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📚 राज्यपाल
विषय: GK & GS Paper अंक: 40 समय: 40 Minutes कुल प्रश्न: 40 व्याख्या: 40 / 40 दिनांक: Batch: RAS FOUNDATION COURSE
1
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह उपबंध करता है कि 'प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा'?
(A) अनुच्छेद 152
(B) अनुच्छेद 153
(C) अनुच्छेद 154
(D) अनुच्छेद 155
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। हालाँकि, 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा इसमें यह प्रावधान जोड़ा गया कि एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है। मूल संविधान में एक राज्य के लिए एक ही राज्यपाल का प्रावधान था, परंतु प्रशासनिक सुविधा और व्यय में कमी लाने हेतु सातवें संशोधन द्वारा यह छूट प्रदान की गई। अनुच्छेद 152 में राज्य की परिभाषा दी गई है, अनुच्छेद 154 राज्य की कार्यपालिका शक्ति से संबंधित है तथा अनुच्छेद 155 राज्यपाल की नियुक्ति का उपबंध करता है।
2
राज्य की कार्यपालिका शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी। B. राज्यपाल अपनी कार्यपालिका शक्तियों का प्रयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा। C. राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का वास्तविक एवं कार्यकारी प्रधान होता है। D. अनुच्छेद 154(1) राज्य की कार्यपालिका शक्ति के राज्यपाल में निहित होने का उपबंध करता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 154(1) के अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करेगा। यहाँ 'अधीनस्थ' शब्द का अर्थ मुख्यमंत्री एवं उनकी मंत्रिपरिषद से है। राज्यपाल राज्य की कार्यपालिका का 'संवैधानिक' या 'विधिमान्य' (De Jure) प्रमुख होता है, जबकि मुख्यमंत्री राज्य की कार्यपालिका का 'वास्तविक' (De Facto) प्रमुख होता है। इसलिए कथन C असत्य है क्योंकि राज्यपाल वास्तविक प्रधान नहीं बल्कि संवैधानिक प्रधान होता है। कथन A, B तथा D पूरी तरह सही हैं।
3
भारतीय संविधान के अनुसार राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
(A) राज्य के मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्य विधानमंडल द्वारा
(B) भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा
(C) राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र (Warrant) द्वारा
(D) केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर संसद द्वारा
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 155 के तहत राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र (Warrant) द्वारा की जाती है। राज्यपाल का पद न तो केंद्र सरकार के अधीन कोई रोजगार है और न ही यह एक निर्वाचित पद है, बल्कि यह एक स्वतंत्र संवैधानिक पद है। भारत में कनाडा के संविधान से प्रेरणा लेते हुए राज्यपाल के मनोनयन/नियुक्ति की प्रणाली अपनाई गई है ताकि राज्य और केंद्र के मध्य समन्वय बना रहे। अन्य विकल्प असत्य हैं क्योंकि विधानमंडल, संसद या मुख्य न्यायाधीश के पास नियुक्ति का अधिकार नहीं है।
4
राज्यपाल की पदावधि (Tenure) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अनुच्छेद 156(1) के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त (Pleasure of the President) अपना पद धारण करता है। B. राज्यपाल, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है। C. राज्यपाल पद ग्रहण की तारीख से 5 वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है, किंतु वह तब तक पद पर बना रहता है जब तक उसका उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले। D. संविधान में राज्यपाल को उसके पद से हटाने के लिए महाभियोग या निश्चित आधारों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 156 में राज्यपाल की पदावधि का वर्णन है। इसके तहत राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है तथा राष्ट्रपति को त्यागपत्र देकर कभी भी पदमुक्त हो सकता है। सामान्यतः उसका कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष होता है, परंतु उत्तराधिकारी के आने तक वह पद पर बना रहता है। कथन D असत्य है क्योंकि संविधान में राज्यपाल को पद से हटाने का कोई स्पष्ट आधार या महाभियोग जैसी प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है; राष्ट्रपति उसे किसी भी समय वापस बुला सकते हैं। इसलिए केवल A, B और C सही हैं।
5
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में राज्यपाल के पद पर नियुक्त होने के लिए अर्हताओं (Qualifications) का उल्लेख है?
(A) अनुच्छेद 156
(B) अनुच्छेद 157
(C) अनुच्छेद 158
(D) अनुच्छेद 159
📝 व्याख्या (Explanation)
संविधान के अनुच्छेद 157 में राज्यपाल नियुक्त होने के लिए केवल दो संवैधानिक अर्हताओं का निर्धारण किया गया है: (1) वह भारत का नागरिक हो, तथा (2) वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। इसके अतिरिक्त दो राजनीतिक परंपराएँ भी विकसित हुई हैं कि वह संबंधित राज्य का निवासी न हो तथा उसकी नियुक्ति से पूर्व संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श लिया जाए। अनुच्छेद 156 पदावधि से, अनुच्छेद 158 पद की शर्तों से तथा अनुच्छेद 159 शपथ एवं प्रतिज्ञान के प्रारूप से संबंधित है।
6
राज्यपाल के पद की शर्तों (Conditions of Office) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. राज्यपाल संसद के किसी सदन या राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा। B. यदि संसद या विधानमंडल का कोई सदस्य राज्यपाल नियुक्त होता है तो पद ग्रहण की तिथि से उसका पुराना पद रिक्त मान लिया जाएगा। C. राज्यपाल अन्य कोई लाभ का पद (Office of Profit) धारण नहीं करेगा। D. यदि एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है तो उसके वेतन-भत्ते संबंधित राज्यों द्वारा संसद द्वारा निर्धारित अनुपात में दिए जाएँगे।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 158 में राज्यपाल पद की शर्तों का उल्लेख है। 158(1) के अनुसार वह संसद या विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता और 158(2) के अनुसार कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा। अनुच्छेद 158(3A) के तहत (7वें संशोधन 1956 द्वारा जोड़ा गया) यदि एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल बनता है, तो उसके वेतन एवं भत्तों का राज्यों के बीच आनुपातिक बंटवारा राष्ट्रपति के आदेश द्वारा तय किया जाता है, न कि संसद द्वारा। इसलिए कथन D असत्य है और केवल A, B तथा C सत्य हैं।
7
सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. अनुच्छेद 153 B. अनुच्छेद 155 C. अनुच्छेद 156 D. अनुच्छेद 158 सूची-II: 1. राज्यपाल की नियुक्ति 2. राज्य का राज्यपाल 3. पद के लिए शर्तें 4. राज्यपाल की पदावधि
(A) A-2, B-1, C-4, D-3
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-4, C-1, D-3
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय संविधान के भाग 6 में राज्य कार्यपालिका का वर्णन है। अनुच्छेद 153 उपबंध करता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। अनुच्छेद 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अधिपत्र से की जाती है। अनुच्छेद 156 राज्यपाल की पदावधि (5 वर्ष या प्रसादपर्यन्त) को दर्शाता है। अनुच्छेद 158 में राज्यपाल के पद की शर्तें उल्लिखित हैं। अतः सही मिलान A-2, B-1, C-4, D-3 है। अन्य सभी संयोजन अनुच्छेदों के सही मिलान को प्रदर्शित नहीं करते हैं।
8
राज्यपाल को पद एवं गोपनीयता की शपथ किसके द्वारा दिलाई जाती है?
(A) भारत के राष्ट्रपति द्वारा
(B) संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा
(C) राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा
(D) राज्य विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 159 के तहत राज्यपाल या राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन करने वाला व्यक्ति पद ग्रहण करने से पूर्व उस राज्य के अधिकारिता वाले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) या उनकी अनुपस्थिति में उस न्यायालय के उपलब्ध ज्येष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेता है। ध्यान रहे कि राज्यपाल की शपथ का प्रारूप संविधान की तीसरी अनुसूची में नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 159 में ही निहित है। राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं परंतु शपथ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ही दिलाते हैं।
9
राज्यपाल की अनुपस्थिति या आकस्मिक परिस्थितियों में उसके दायित्वों के निर्वहन से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. संविधान के अनुच्छेद 160 के तहत राष्ट्रपति ऐसी आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन हेतु उपबंध कर सकता है जो भाग 6 में उपबंधित नहीं हैं। B. राजस्थान में राज्यपाल की अनुपस्थिति के दौरान उसके दायित्वों का निर्वहन उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया जाता है। C. राज्यपाल की अनुपस्थिति में राज्य का मुख्यमंत्री स्वतः कार्यकारी राज्यपाल के रूप में शपथ लेता है। D. राजस्थान में न्यायमूर्ति जगत नारायण, वेदपाल त्यागी एवं के.डी. शर्मा कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में दायित्व निभा चुके हैं।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 160 राष्ट्रपति को किसी आकस्मिकता में राज्यपाल के कार्यों के संचालन हेतु व्यवस्था करने की शक्ति देता है। व्यवहार में जब राज्यपाल का पद रिक्त होता है या वह अनुपस्थित होता है, तो संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक राज्यपाल का दायित्व सौंपा जाता है। राजस्थान में न्यायमूर्ति जगत नारायण, वेदपाल त्यागी, के.डी. शर्मा आदि मुख्य न्यायाधीशों ने कार्यवाहक राज्यपाल का पद संभाला है। कथन C असत्य है क्योंकि मुख्यमंत्री कभी भी कार्यवाहक राज्यपाल नहीं बनता।
10
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को क्षमादान (Pardon) की शक्ति प्राप्त है?
(A) अनुच्छेद 160
(B) अनुच्छेद 161
(C) अनुच्छेद 162
(D) अनुच्छेद 165
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को उन विषयों संबंधी विधि के विरुद्ध अपराध में दोषी सिद्ध व्यक्तियों के दंड को क्षमा (Pardon), उसका प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite), परिहार (Remission) या लघुकरण (Commutation) करने की शक्ति प्राप्त है। हालाँकि, राज्यपाल मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा नहीं कर सकता (केवल निलंबित या कम कर सकता है, पूर्ण क्षमा की शक्ति केवल राष्ट्रपति को अनु. 72 में है) और न ही वह सैन्य अदालत (Court Martial) के दंड में हस्तक्षेप कर सकता है। अनुच्छेद 160 आकस्मिकताओं, 162 कार्यपालिका विस्तार तथा 165 महाधिवक्ता से संबंधित है।
11
अनुच्छेद 163 के अंतर्गत राज्यपाल की स्वविवेकीय शक्तियों व मंत्रिपरिषद से संबंध के संदर्भ में कौन-से कथन सत्य हैं? A. राज्यपाल को अपने स्वविवेकी कृत्यों को छोड़कर अन्य कार्यों के निर्वहन हेतु सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा। B. यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय राज्यपाल के विवेकानुसार है या नहीं, तो राज्यपाल का निर्णय ही अंतिम होगा। C. मंत्रियों द्वारा राज्यपाल को क्या सलाह दी गई, इस प्रश्न की जाँच किसी भी न्यायालय द्वारा की जा सकती है। D. राज्यपाल की स्वविवेकीय शक्ति के प्रयोग के समय वह वस्तुतः संघ सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 163(1) के अनुसार राज्यपाल की सहायता व सलाह हेतु मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री होगा। अनुच्छेद 163(2) के अनुसार राज्यपाल का स्वविवेकी निर्णय अंतिम होता है और उसकी वैधता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। अनुच्छेद 163(3) स्पष्ट करता है कि मंत्रियों द्वारा राज्यपाल को दी गई सलाह की जाँच किसी न्यायालय में नहीं की जाएगी। इसलिए कथन C असत्य है। स्वविवेक का प्रयोग करते समय राज्यपाल केंद्र/संघ सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है, अतः A, B व D सत्य हैं।
12
राजस्थान के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल द्वारा की जाती है?
(A) अनुच्छेद 161
(B) अनुच्छेद 165
(C) अनुच्छेद 174
(D) अनुच्छेद 177
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 165 के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित किसी व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) नियुक्त करता है। महाधिवक्ता राज्य का प्रथम विधि अधिकारी होता है। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त (During the pleasure of the Governor) पद धारण करता है तथा उसे वही पारिश्रमिक प्राप्त होता है जो राज्यपाल द्वारा अवधारित किया जाता है। अनुच्छेद 161 क्षमादान, 174 सत्राहूत/विघटन तथा 177 सदनों में मंत्रियों/महाधिवक्ता के अधिकारों से संबंधित है।
13
राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) के अधिकारों एवं स्थिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है। B. अनुच्छेद 177 के अनुसार महाधिवक्ता को विधानसभा में मतदान करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। C. महाधिवक्ता को वे सभी विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्राप्त होती हैं जो विधानमंडल के सदस्य को मिलती हैं। D. महाधिवक्ता का पारिश्रमिक राज्य के राज्यपाल द्वारा निर्धारित किया जाता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 177 के तहत राज्य के महाधिवक्ता को विधानमंडल के किसी भी सदन या समिति की कार्यवाही में भाग लेने तथा बोलने का अधिकार है, किंतु उसे 'मतदान करने का अधिकार' (Right to Vote) प्राप्त नहीं है। इसलिए कथन B असत्य है। महाधिवक्ता को विधानमंडल सदस्य के समान विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं और उसका पारिश्रमिक अनुच्छेद 165(3) के अनुसार राज्यपाल द्वारा ही तय किया जाता है। अतः कथन A, C तथा D सही हैं।
14
राज्यपाल द्वारा की जाने वाली नियुक्तियों एवं उनसे संबंधित पदाधिकारियों का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष व सदस्य B. राज्य का महाधिवक्ता C. राज्य निर्वाचन आयुक्त D. राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष सूची-II: 1. अनुच्छेद 165 के तहत नियुक्ति 2. अनुच्छेद 316 के तहत नियुक्ति 3. अनुच्छेद 243I के तहत नियुक्ति 4. अनुच्छेद 243K के तहत नियुक्ति
(A) A-2, B-1, C-4, D-3
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-3, C-4, D-1
(D) A-4, B-1, C-2, D-3
📝 व्याख्या (Explanation)
राज्यपाल राज्य के विभिन्न संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति करता है। RPSC के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति अनुच्छेद 316 के तहत, राज्य महाधिवक्ता की नियुक्ति अनुच्छेद 165 के तहत, राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति अनुच्छेद 243K के तहत तथा राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति अनुच्छेद 243I के तहत की जाती है। अतः सही कूट विकल्प A (A-2, B-1, C-4, D-3) है।
15
राज्यपाल द्वारा राज्य विधान परिषद (Legislative Council) में कुल सदस्य संख्या के कितने भाग को मनोनीत किया जाता है?
(A) कुल सदस्यों का 1/3 भाग
(B) कुल सदस्यों का 1/6 भाग
(C) कुल सदस्यों का 1/12 भाग
(D) कुल सदस्यों का 1/10 भाग
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 171(3)(e) व 171(5) के तहत जिन राज्यों में द्विधनात्मक विधानमंडल है, वहाँ राज्यपाल विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या के 1/6 भाग सदस्यों को मनोनीत करता है। ये मनोनीत सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन (Cooperative Movement) तथा समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्ति होते हैं। ध्यान रहे कि राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्यों के मनोनयन में 'सहकारिता' शामिल नहीं है, जबकि राज्यों में सहकारिता भी शामिल है।
16
राज्य विधानमंडल के सत्र, सत्रावसान एवं विघटन (अनुच्छेद 174) के संबंध में सही कथनों का चयन कीजिए: A. राज्यपाल समय-समय पर राज्य विधानमंडल के सदन या सदनों को अधिवेशन हेतु आहूत (Summon) करेगा। B. विधानमंडल के एक सत्र की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। C. राज्यपाल के पास विधानसभा को 'स्थगित' (Adjourn) करने की शक्ति होती है। D. राज्यपाल समय-समय पर सदन का सत्रावसान (Prorogation) कर सकेगा तथा विधानसभा का विघटन (Dissolution) कर सकेगा।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 174 के अनुसार राज्यपाल विधानमंडल का सत्र आहूत करता है, सत्रावसान करता है तथा विधानसभा को विघटित कर सकता है। दो सत्रों के मध्य अधिकतम 6 माह का अंतर हो सकता है। कथन C गलत है क्योंकि विधानसभा की कार्यवाही को 'स्थगित' (Adjourn) करने की शक्ति विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास होती है, न कि राज्यपाल के पास। अतः केवल A, B और D सही हैं।
17
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्यपाल के 'विशेष अभिभाषण' (Special Address) से संबंधित है?
(A) अनुच्छेद 174
(B) अनुच्छेद 175
(C) अनुच्छेद 176
(D) अनुच्छेद 177
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 176(1) के तहत राज्यपाल प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात् प्रथम सत्र के आरंभ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में विधानसभा (या दोनों सदनों) में समवेत रूप से विशेष अभिभाषण करता है और विधानमंडल को उसके आह्वान के कारण बताता है। अनुच्छेद 175 राज्यपाल के सदनों में अभिभाषण और संदेश भेजने के सामान्य अधिकार से संबंधित है। अनुच्छेद 174 सत्राहूत/सत्रावसान से तथा 177 मंत्रियों/महाधिवक्ता के अधिकारों से संबंधित है।
18
राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ (अनुच्छेद 200) आरक्षित रखने की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. यह राज्यपाल की एक स्वविवेकीय शक्ति है। B. यदि विधेयक राज्य नीति के निर्देशक तत्वों के परोक्ष रूप से विरुद्ध हो या राष्ट्रीय महत्त्व का हो, तो इसे आरक्षित रखा जा सकता है। C. यदि विधेयक उच्च न्यायालय की संवैधानिक स्थिति को खतरे में डालता हो, तो राज्यपाल के लिए इसे आरक्षित रखना अनिवार्य है। D. यदि विधेयक अनुच्छेद 31(3) के तहत संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण से संबंधित हो, तो भी इसे आरक्षित रखा जा सकता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति हेतु आरक्षित रख सकता है। यदि कोई विधेयक उच्च न्यायालय की शक्तियों को कम करता है या उसकी संवैधानिक स्थिति को खतरे में डालता है, तो उसे राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी है। इसके अतिरिक्त देश के व्यापक हित, नीति निर्देशक तत्वों के उल्लंघन या राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों पर राज्यपाल स्वविवेक से विधेयक आरक्षित कर सकता है। अतः सभी चारों कथन सत्य हैं।
19
राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखे गए विधेयकों पर राष्ट्रपति के निर्णय से संबंधित प्रावधान किस अनुच्छेद में हैं?
(A) अनुच्छेद 200
(B) अनुच्छेद 201
(C) अनुच्छेद 202
(D) अनुच्छेद 213
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 201 के अनुसार जब कोई विधेयक राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित रखा जाता है, तो राष्ट्रपति घोषित करेगा कि वह विधेयक पर अनुमति देता है या रोक लेता है। यदि विधेयक धन विधेयक नहीं है, तो राष्ट्रपति राज्यपाल को निर्देश दे सकेगा कि वह इसे विधानमंडल को संदेश के साथ लौटा दे। संदेश मिलने की तारीख से 6 माह के भीतर विधानमंडल पुनः विचार करेगा और संशोधन सहित या बिना संशोधन पारित कर दे, तब भी राष्ट्रपति अनुमति देने के लिए बाध्य नहीं होता है।
20
राज्यपाल की वित्तीय शक्तियों (Financial Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अनुच्छेद 202 के तहत राज्यपाल प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 'वार्षिक वित्तीय विवरण' (बजट) विधानसभा के समक्ष रखवाता है। B. धन विधेयक (Money Bill) राज्यपाल की पूर्व अनुमति/सिफारिश के बिना विधानसभा में पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता। C. राज्यपाल किसी अप्रत्याशित व्यय की पूर्ति के लिए 'राज्य की आकस्मिक निधि' (Contingency Fund) से अग्रिम राशि दे सकता है। D. राज्यपाल राज्य वित्त आयोग का गठन प्रत्येक 5 वर्ष में करता है तथा उसकी रिपोर्ट को विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
राज्यपाल के पास व्यापक वित्तीय शक्तियाँ हैं। अनुच्छेद 202 के तहत वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करवाना, धन विधेयक हेतु पूर्व सिफारिश देना (जिस कारण वह धन विधेयक को पुनर्विचार हेतु नहीं लौटा सकता), राज्य की संचित निधि व आकस्मिक निधि (अनुच्छेद 267/2) पर नियंत्रण रखना तथा अनुच्छेद 243I के तहत पंचायतों/नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति हेतु 5 वर्ष में वित्त आयोग का गठन करना राज्यपाल के वित्तीय अधिकार हैं। अतः सभी विकल्प सत्य हैं।
21
अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश (Ordinance) विधानमंडल का सत्र पुनः प्रारंभ होने के कितने समय के भीतर अनुमोदित होना अनिवार्य है, अन्यथा वह निष्प्रभावी हो जाता है?
(A) 1 महीना
(B) 6 सप्ताह
(C) 6 महीने
(D) 14 दिन
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 213 के तहत जब विधानमंडल विश्रांतिकाल (Recess) में हो, तो राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है जिसकी शक्ति विधानमंडल के अधिनियम के समान ही होती है। इस अध्यादेश को विधानमंडल का सत्र प्रारंभ होने की तिथि से 6 सप्ताह के भीतर विधानमंडल द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य है, अन्यथा यह स्वतः समाप्त हो जाता है। एक अध्यादेश की अधिकतम अवधि 6 माह और 6 सप्ताह हो सकती है। राज्यपाल अध्यादेश को किसी भी समय वापस ले सकता है।
22
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के संवैधानिक संरक्षण व विशेषाधिकारों (अनुच्छेद 361) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. राज्यपाल अपनी पदावधि के दौरान किए गए किसी कार्य के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा। B. राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसके विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई दांडिक (Criminal) कार्यवाही संस्थित या चालू नहीं रखी जाएगी। C. राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए किसी न्यायालय से कोई आदेशिका (Warrant) निकाली नहीं जाएगी। D. राज्यपाल द्वारा व्यक्तिगत हैसियत से किए गए कार्यों के लिए बिना किसी पूर्व नोटिस के दीवानी (Civil) मुकदमे तुरंत चलाए जा सकते हैं।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति व राज्यपालों को विशेषाधिकार प्रदान करता है। 361(2) के तहत आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती और 361(3) के तहत गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं हो सकता। कथन D असत्य है क्योंकि राज्यपाल के विरुद्ध व्यक्तिगत हैसियत से किए गए कार्यों के लिए दीवानी (Civil) मुकदमा चलाने से पूर्व उन्हें '2 महीने का लिखित नोटिस' देना अनिवार्य होता है, बिना नोटिस के तुरंत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इसलिए केवल A, B और C सत्य हैं।
23
भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची के अनुच्छेद 244(1) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में राज्यपाल की शक्तियों के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
(A) राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्र में जनजातियों के बीच भूमि हस्तांतरण को प्रतिबंधित करने हेतु विनियमन (Regulation) बना सकता है।
(B) राज्यपाल जनजाति सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council) के नियमों व अध्यक्ष नियुक्ति की प्रक्रिया तय करता है।
(C) राज्यपाल प्रतिवर्ष या जब भी राष्ट्रपति माँगे, इन क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपता है।
(D) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
📝 व्याख्या (Explanation)
संविधान की 5वीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों वाले राज्यों में राज्यपाल को विशेष शक्तियाँ दी गई हैं। वह संसद या विधानमंडल के किसी कानून को इन क्षेत्रों में लागू न करने या संशोधनों के साथ लागू करने का निदेश दे सकता है। वह जनजाति सलाहकार परिषद के गठन व नियमों का निर्धारण करता है, भूमि आवंटन/हस्तांतरण व साहूकारों के व्यवसाय को विनियमित कर सकता है तथा राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है। अतः सभी कथन सत्य हैं।
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राजस्थान के राज्यपाल द्वारा सुशोभित किए जाने वाले पदेन/अतिरिक्त पदों को संबंधित संस्थाओं से सुमेलित कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर B. भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, राजस्थान राज्य शाखा C. राजस्थान राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स D. राज्य सैनिक बोर्ड, राजस्थान सूची-II: 1. अध्यक्ष/सभापति 2. अध्यक्ष 3. संरक्षक (Patron) 4. अध्यक्ष
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-1, B-3, C-2, D-4
(D) A-4, B-2, C-3, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान के राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होने के साथ-साथ कई गैर-संवैधानिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के पदेन प्रमुख होते हैं। वे पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (उदयपुर) के अध्यक्ष/सभापति, रेड क्रॉस सोसाइटी (राजस्थान) के अध्यक्ष, राज्य सैनिक बोर्ड के अध्यक्ष, पूर्व सैनिकों की समेकित निधि प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तथा राजस्थान राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के 'संरक्षक' (Patron) होते हैं। अतः सही सुमेलन A-1, B-2, C-3, D-4 है।
25
राजस्थान में राज्यपाल राहत कोष एवं सम्बोधन प्रोटोकॉल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. प्राकृतिक आपदाओं में सहायता हेतु 'राजस्थान गवर्नर रिलीफ फंड' (राज्यपाल राहत कोष) का गठन 1978 में किया गया। B. राज्यपाल राहत कोष से व्यय राज्यपाल की आज्ञा एवं निर्देशानुसार निर्धारित प्रक्रिया से किया जाता है। C. अगस्त 2014 में जारी नए प्रोटोकॉल के अनुसार राज्यपाल के लिए 'महामहिम' या 'His/Her Excellency' शब्द का प्रयोग बंद कर दिया गया। D. वर्तमान प्रोटोकॉल के तहत हिंदी में 'माननीय राज्यपाल' या 'राज्यपाल महोदय' तथा अंग्रेजी में 'Honourable Governor' सम्बोधित किया जाता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में प्राकृतिक आपदाओं में त्वरित सहायता के लिए 14 मार्च 1978 को तत्कालीन राज्यपाल रघुकुल तिलक/जोगिंदर सिंह के काल में गवर्नर रिलीफ फंड का गठन हुआ, जिसका संचालन राज्यपाल के निर्देशों से होता है। 26 अगस्त 2014 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक द्वारा प्रोटोकॉल में संशोधन करके 'महामहिम' शब्द हटाकर हिंदी में 'माननीय राज्यपाल' व अंग्रेजी में 'Honourable Governor' तथा नाम से पूर्व 'श्री/श्रीमती' लगाना अनिवार्य किया गया। अतः सभी कथन सत्य हैं।
26
1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन के पश्चात् राजस्थान के प्रथम राज्यपाल कौन बने थे?
(A) महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय
(B) डॉ. सम्पूर्णानन्द
(C) सरदार गुरुमुख निहाल सिंह
(D) सरदार हुकम सिंह
📝 व्याख्या (Explanation)
30 मार्च 1949 से 31 अक्टूबर 1956 तक राजस्थान में 'राजप्रमुख' का पद अस्तित्व में था, जिस पर जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय आसीन थे। 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा राजप्रमुख पद समाप्त कर 'राज्यपाल' का पद सृजित किया गया। 1 नवंबर 1956 को सरदार गुरुमुख निहाल सिंह राजस्थान के प्रथम राज्यपाल बने। उनका कार्यकाल 1 नवंबर 1956 से 15 अप्रैल 1962 तक रहा, जो राजस्थान में किसी भी राज्यपाल का अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल (सर्वाधिक अवधि) रहा है।
27
राजस्थान में प्रथम बार राष्ट्रपति शासन (13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967) लागू होने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. यह राष्ट्रपति शासन राजस्थान विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण लगाया गया था। B. प्रथम राष्ट्रपति शासन के समय राजस्थान के राज्यपाल डॉ. सम्पूर्णानन्द थे। C. प्रथम राष्ट्रपति शासन के समय राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया थे। D. यह राष्ट्रपति शासन संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल के रूप में लगाया गया था।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
1967 में चतुर्थ विधानसभा चुनाव के बाद अस्पष्ट बहुमत के कारण राज्य में पहला राष्ट्रपति शासन लगाया गया। इस समय राज्यपाल डॉ. सम्पूर्णानन्द थे और मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया थे। कथन D असत्य है क्योंकि राज्यों में राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत संवैधानिक तंत्र विफल होने पर लगाया जाता है, न कि अनुच्छेद 352 के तहत। अनुच्छेद 352 राष्ट्रीय आपातकाल से संबंधित है। अतः केवल A, B और C सही हैं।
28
राजस्थान में लगे राष्ट्रपति शासन के वर्षों तथा तत्कालीन राज्यपालों का सही मिलान कीजिए: सूची-I (राष्ट्रपति शासन का वर्ष): सूची-I: A. प्रथम (1967) B. द्वितीय (1977) C. तृतीय (1980) D. चतुर्थ (1992-93) सूची-II: 1. वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक) 2. डॉ. सम्पूर्णानन्द 3. एम. चेन्ना रेड्डी / बलिराम भगत 4. रघुकुल तिलक
(A) A-2, B-1, C-4, D-3
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-4, C-1, D-3
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में अब तक 4 बार राष्ट्रपति शासन लगा है:
34
दरबारा सिंह 2. निर्मल चंद जैन 3. शैलेंद्र कुमार सिंह 4. श्रीमती प्रभा राव
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2, 3 और 4
(C) केवल 1, 3 और 4
(D) 1, 2, 3 एवं 4 सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में अब तक 4 राज्यपालों की मृत्यु उनके पद पर रहते हुए (कार्यकाल के दौरान) हुई है:
39
राजस्थान के राज्यपालों के पूर्व प्रशासनिक/राजनीतिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में सही युग्मों पर विचार कीजिए: A. एयर चीफ मार्शल ओ.पी. मेहरा - भारत के वायु सेना अध्यक्ष एवं हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के अध्यक्ष रहे। B. श्री बलिराम भगत - भारत की लोकसभा के अध्यक्ष (Speaker) रह चुके थे। C. श्री रघुकुल तिलक - 1958 से 1960 तक राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य रह चुके थे। D. श्री शैलेंद्र कुमार सिंह - 2007 में राज्यपाल बनने से पूर्व पाकिस्तान में भारत के सबसे लंबे समय तक राजदूत रहे थे।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान के कई राज्यपालों की विशिष्ट पृष्ठभूमि रही है। ओ.पी. मेहरा भारतीय वायुसेना के प्रमुख (Air Chief Marshal) तथा HAL व भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष रहे। बलिराम भगत पूर्व लोकसभा अध्यक्ष थे। रघुकुल तिलक एकमात्र ऐसे राज्यपाल हैं जो पूर्व में RPSC के सदस्य रहे थे। एस.के. सिंह (शैलेंद्र कुमार सिंह) भारतीय विदेश सेवा अधिकारी थे जो पाकिस्तान में भारत के सबसे लंबे समय तक राजदूत रहे। अतः सभी चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं।
40
राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल कौन बनी थीं तथा उनसे संबंधित कौन-सा तथ्य सही है?
(A) श्रीमती कमला बेनीवाल - उन्होंने पद से त्यागपत्र नहीं दिया था।
(B) श्रीमती प्रतिभा पाटिल - वे नवंबर 2004 से जून 2007 तक राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल रहीं तथा राष्ट्रपति चुनाव हेतु पद से त्यागपत्र दिया।
(C) श्रीमती प्रभा राव - वे राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल थीं और उन्होंने 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।
(D) श्रीमती मार्गरेट अल्वा - वे राज्य की प्रथम महिला राज्यपाल बनीं।
📝 व्याख्या (Explanation)
श्रीमती प्रतिभा पाटिल 8 नवंबर 2004 से 23 जून 2007 तक राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल रहीं। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी चुने जाने के कारण 2007 में राज्यपाल पद से त्यागपत्र दे दिया था (वे राजस्थान में त्यागपत्र देने वाली दूसरी राज्यपाल तथा भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनीं)। राज्य की द्वितीय महिला राज्यपाल प्रभा राव तथा तृतीय महिला राज्यपाल मार्गरेट अल्वा थीं। कमला बेनीवाल राजस्थान की प्रथम महिला मंत्री/उपमुख्यमंत्री थीं।
41
राजस्थान के वर्तमान राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. उन्होंने 31 जुलाई 2024 को राजस्थान के 22वें (व्यक्तिशः) राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण किया। B. वे महाराष्ट्र विधानसभा के 6 बार विधायक रह चुके हैं तथा 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। C. वे महाराष्ट्र सरकार में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रह चुके हैं। D. उन्होंने 30 जून 2024 को राजस्थान के राज्यपाल का पदभार सम्भाला था।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, B और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने 31 जुलाई 2024 को कलराज मिश्र के स्थान पर राजस्थान के राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया। वे महाराष्ट्र की फुलंब्री विधानसभा सीट से 6 बार विधायक, राज्य मंत्री तथा 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा के निर्विरोध अध्यक्ष रहे हैं। कथन D असत्य है क्योंकि उन्होंने 30 जून 2024 को नहीं बल्कि 31 जुलाई 2024 को पदभार ग्रहण किया था। अतः केवल A, B और C सही हैं।
42
राजस्थान के राज्यपालों को उनके कार्यकाल के दौरान रहे मुख्यमंत्रियों से सुमेलित कीजिए: सूची-I (राज्यपाल): सूची-I: A. न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह B. डॉ. सम्पूर्णानन्द C. ओ.पी. मेहरा D. बसंतराव पाटिल सूची-II: 1. मोहन लाल सुखाड़िया 2. अशोक गहलोत 3. हरिदेव जोशी 4. शिवचरण माथुर
(A) A-2, B-1, C-4, D-3
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-4, C-1, D-3
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के समकालीन युग्म इस प्रकार हैं: * अंशुमान सिंह (1999-2003): मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (प्रथम कार्यकाल) * डॉ. सम्पूर्णानन्द (1962-1967): मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़िया * ओ.पी. मेहरा (1982-1985): मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर * बसंतराव पाटिल (1985-1987): मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी। अतः सही कूट विकल्प A (A-2, B-1, C-4, D-3) है।
43
राजस्थान में कार्यवाहक (Acting) एवं अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) वाले राज्यपालों से संबंधित कथनों पर विचार कीजिए: A. राजस्थान में नवंबर 1970 से मई 2012 के मध्य 9 कार्यवाहक तथा 8 अतिरिक्त प्रभार वाले राज्यपाल रहे हैं। B. राजस्थान के प्रथम अतिरिक्त प्रभार वाले राज्यपाल डॉ. स्वरूप सिंह (गुजरात के राज्यपाल) थे। C. राजस्थान में सबसे कम अवधि के लिए कार्यवाहक राज्यपाल न्यायमूर्ति मिलापचंद जैन (3 से 13 फरवरी 1990) रहे। D. सुखदेव प्रसाद ने राजस्थान में कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में कार्य किया था।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों को कार्यवाहक राज्यपाल तथा पड़ोसी राज्यों के राज्यपालों को अतिरिक्त प्रभार दिया जाता रहा है। 1991 में डॉ. स्वरूप सिंह को प्रथम अतिरिक्त प्रभार दिया गया। मिलापचंद जैन मात्र 10 दिन कार्यवाहक राज्यपाल रहे जो न्यूनतम है। कथन D असत्य है क्योंकि सुखदेव प्रसाद राजस्थान के नियमित/पूर्णकालिक राज्यपाल थे, उन्होंने कार्यवाहक या अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य नहीं किया। अतः केवल A, B व C सत्य हैं।
44
एम.एम. पुंछी आयोग (2007) ने राज्यपाल के पद व कार्यप्रणाली के संदर्भ में किस प्रमुख व्यवस्था की सिफारिश की थी?
(A) राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा महाभियोग (Impeachment) लगाकर हटाने का प्रावधान होना चाहिए।
(B) राज्यपाल का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए निश्चित होना चाहिए और 'प्रसादपर्यन्त' का नियम समाप्त होना चाहिए।
(C) राज्यपाल की नियुक्ति हेतु मुख्यमंत्री की सलाह संवैधानिक रूप से अनिवार्य की जानी चाहिए।
(D) उपर्युक्त सभी सिफारिशें की गई थीं।
📝 व्याख्या (Explanation)
मदन मोहन पुंछी की अध्यक्षता में गठित द्वितीय केंद्र-राज्य संबंध आयोग (2007) ने सिफारिश की थी कि राज्यपालों को केंद्र की मनमर्जी से हटाने की प्रथा रोकी जाए। आयोग ने राज्यपाल का 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल तय करने, उन्हें पद से हटाने के लिए राज्य विधानमंडल द्वारा संविधान के अनुच्छेद 61 की तर्ज पर महाभियोग प्रक्रिया अपनाने तथा नियुक्ति में मुख्यमंत्री की प्रभावी भूमिका सुनिश्चित करने की सिफारिश की थी। अतः सभी कथन सही हैं।
45
राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष व सदस्यों के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों पर विचार कीजिए: A. RPSC के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। B. राज्यपाल RPSC के अध्यक्ष या किसी सदस्य को कदाचार के आधार पर उनके पद से स्वयं बर्खास्त कर सकता है। C. RPSC अध्यक्ष या सदस्य को केवल भारत के राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय की जाँच (अनुच्छेद 145) के पश्चात् ही हटाया जा सकता है। D. जाँच के दौरान राज्यपाल आरोपी अध्यक्ष या सदस्य को निलंबित (Suspend) कर सकता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
RPSC के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। परंतु राज्यपाल को उन्हें पद से हटाने (Dismiss/Remove) का अधिकार नहीं है। उन्हें केवल राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय की अनुच्छेद 145 के तहत जाँच रिपोर्ट सिद्ध कदाचार पाए जाने पर ही हटाया जा सकता है। हालाँकि, उच्चतम न्यायालय की जाँच प्रक्रिया के दौरान राज्यपाल उन्हें निलंबित (Suspend) करने की शक्ति रखता है। कथन B असत्य है क्योंकि राज्यपाल बर्खास्त नहीं कर सकता।
46
राजस्थान विधानसभा की निम्नलिखित में से किस समिति में सदस्यों की पूर्व-निर्धारित निश्चित संख्या (जैसे 15 सदस्य) नियत नहीं है?
(A) याचिका समिति (Committee on Petitions)
(B) विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges)
(C) सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति (General Purposes Committee)
(D) सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति (Committee on Government Assurances)
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया नियमों के अनुसार याचिका समिति, विशेषाधिकार समिति तथा सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति में सदस्यों की संख्या अधिकतम 15 निर्धारित होती है। जबकि सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति (General Purposes Committee) में विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति तालिका के सदस्य, समितियों के अध्यक्ष तथा दलगत नेता शामिल होते हैं, अतः इसमें सदस्यों की संख्या पूर्व-निर्धारित नहीं होती है।
47
राजस्थान विधानसभा में राज्य मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अविश्वास प्रस्ताव केवल विधानसभा में ही लाया जा सकता है। B. अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार करने हेतु विधानसभा के कुल सदस्यों के कम से कम 1/5 भाग (20%) सदस्यों का समर्थन अनिवार्य है। C. अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर केवल मुख्यमंत्री को ही त्यागपत्र देना पड़ता है, पूरी मंत्रिपरिषद भंग नहीं होती। D. राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्यों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हेतु न्यूनतम 40 सदस्यों के पक्ष में होना आवश्यक है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अविश्वास प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व का परीक्षण करने हेतु केवल विधानसभा में लाया जाता है। राजस्थान विधानसभा के नियमों के अनुसार कुल सदस्य संख्या (200) का कम से कम 1/5 भाग (यानी न्यूनतम 40 सदस्य) प्रस्ताव के पक्ष में खड़े होने चाहिए तभी चर्चा होती है। कथन C असत्य है क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को सामूहिक रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है। अतः केवल A, B और D सही हैं।
48
संविधान के अनुच्छेदों का राज्यपाल की शक्तियों से सही मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. अनुच्छेद 161 B. अनुच्छेद 174 C. अनुच्छेद 200 D. अनुच्छेद 213 सूची-II: 1. विधानमंडल के विश्रांतिकाल में अध्यादेश प्रख्यापित करना 2. क्षमादान एवं दंडादेश को कम करने की शक्ति 3. विधानमंडल के सत्र आहूत, सत्रावसान व विघटन करना 4. राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर अनुमति देना या रोकना
(A) A-2, B-3, C-4, D-1
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-4, C-3, D-1
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियों का अनुच्छेदों के अनुसार सही मिलान इस प्रकार है: * अनुच्छेद 161: क्षमादान, परिहार व लघुकरण की शक्ति (2) * अनुच्छेद 174: विधानमंडल के सत्र का आह्वान, सत्रावसान एवं विधानसभा का विघटन (3) * अनुच्छेद 200: विधेयकों पर अनुमति देना, रोकना या राष्ट्रपति हेतु आरक्षित रखना (4) * अनुच्छेद 213: विश्रांतिकाल में अध्यादेश जारी करने की शक्ति (1)। अतः सही कूट विकल्प A है।
49
राज्यपाल की स्वविवेकीय शक्तियों (Discretionary Powers) एवं संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. संविधान के तहत राज्यपाल को अनुच्छेद 200 के तहत विधेयक आरक्षित करने में स्पष्ट स्वविवेक प्राप्त है। B. त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में मुख्यमंत्री के चयन में राज्यपाल अपने व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग कर सकता है। C. राज्यपाल को संविधान के अंतर्गत कोई भी स्वविवेकीय शक्ति प्राप्त नहीं है, वह पूर्णतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। D. अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता की रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजना राज्यपाल का विवेकाधिकार है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C एवं D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय संविधान में राष्ट्रपति की तुलना में राज्यपाल को अधिक स्पष्ट स्वविवेकीय शक्तियाँ (Discretionary Powers) दी गई हैं (जैसे अनुच्छेद 163(2), अनुच्छेद 200 में विधेयक आरक्षित करना, अनुच्छेद 356 की रिपोर्ट भेजना, त्रिशंकु स्थिति में CM का चयन आदि)। कथन C असत्य है क्योंकि यह दावा करता है कि राज्यपाल को कोई स्वविवेक प्राप्त नहीं है, जो कि गलत है। अनुच्छेद 163(1) में स्पष्ट है कि स्वविवेकी कार्यों को छोड़कर ही सलाह बाध्यकारी है। अतः A, B और D सत्य हैं।
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