दो प्रमुख संस्थाएँ हैं: RAJFED (F for Farmer - 26 नव 1957) जो समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद व उर्वरक/बीज आपूर्ति करती है, तथा CONFED (C for Consumer - 27 मार्च 1967) जो राज्य में उपभोक्ता थोक भंडारों (38 भंडार) व आंगनवाड़ी केंद्रों को पूरक पोषाहार आपूर्ति का संचालन करती है। 2025-26 में कॉनफेड ने ₹1,073.82 करोड़ का व्यवसाय किया। सहकारिता द्वारा जैविक उत्पादों व शुद्ध मसालों के प्रदर्शन हेतु 9-18 मई 2025 को जवाहर कला केंद्र जयपुर में राष्ट्रीय सहकारी मसाला मेले का आयोजन किया गया था।
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पशुधन जनगणना 2019 एवं राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान के हिस्से का सुमेलन कीजिए: सूची-I (पशुधन/उत्पाद): सूची-I: A. कुल ऊंट (Camels) B. कुल बकरी (Goats) C. कुल दूध उत्पादन (Milk) D. कुल ऊन उत्पादन (Wool) सूची-II: 1. 84.43% (देश में प्रथम स्थान) 2. 14.00% (देश में प्रथम स्थान) 3. 14.51% (देश में द्वितीय स्थान) 4. 47.53% (देश में प्रथम स्थान)
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। 20वीं पशुधन जनगणना (2019) के अनुसार राज्य में कुल पशुधन 568 लाख तथा मुर्गियाँ 146.23 लाख हैं। देश के कुल पशुधन का 10.60% हिस्सा राजस्थान में है। राज्य ऊंटों की संख्या में 84.43% के साथ देश में प्रथम, बकरियों में 14% के साथ प्रथम, भैंसों में 12.47% के साथ द्वितीय, भेड़ में 10.64% तथा गायों में 7.24% हिस्सा रखता है। पशुधन उत्पादों में राजस्थान देश के कुल ऊन उत्पादन का 47.53% उत्पादित कर एकाधिकार (प्रथम स्थान) रखता है तथा देश के कुल दूध उत्पादन में 14.51% योगदान देता है। वर्ष 2023-24 में राज्य में 34,733 हजार टन दूध तथा 160 लाख किग्रा ऊन का उत्पादन हुआ।
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राजस्थान में पशु स्वास्थ्य सेवाओं एवं चिकित्सा ढाँचे (2025-26) से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. राज्य में पशु चिकित्सालयों व संस्थाओं के माध्यम से 1962 हेल्पलाइन एवं 34 ब्लॉक मोबाइल यूनिट (536 वाहन) संचालित हैं। B. पशु निःशुल्क स्वास्थ्य योजना के तहत मुफ़्त दवाओं की संख्या 138 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है। C. खुरपका-मुंहपका (FMD) नियंत्रण कार्यक्रम के 5वें चरण में 1.86 करोड़ गाय-भैंसों का मुफ़्त टीकाकरण किया गया है। D. लम्पी स्किन डिजीज (LSD) के बचाव हेतु 2025-26 में 108.30 लाख पशुओं का मुफ़्त टीकाकरण किया गया।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सही हैं। राज्य में पशुधन को अकाल व बीमारियों से बचाने हेतु सुदृढ़ चिकित्सा ढाँचा है। 2025-26 में 98 पॉलीनिक, 873 प्रथम श्रेणी अस्पताल, 2,243 पशु चिकित्सालय तथा 7,712 उपकेंद्र कार्यरत हैं। डोर-स्टेप पशु चिकित्सा हेतु 1962 हेल्पलाइन से जुड़ी 34 मोबाइल यूनिट्स (536 वाहन) कार्यरत हैं। पशु निःशुल्क दवा योजना में दवाओं की बास्केट 138 से बढ़ाकर 200 की गई है। केंद्र-राज्य 60:40 भागीदारी से FMD टीकाकरण तथा 108.30 लाख पशुओं में LSD टीकाकरण किया गया। ऊंट संरक्षण योजना में ऊंट पालकों को 25,364 टोडियों (नवजात ऊंट) पर ₹17 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई।
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मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना तथा पशुपालक कल्याणकारी पहलों के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: A. 'मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना' की शुरुआत 13 दिसंबर 2024 को की गई। B. योजना का 100% प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। C. 1 दिसंबर 2025 से इसमें देशी गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट को शामिल कर 42 लाख पशुओं के बीमा का लक्ष्य है। D. 'मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना' के तहत पशुपालकों को ₹5 प्रति लीटर का अनुदान DBT से दिया जा रहा है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। पशुपालकों को आकस्मिक पशु हानि से सुरक्षा देने हेतु 13 दिसंबर 2024 को 'मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना' शुरू की गई, जिसमें शत-प्रतिशत प्रीमियम सरकार देती है और 2025-26 में 42 लाख पशु बीमित करने का लक्ष्य है। दुग्ध उत्पादकों को संबल देने हेतु 1 फरवरी 2019 से पुनः प्रारंभ 'CM दुग्ध उत्पादक संबल योजना' में ₹5/लीटर बोनस दिया जा रहा है (बजट 2026-27 में ₹700 करोड़ का प्रावधान)। डेयरी किसानों हेतु 'राज सारस सुरक्षा कवच बीमा' में मृत्यु पर ₹5 लाख तथा 'सारस सामूहिक आरोग्य बीमा' का 19वां चरण संचालित है।
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गौशाला विकास एवं गोपालन विभाग की योजनाओं का उनके वित्तीय प्रावधानों से सुमेलन कीजिए: सूची-I (योजना/पहल): सूची-I: A. पंजीकृत गौशाला अनुदान (1 अप्रैल 2025 से) B. गौशाला विकास योजना C. नंदीशाला जनसहभागिता योजना D. गौकाष्ठ मशीन योजना (बजट 2026-27) सूची-II: 1. बड़े पशु ₹50/दिन तथा छोटे पशु ₹25/दिन (270 दिन हेतु, बजट ₹1,400 करोड़)। 2. 90:10 जनसहभागिता; अधिकतम ₹10 लाख प्रति गौशाला सहायता। 3. 90:10 जनसहभागिता; ₹1.57 करोड़ प्रति नंदीशाला यूनिट। 4. 100 गौशालाओं को रियायती दर पर गौकाष्ठ निर्माण मशीनें।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। गोपालन विभाग (स्थापना 13 मार्च 2014) द्वारा गौवंश संवर्द्धन हेतु 1 अप्रैल 2025 से पंजीकृत गौशालाओं में प्रति पशु अनुदान बढ़ाकर बड़े पशु हेतु ₹50/दिन (पूर्व में ₹44) और छोटे पशु हेतु ₹25/दिन (पूर्व में ₹22) कर दिया गया है तथा 270 दिनों हेतु ₹1,204.90 करोड़ बांटे गए। गौशाला विकास योजना में 90% सरकारी व 10% जनसहभागिता से ₹10 लाख तक अनुदान दिया जाता है। बेसहारा नंदी संरक्षण हेतु नंदीशाला योजना में ₹1.57 करोड़/यूनिट (90:10) का प्रावधान है। पर्यावरण संरक्षण व लकड़ी विकल्प हेतु बजट 2026-27 में 100 गौशालाओं में गौकाष्ठ मशीन लगाने की घोषणा की गई है।
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राजस्थान सहकारी डेयरी संघ (RCDF) के संगठनात्मक एवं परिचालन प्रदर्शन (2025-26) पर विचार कीजिए: A. RCDF की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी (1977 में RCDF नामकरण) और इसका मुख्यालय जयपुर में है। B. RCDF के ढाँचे में 24 जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ एवं 19,643 प्राथमिक दुग्ध समितियाँ शामिल हैं। C. वर्ष 2025-26 में औसतन 30.29 लाख किग्रा प्रति दिन दुग्ध संकलन किया गया तथा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 51.40 लाख लीटर/दिन है। D. बजट 2026-27 में अलवर (3 लाख लीटर/दिन), बारां व सिरोही (50 हजार लीटर/दिन) में नए डेयरी प्लांट हेतु ₹300 करोड़ की घोषणा हुई है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। राज्य में श्वेत क्रांति का संचालन करने वाली शीर्ष संस्था RCDF (जयपुर) 24 जिला दुग्ध संघों व 19,643 समितियों के जरिए लगभग 10 लाख दुग्ध उत्पादकों से जुड़ी है। 2025-26 (दिसंबर तक) में RCDF ने ₹4,300 करोड़ का भुगतान पशुपालकों को किया तथा 21,669 MT सारस घी का विपणन किया। औसत दुग्ध संकलन 30.29 लाख किग्रा/दिन तथा विपणन 22.60 लाख लीटर/दिन रहा। डेयरी प्रसंस्करण विस्तार हेतु अलवर में ₹200 करोड़ से 3 लाख लीटर क्षमता तथा बारां व सिरोही में ₹100 करोड़ से 50-50 हजार लीटर क्षमता के नए डेयरी संयंत्रों की स्थापना बजट 2026-27 में स्वीकृत की गई है।
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) तथा राजस्थान में मत्स्य पालन आंकड़ों का सुमेलन कीजिए: सूची-I (मद): सूची-I: A. PMMSY का प्रारंभ B. वर्ष 2024-25 में मत्स्य उत्पादन C. राज्य में कुल उपलब्ध जल क्षेत्र D. खारे पानी जलीय कृषि प्रयोगशाला सूची-II: 1. 10 सितंबर 2020 (5 वर्षीय योजना)। 2. 1,13,647.21 मीट्रिक टन (MT)। 4.30 लाख हेक्टेयर (बड़े/मध्यम: 3.36, छोटे: 0.94)। 4. चूरू जिला (झींगा पालन संवर्द्धन हेतु)।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। नीली क्रांति को गति देने हेतु 10 सितंबर 2020 से लागू PMMSY के तहत राजस्थान में मत्स्य उत्पादन में निरंतर प्रगति हुई है। 2021-22 के 65,693 MT से बढ़कर 2024-25 में मत्स्य उत्पादन 1,13,647 MT (1.13 लाख MT) पहुँच गया तथा मत्स्य बीज उत्पादन 1,382 मिलियन रहा। राज्य में 4.30 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र उपलब्ध है। चूरू जिले की खारी भूमि व पानी का उपयोग कर झींगा (Shrimp) पालन को बढ़ावा देने हेतु वहाँ 'खारे पानी जलीय कृषि प्रयोगशाला' स्थापित की गई है। मछुआरों हेतु 'मत्स्य GATS' दुर्घटना बीमा में ₹5 लाख तक का सुरक्षा कवच दिया जा रहा है।
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पीएम किसान सम्मान निधि एवं सीएम किसान सम्मान निधि योजनाओं से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. PM-किसान योजना के तहत दिसंबर 2025 में 21वीं किश्त के रूप में 65.29 लाख किसानों को ₹1,305.80 करोड़ बांटे गए। B. e-KYC संतृप्ति और क्रियान्वयन के मामले में राजस्थान देश भर में 5वें स्थान पर है। C. 'मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि' की राशि को बजट 2025-26 में ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति वर्ष कर दिया गया है। D. सीएम किसान सम्मान निधि के तहत 4थी किश्त में 71.79 लाख किसानों को ₹717.96 करोड़ (₹1,000/किसान) DBT से हस्तांतरित हुए।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। कृषकों को प्रत्यक्ष आय सहायता देने हेतु केंद्रीय PM-किसान योजना (₹6,000/वर्ष) में राजस्थान 75.17 लाख पंजीकृत आवेदनों और e-KYC कार्यों के साथ देश में 5वें स्थान पर है। इसके पूरक के रूप में राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ 'CM किसान सम्मान निधि' की वार्षिक राशि को ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,000/वर्ष कर दिया गया है, जिससे किसानों को अब कुल ₹9,000 की वार्षिक आय सहायता मिल रही है। 4थी किश्त के रूप में राज्य के 71.79 लाख किसानों के खातों में ₹1,000 प्रति किसान की दर से ₹717.96 करोड़ सीधे बैंक खातों (DBT) में भेजे गए हैं।
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कृषक एवं कृषि श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों / दरों का सुमेलन कीजिए: सूची-I (योजना): सूची-I: A. लघु-सीमांत वृद्ध किसान पेंशन B. कृषि शिक्षा में बालिका प्रोत्साहन C. मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता D. महात्मा ज्योतिबा फुले मंडी श्रमिक कल्याण सूची-II: 1. महिला ≥ 55 वर्ष, पुरुष ≥ 58 वर्ष; ₹1,250 प्रति माह पेंशन। 2. 12वीं कृषि ₹15,000; स्नातक/स्नातकोत्तर ₹25,000; Ph.D. ₹40,000/वर्ष। 3. कृषि कार्य के दौरान दुर्घटना/मृत्यु/अंगभंग होने पर सहायता। 4. 2015 से लागू; मंडी हम्मालों/श्रमिकों को प्रसूति, विवाह व छात्रवृत्ति सहायता।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। सामाजिक सुरक्षा के तहत छोटे/सीमांत वृद्ध किसानों (महिला 55+, पुरुष 58+) को ₹1,250/माह पेंशन दी जा रही है (1.97 लाख लाभार्थी)। कृषि क्षेत्र में बालिकाओं को उच्च शिक्षा हेतु प्रोत्साहन राशि 12वीं कृषि में ₹15,000, B.Sc/M.Sc में ₹25,000 तथा Ph.D. में ₹40,000 प्रति वर्ष दी जाती है (25,862 बालिकाएं लाभान्वित)। खेतों पर मशीन/सर्पदंश/दुर्घटना से मृत्यु पर कृषक साथी सहायता में ₹2 लाख तक मदद दी जाती है। मंडी में पंजीकृत हमालों व अनुज्ञप्तिधारी श्रमिकों के कल्याण हेतु 2015 से संचालित महात्मा ज्योतिबा फुले योजना में विवाह व प्रसूति सहायता दी जाती है।
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पृथक कृषि बजट 2026-27 के वित्तीय विश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. कृषि बजट 2026-27 का कुल आकार ₹1,19,408.11 करोड़ है, जो राज्य के कुल बजट का 11.36% है। B. कृषि बजट में सब्सिडी (Subsidy) मद का हिस्सा सर्वाधिक 35.33% (₹42,191.11 करोड़) है। C. कृषि सब्सिडी में सर्वाधिक व्यय 'कृषि ऊर्जा टैरिफ सब्सिडी' (₹33,272.39 करोड़) पर प्रावधानित है। D. कृषि बजट का राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में योगदान 5.55% है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। राजस्थान में वर्ष 2022-23 से अलग 'कृषि बजट' पेश किया जा रहा है जिसकी थीम "समृद्ध किसान - खुशहाल राजस्थान" है। बजट 2026-27 में कृषि बजट का कुल आकार ₹1,19,408.11 करोड़ रखा गया है जो पिछले वर्ष से 7.59% अधिक तथा कुल राज्य बजट का 11.36% (GSDP का 5.55%) है। समेकित निधि से इसमें ₹69,422.99 करोड़ का योगदान है। व्यय ढाँचे में कृषि सब्सिडी 35.33% (₹42,191.11 करोड़) है जिसमें किसानों को मुफ़्त/रियायती बिजली देने हेतु ₹33,272 करोड़ की ऊर्जा टैरिफ सब्सिडी शामिल है। अन्य गतिविधियों (साख, बीमा, मंडी विकास, सामाजिक सुरक्षा) पर 47.97% (₹57,271.55 करोड़) का प्रावधान है।
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रबी विपणन सत्र 2026-27 में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एवं बोनस नीति पर विचार कीजिए: A. केंद्र सरकार द्वारा रबी विपणन सत्र 2026-27 हेतु गेहूं का MSP ₹2,585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है (2025-26 में ₹2,425 था)। B. राजस्थान सरकार द्वारा 'राजस्थान कृषक समर्थन योजना' के तहत MSP पर ₹150 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। C. गेहूं खरीद हेतु राज्य में कुल 383 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। D. राज्य में खरीद हेतु नई एजेंसी के रूप में 'राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम' को भी जोड़ा गया है।
(A) A, B, C एवं D सभी
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) केवल A, C और D
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों कथन A, B, C और D सत्य हैं। रबी विपणन सत्र 2026-27 में केंद्र सरकार द्वारा घोषित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585/क्विंटल (गत वर्ष ₹2,425/क्विंटल) है। राजस्थान सरकार अपने वादे के अनुसार 'राजस्थान कृषक समर्थन योजना' के तहत किसानों को ₹150/क्विंटल का राज्य बोनस दे रही है, जिससे राज्य के किसानों को गेहूं का कुल मूल्य ₹2,735/क्विंटल प्राप्त हो रहा है। गेहूं की पारदर्शी खरीद (10 मार्च से 30 जून 2026) हेतु 383 क्रय केंद्र बनाए गए हैं जहाँ FCI, RAJFED, NAFED, NCCF के साथ-साथ 'राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम' भी खरीद का संपादन कर रहा है।
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राजस्थान में डिजिटल कृषि (Digital Agriculture) एवं जल पहलों का उनकी तकनीकी विशेषताओं से सुमेलन कीजिए: सूची-I (पहल/पोर्टल): सूची-I: A. Raj-AIMS B. Agri-Stack PMU C. PM-KUSUM (Component-C) D. सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) लक्ष्य 2030 सूची-II: 1. AI/ML, GIS व सैटेलाइट इमेजरी आधारित मौसम व बोवाई सलाह (लागत ₹77 करोड़)। 2. किसानों की डिजिटल आईडी, क्रॉप मैपिंग व डेटा-आधारित कृषि सेवाएं। 3. कृषि फीडरों का सौरीकरण (Feeder Solarization); EDICON-2026 में गोल्ड अवार्ड। 4. सकल बोए गए क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई का दायरा वर्तमान 24% से बढ़ाकर 51% करना।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है। राजस्थान में कृषि के डिजिटलीकरण हेतु 'Raj-AIMS' (₹77 करोड़) के जरिए AI/ML और GIS से मौसम जोखिम संरक्षण व सलाह दी जा रही है। 'AgriStack' के जरिए किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार हो रहा है (राजसमंद में 15,000+ पंजीयन)। PM-KUSUM घटक-C में 838 सौर ऊर्जा संयंत्रों (2,162 MW) से फीडर सौरीकरण कर राष्ट्रीय स्तर पर 'EDICON-2026 गोल्ड अवार्ड' जीता गया है। जल दक्षता हेतु राज्य का लक्ष्य सकल बोए गए क्षेत्र का सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप/स्प्रिंकलर) में दायरा 2030 तक वर्तमान 24% से बढ़ाकर 51% करना है, जिसके लिए बजट 2026-27 में 36,000 फार्म पॉण्ड व 3 लाख हे. पाइपलाइन हेतु ₹585 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
New India Education (NIEd) — www.omkarsir.in