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📚 RAS PRLELIMS FULL PAPER
विषय: GK & GS Paper अंक: 200 समय: 2 Hours 30 Minutes कुल प्रश्न: 150 व्याख्या: 150 / 150 दिनांक: Batch: RAS FOUNDATION COURSE
1
हड़प्पा संस्कृति तथा मेसोपोटामिया की संस्कृतियों में आधारभूत भिन्नताओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. मेसोपोटामिया की नगर योजना में मंदिर महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं किन्तु हड़प्पा सभ्यता में इसका अभाव है। B. मेसोपोटामिया व मिश्र के समान भव्य कब्रें हड़प्पा सभ्यता से भी मिली हैं। C. मेसोपोटामिया की लिपि में हड़प्पा लिपि की तुलना में अधिक चिह्न हैं। D. हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना जाल की तरह (Grid system) थी जबकि मेसोपोटामिया में ऐसा नहीं था। कूट: (A) A और D (B) A, C और D (C) B और C (D) उपर्युक्त सभी
(A) केवल A
(B) A और B
(C) B और C
(D) उपर्युक्त सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
हड़प्पा सभ्यता में मेसोपोटामिया के विपरीत भव्य कब्रों का अभाव है (B असत्य)। मेसोपोटामिया की कीलाक्षर लिपि में चिह्नों की संख्या अधिक है (C असत्य)। अतः A और D सत्य हैं।
2
पुरास्थल जूनी - कुरान से किस निर्माण के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं?
(A) बन्दरगाह गोदी
(B) जलाशय
(C) अन्नभण्डारगृह
(D) स्टेडियम
📝 व्याख्या (Explanation)
गुजरात के कच्छ जिले में स्थित पुरास्थल जूनी - कुरान (Juni-Kuran) से हड़प्पाकालीन खेल के मैदान या स्टेडियम (Stadium) तथा विशाल पत्थरों की संरचनाओं के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। धोलावीरा के समान ही जूनी - कुरान भी कच्छ क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण हड़प्पाकालीन स्थल है जहाँ से सार्वजनिक कार्यक्रमों और खेलों के लिए बने विशाल स्टेडियम के अवशेष मिले हैं। लोथल से गोदीबाड़ा (Dockyard) तथा धोलावीरा से जलाशय के साक्ष्य प्रमुखता से मिलते हैं। इस प्रकार जूनी - कुरान का संबंध मुख्यतः स्टेडियम निर्माण से सिद्ध होता है।
3
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. पर्सनेलिटी ऑफ इंडिया B. द बर्थ आफ इडियन सिविलाइजेशन C. प्री हिस्टोरिक इंडिया D. प्री हिस्ट्री एण्ड प्रोटोहिस्ट्री आफ इंडिया एण्ड पाकिस्तान सूची-II: 1. सुब्बाराव 2. एल्चिन 3. स्टुअर्ट पिग्गट 4. एच.डी. साकलिया
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-3, B-1, C-4, D-2
(C) A-2, B-3, C-1, D-4
(D) A-3, B-2, C-4, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय पुरातत्व एवं प्रागैतिहासिक अध्ययन पर लिखे गए प्रमुख ग्रंथों और उनके विद्वान लेखकों का सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'पर्सनेलिटी ऑफ इंडिया' पुस्तक बी. सुब्बाराव द्वारा लिखी गई है जिसमें भारतीय भूगोल और संस्कृति के प्रागैतिहासिक संबंधों की व्याख्या है। 'द बर्थ ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन' पुस्तक ब्रिजेट एवं रेमंड एल्चिन द्वारा रचित है। 'प्री हिस्टोरिक इंडिया' प्रसिद्ध पुरातत्वविद स्टुअर्ट पिग्गट का ग्रंथ है जिसमें उन्होंने हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को एक जुड़वां राजधानी बताया था। 'प्री हिस्ट्री एंड प्रोटोहिस्ट्री ऑफ इंडिया एंड पाकिस्तान' एच.डी. साकलिया की प्रामाणिक कृति है। अतः विकल्प A-1, B-2, C-3, D-4 सही सुमेलित है।
4
'एकमेवाद्वितीय ब्रह्म' सूक्ति उल्लेखित है-
(A) छान्दोग्य उपनिषद् से
(B) बृहदारण्यक उपनिषद् में
(C) कठोपनिषद् में
(D) केनोपनिषद् में
📝 व्याख्या (Explanation)
प्रसिद्ध वेदांतिक और अद्वैतवादी महावाक्य 'एकमेवाद्वितीयं ब्रह्म' (अर्थात ब्रह्म एक ही है, उसके समान दूसरा कोई नहीं है) का वर्णन छान्दोग्य उपनिषद् में मिलता है। छान्दोग्य उपनिषद सामवेद से संबंधित है और यह सबसे प्राचीन उपनिषदों में से एक है। इसी उपनिषद में श्वेतकेतु और उनके पिता आरुणि के मध्य का प्रसिद्ध संवाद तथा 'तत्वमसि' महावाक्य भी वर्णित है। बृहदारण्यक उपनिषद में 'अहं ब्रह्मास्मि' तथा कठोपनिषद में यम-नचिकेता संवाद का वर्णन मिलता है। अतः सही उत्तर छान्दोग्य उपनिषद है।
5
निम्नांकित में से कौनसा कथन असत्य है? A) अश्वमेध यज्ञ का सर्वप्रथम वर्णन ऋग्वेद के प्रथम मण्डल में मिलता है। B) इन्द्र, वरुण आदि देवताओं का महत्त्व उत्तर वैदिक काल में घट गया था। C) मोक्ष की चर्चा सर्वप्रथम श्वेताश्वतर उपनिषद् में मिलती है। D) संस्कारों का प्रचलन वैदिक काल में हुआ, परंतु वैदिक साहित्य में इसका व्यवस्थित उल्लेख नहीं मिलता।
(A) अश्वमेध यज्ञ का सर्वप्रथम वर्णन सामवेद के सप्तम मण्डल में मिलता है।
(B) इन्द्र, वरुण आदि देवताओं का महत्त्व उत्तर वैदिक काल में घट गया था।
(C) मोक्ष और माया की चर्चा सर्वप्रथम तैत्तिरीय उपनिषद् में मिलती है।
(D) संस्कारों का प्रचलन वैदिक काल में हुआ, परंतु वैदिक साहित्य में इसका उल्लेख नहीं मिलता।
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन A असत्य है क्योंकि अश्वमेध का उल्लेख ऋग्वेद के 10वें मण्डल (पुरुष सूक्त के बाद के प्रसंगों) में मिलता है, न कि प्रथम मण्डल में। सामवेद में मण्डल व्यवस्था नहीं होती।
6
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. ऋग्वेद B. यजुर्वेद C. सामवेद D. अथर्ववेद सूची-II: 1. ऐतरेय 2. ईशोपनिषद् 3. छान्दोग्य 4. माण्डुक्य
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-3, B-4, C-1, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
चारों वेदों और उनसे संबंधित उपनिषदों का सुमेलित विवरण इस प्रकार है: ऋग्वेद का प्रमुख उपनिषद ऐतरेय और कौषीतकि है। यजुर्वेद का अंतिम अध्याय ईशोपनिषद है जो आध्यात्मिक चिंतन से संबंधित है। सामवेद का मुख्य उपनिषद छान्दोग्य एवं केन उपनिषद है। अथर्ववेद से माण्डूक्य, मुण्डक तथा प्रश्न उपनिषद संबंधित हैं। अतः सही कूट A-1, B-2, C-3, D-4 है।
7
बौद्ध धर्म से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. बौद्ध धर्म सांख्य दर्शन से प्रभावित है। B. गृहत्याग के पश्चात् बुद्ध के प्रथम गुरु रूद्रक रामपुत्त बने। C. आलार कलाम ने महात्मा बुद्ध को 'आकिंचन्यायतन' तथा 'अरूपसमापत्ति' की शिक्षा दी। D. मज्झिम निकाय में बुद्ध द्वारा ज्ञान प्राप्ति हेतु क्रमिक रूप में आठ ध्यान अवस्थाओं का वर्णन मिलता है।
(A) केवल A और D
(B) केवल B और C
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
महात्मा बुद्ध के जीवन और दर्शन से संबंधित कथनों में सांख्य दर्शन का बौद्ध धर्म पर गहरा प्रभाव स्वीकार किया जाता है। बुद्ध ने गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण) के बाद अपने प्रथम गुरु आलार कलाम (वैशाली) से सांख्य दर्शन तथा ध्यान की शिक्षा ली थी, न कि रुद्रक रामपुत्त से (रुद्रक रामपुत्त उनके दूसरे गुरु थे जो राजगृह में मिले थे)। आलार कलाम ने उन्हें ध्यान की उच्च अवस्थाएं सिखााई थीं। मज्झिम निकाय में बुद्ध द्वारा बोधि प्राप्ति हेतु आठ क्रमिक ध्यान अवस्थाओं (झान) का स्पष्ट विवरण प्राप्त होता है। अतः कथन A और D सही हैं।
8
बोधिसत्व की संकल्पना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. बोधिसत्व बौद्ध मत के हीनयान सम्प्रदाय की केन्द्रीय संकल्पना है। B. बोधिसत्व आपके प्रबोधन मार्ग पर बढ़ता हुआ करूणामय है। C. बोधिसत्व समस्त सचेतन प्राणियों को उनके प्रबोधन मार्ग पर चलने में सहायता करने के लिए स्वयं की निर्वाण प्राप्ति में देरी करता है। D. महायान संप्रदाय में बोधिसत्व की पूजा पर अत्यधिक बल दिया गया है।
(A) केवल A
(B) केवल B, C और D
(C) केवल B और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
बोधिसत्व की संकल्पना बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय की केन्द्रीय और सबसे महत्त्वपूर्ण संकल्पना है, न कि हीनयान की। हीनयान का आदर्श 'अर्हत' पद प्राप्त करना है जो व्यक्तिगत मोक्ष पर बल देता है, जबकि महायान का आदर्श 'बोधिसत्व' है। बोधिसत्व वह करुणामय सत्त्व है जो स्वयं बुद्धत्व या निर्वाण प्राप्त करने की सामर्थ्य रखते हुए भी संसार के समस्त जीवित प्राणियों को दुख से मुक्त करने और उन्हें मार्ग दिखाने के लिए स्वयं के निर्वाण को स्थगित कर देता है। महायान शाखा में अवलोकितेश्वर, मंजुश्री और मैत्रेय जैसे बोधिसत्वों की अत्यधिक मान्यता है। अतः कथन B, C और D सत्य हैं जबकि A असत्य है।
9
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. आचारांगसूत्र B. प्रश्नव्याकरण C. विवागसुयम D. समवायंगसूत्र सूची-II: 1. जैन भिक्षुओं के आचार नियम 2. जैन पंच महाव्रतों एवं प्रश्नों का वर्णन 3. कर्म फल हेतु दण्ड विधान 4. वस्तुओं को देश, काल, संख्या के आधार पर परिभाषित करना
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-1, B-2, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-2, B-3, C-4, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
जैन धर्म के 12 अंगों (आगमों) और उनमें वर्णित मुख्य विषयों का सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'आचारांग सूत्र' में जैन भिक्षुओं और साधुओं द्वारा पालन किए जाने वाले आचार-नियमों तथा कठोर तपश्चर्या का वर्णन है। 'प्रश्नव्याकरण' में जैन धर्म के पांच महाव्रतों, पापों तथा विविध प्रश्नों-उत्तरों की व्याख्या है। 'विवागसुयम' (विपाकसूत्र) में कर्मों के फल तथा दुष्कर्मों के कारण मिलने वाले दुखों व दंड का विवरण है। 'समवायांग सूत्र' में जैन सिद्धांतों, ब्रह्मांड तथा वस्तुओं का स्थान, समय एवं संख्या के आधार पर वर्गीकरण किया गया है। अतः कूट A-1, B-2, C-3, D-4 सही है।
10
ऋग्वेद में निम्नलिखित में से किन दो जैन तीर्थंकरो का उल्लेख मिलता है?
(A) ऋषभदेव, अरिष्टनेमि
(B) पार्श्वनाथ, महावीर स्वामी
(C) अश्वजीत, संजय वेठ्ठलिपुन्त
(D) ऋषभदेव, पार्श्वनाथ
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) तथा 22वें तीर्थंकर भगवान अरिष्टनेमि (नेमिनाथ) के नामों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद में ऋषभदेव को वातवसना तथा मरुद्गणों का भ्राता कहा गया है और अरिष्टनेमि को भगवान श्रीकृष्ण का समकालीन एवं संबंधी माना गया है। इसके अलावा विष्णु पुराण और भागवत पुराण में भी ऋषभदेव को विष्णु के अवतार के रूप में वर्णित किया गया है। पार्श्वनाथ 23वें और महावीर स्वामी 24वें तीर्थंकर थे जिनका समय ऐतिहासिक काल (8वीं-6ठी शताब्दी ईसा पूर्व) का है।
11
प्राचीन भारत के संदर्भ में 'द्वितीय नगरीकरण' निम्नलिखित में से किसकी नगरीय प्रक्रिया को इंगित करता है?
(A) सोहन नदी घाटी की
(B) सिन्धु घाटी की
(C) गंगा घाटी की
(D) नर्मदा घाटी की
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय इतिहास में 'प्रथम नगरीकरण' कांस्य युगीन सिंधु घाटी सभ्यता (2600 ई.पू. - 1900 ई.पू.) की नगरीय व्यवस्था को कहा जाता है। जबकि छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर भारत की मध्य गंगा घाटी (Ganga River Valley) में लोहे के व्यापक प्रयोग, कृषि अधिशेष और महाजनपदों के उदय के साथ विकसित हुए नए नगरों (जैसे पाटलिपुत्र, वैशाली, कौशांबी, श्रावस्ती, राजगृह) के विकास की प्रक्रिया को 'द्वितीय नगरीकरण' (Second Urbanization) कहा जाता है। यह काल एनबीडब्ल्यूपी (उत्तरी काले पॉलिशदार मृदभांड) संस्कृति और आहत (Punch-marked) सिक्कों के प्रचलन के लिए भी जाना जाता है।
12
Q12. सम्राट अशोक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन असत्य हैं? A. अशोक का धम्म नैतिक व्यवहार संहिता थी। B. अशोक ने बौद्ध धर्म ग्रहण करने के बाद भी अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णुता बनाए रखी। C. अशोक ने अपने धम्म में चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग की बात की है। D. अशोक के अभिलेखों में उसे 'देवनामप्रिय' कहा गया है।
(A) केवल B और C
(B) केवल B
(C) केवल A और B
(D) केवल C
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन C असत्य है क्योंकि अशोक के धम्म में चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग का उल्लेख नहीं है। अन्य कथन ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं।
13
अशोक के स्तम्भों के सम्बन्ध में अधोलिखित कथनों को पढ़िए: A. अशोक के मुख्य स्तम्भ लेख उत्तर भारत में प्राप्त हुए। B. छः स्तम्भ लेख हैं जो सात स्तम्भों पर प्राप्त हुए हैं। C. स्तम्भों की यष्टि तथा ऊध्र्व भाग दो अलग-अलग पत्थरों से निर्मित हैं। D. ऊर्ध्व भाग की समस्त आकृतियाँ पशुओं की हैं।
(A) केवल A और B
(B) केवल A, C और D
(C) केवल A, B और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
सम्राट अशोक के एकाश्मक स्तंभों (Monolithic Pillars) के संबंध में कथन C असत्य है क्योंकि अशोक के स्तंभों की लाट (Shaft/यष्टि) और उसका शीर्ष (Capital/ऊर्ध्व भाग) अलग-अलग पत्थरों से नहीं बने हैं, बल्कि पूरी यष्टि चुनार के लाल बलुआ पत्थर के एक ही विशाल एकाश्म पत्थर को तराश कर बनाई गई थी। अशोक के 7 मुख्य स्तंभ लेख 6 अलग-अलग स्थानों (दिल्ली-टोपरा, दिल्ली-मेरठ, लौरिया-अरेराज, लौरिया-नंदनगढ़, रामपुरवा, प्रयागराज) से प्राप्त हुए हैं जो उत्तर भारत में स्थित हैं। स्तंभों के शीर्ष भाग पर सिंह, हाथी, बैल और घोड़े जैसे पशुओं की सुंदर आकृतियाँ उकेरी गई हैं। अतः कथन A, B और D सत्य हैं।
14
निम्न में से कौनसा सम्राट अशोक के द्वारा की गई धम्म यात्राओं का सही क्रम है?
(A) बोधगया - कुशीनगर - लुम्बिनी - सारनाथ
(B) बोधगया - सारनाथ - श्रावस्ती - कुशीनगर
(C) बोधगया - लुम्बिनी - कुशीनगर - श्रावस्ती
(D) बोधगया - श्रावस्ती - लुम्बिनी - कपिलवस्तु
📝 व्याख्या (Explanation)
अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 10वें वर्ष में आखेट (शिकार) तथा विहार यात्राओं को त्याग कर 'धम्म यात्राएं' प्रारंभ की थीं। अशोक की धम्म यात्रा का सर्वमान्य ऐतिहासिक एवं बौद्ध परंपराओं में वर्णित क्रम इस प्रकार है: सबसे पहले वह बोधगया (जहाँ बुद्ध को ज्ञान मिला) गया, इसके पश्चात् लुम्बिनी (बुद्ध का जन्मस्थान), फिर कुशीनगर (महापरिनिर्वाण स्थल), तदुपरांत श्रावस्ती, सारनाथ और कपिलवस्तु की यात्रा की। लुम्बिनी यात्रा के दौरान (राज्याभिषेक के 20वें वर्ष) अशोक ने वहाँ भू-राजस्व की दर को 1/6 से घटाकर 1/8 कर दिया था तथा बलि कर को पूरी तरह माफ कर दिया था।
15
सूची-I: A. आरे युक्त लकड़ी का बना रथ का पहिया, B. जेट्टी (नावों को बांधने की लकड़ी), C. भव्य राजप्रसाद, D. मौर्यकालीन स्तंभों का निर्माण स्थल। सूची-II: 1. बुलन्दीबाग, 2. रामपुरवा, 3. कुम्रहार, 4. चुनार
(A) A-1, B-3, C-2, D-4
(B) A-4, B-2, C-1, D-3
(C) A-2, B-1, C-3, D-4
(D) A-1, B-2, C-3, D-4
📝 व्याख्या (Explanation)
बुलंदीबाग (लकड़ी का पहिया), रामपुरवा (जेट्टी/नावों को बांधने का स्थान), कुम्रहार (राजप्रसाद), चुनार (स्तंभ निर्माण हेतु पत्थर का स्रोत)।
16
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. सम्राट की अंगरक्षक सेना का प्रधान B. उद्योग धन्धो का प्रधान निरीक्षक C. वन विभाग का प्रधान D. कोषाध्यक्ष सूची-II: 1. कर्मान्तिक 2. अंतर्वशिक 3. सन्निधाता 4. आटविक
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-2, B-3, C-4, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित मौर्य प्रशासनिक तीर्थों (उच्च अधिकारियों) का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'अंतर्वशिक' सम्राट की अंतःपुर तथा अंगरक्षक सेना का प्रधान अधिकारी होता था। 'कर्मान्तिक' उद्योगों, कारखानों तथा शिल्प-धंधों का मुख्य निरीक्षक एवं अध्यक्ष होता था। 'आटविक' वन विभाग तथा अरण्य क्षेत्रों का सर्वोच्च अधिकारी था। 'सन्निधाता' राजकीय कोषाध्यक्ष (Treasury Head) होता था जो भंडारगृहों का निरीक्षण करता था। अतः कूट A-2, B-1, C-4, D-3 सही विकल्प है।
17
अशोक के स्तंभों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: उपर्युक्त में से कौन सा कथन असत्य है? A. अशोक के स्तंभ चुनार के बलुआ पत्थरों से निर्मित हैं। B. इन स्तंभों पर चमकदार पॉलिश की गई है। C. ये स्तंभ एकाश्मक (Monolithic) हैं। D. इन स्तंभों के शीर्ष पर मानव आकृतियां उत्कीर्ण हैं।
(A) केवल B और C
(B) केवल B
(C) केवल D
(D) केवल A, C और D
📝 व्याख्या (Explanation)
अशोक के स्तंभों के शीर्ष पर पशु आकृतियां (जैसे सिंह, वृषभ) होती हैं, मानव आकृतियां नहीं। अतः कथन D असत्य है।
18
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. बाण B. हर्ष C. शुद्रक D. हाल सूची-II: 1. गाथा सप्तशती 2. मृच्छकटिकम 3. नागानन्द 4. कादम्बरी
(A) A-1, B-3, C-2, D-4
(B) A-4, B-3, C-2, D-1
(C) A-3, B-4, C-2, D-1
(D) A-1, B-2, C-4, D-3
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय प्रसिद्ध साहित्यकारों और उनकी कृतियों का सुमेलित विवरण इस प्रकार है: बाणभट्ट (हर्षवर्धन के दरबारी कवि) ने प्रसिद्ध संस्कृत गद्य काव्य 'कादम्बरी' तथा 'हर्षचरित' की रचना की। सम्राट हर्षवर्धन ने स्वयं तीन प्रसिद्ध नाटक लिखे- 'नागानन्द', 'रत्नावली' और 'प्रियदर्शिका'। शुद्रक की रचना 'मृच्छकटिकम्' (मिट्टी की गाड़ी) गुप्तकालीन सामाजिक जीवन पर आधारित एक उत्कृष्ट नाटक है। सातवाहन राजा हाल ने प्राकृत भाषा में 'गाथा सप्तशती' (सत्तसई) नामक मुक्तक काव्य ग्रंथ की रचना की। अतः सही कूट A-4, B-3, C-2, D-1 है।
19
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. प्रतिहार B. महाबलाधिकृत C. पुस्तपाल D. महाअक्षपटलिक सूची-II: 1. सेना का सर्वोच्च अधिकारी 2. अंतःपुर का रक्षक 3. आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने वाला अधिकारी 4. भूमि का लेखा जोखा रखने वाला अधिकारी
(A) a-2, b-1, c-4, d-3
(B) a-1, b-2, c-3, d-4
(C) a-4, b-3, c-2, d-1
(D) a-1, b-2, c-4, d-3
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन एवं गुप्तकालीन प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों का सही सुमेलित रूप इस प्रकार है: 'प्रतिहार' (या द्वारपाल) राजमहल के अंतःपुर तथा प्रवेश द्वार का मुख्य रक्षक होता था। 'महाबलाधिकृत' सेना का सर्वोच्च अधिकारी या सेनापति होता था। 'पुस्तपाल' भूमि संबंधी दस्तावेजों, विलेखों और सीमाओं का लेखा-जोखा रखने वाला प्राधिकारी था। 'महाअक्षपटलिक' राज्य के समस्त आय और व्यय का केंद्रीय रिकॉर्ड व लेखा-जोखा रखने वाला मुख्य अधिकारी होता था। अतः सही कूट A-2, B-1, C-4, D-3 है।
20
मिताक्षरा कानून प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार कीजिए: कथन A: मिताक्षरा के अनुसार पिता अपने जीवनकाल में पुत्रों में अपनी सम्पत्ति का बंटवारा कर सकता था। कारण R: मिताक्षरा पैतृक सम्पत्ति में पुत्रों का जन्मना स्वामित्वाधिकार स्वीकार नहीं करता।
(A) A और R दोनो सही है, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनो सही है किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
(C) A सही है किन्तु R गलत है।
(D) A गलत है किन्तु R सही है।
📝 व्याख्या (Explanation)
हिंदू विधि (Hindu Law) की प्रसिद्ध टीका 'मिताक्षरा' (विज्ञानेश्वर द्वारा रचित) के अनुसार पुत्र का पिता की पैतृक संपत्ति में अधिकार 'जन्म से ही' (Birthright/जन्मना स्वामित्वाधिकार) स्वीकार किया गया है। इसलिए कथन A पूरी तरह सत्य है कि पिता अपने जीवनकाल में संपत्ति का बंटवारा कर सकता था, परंतु कारण R असत्य है क्योंकि मिताक्षरा तो जन्मना स्वामित्वाधिकार का पुरजोर समर्थन करती है (जबकि दायभाग प्रणाली, जो जीमूतवाहन की है, में पिता की मृत्यु के बाद ही पुत्र का संपत्ति पर अधिकार होता है)। अतः A सही है किन्तु R गलत है।
21
गुप्तकालीन मंदिरों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. देवगढ का दशावतार मंदिर पंचायतन शैली में निर्मित प्रथम मंदिर है। B. भूमरा के शिव मंदिर में रत्नजड़ित मुकुट पहने शिव को दर्शाया गया है। C. नचना कुठार के पार्वती मंदिर में शिव-पार्वती संगीत वाद्यो के साथ उकेरे गए हैं।
(A) केवल A
(B) केवल A और C
(C) केवल A और B
(D) A, B और C सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
गुप्तकालीन मंदिर वास्तुकला भारतीय मंदिर स्थापत्य का स्वर्ण काल मानी जाती है। झाँसी (उत्तर प्रदेश) में स्थित देवगढ़ का दशावतार मंदिर भारतीय स्थापत्य कला में 'पंचायतन शैली' (मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटे सहायक मंदिर) में निर्मित पहला स्पष्ट उदाहरण है तथा इसमें एक लघु शिखर भी है। सतना (मप्र) स्थित भूमरा के शिव मंदिर में एकमुखी शिवलिंग तथा रत्नजड़ित मुकुट धारण किए शिव की सुंदर प्रतिमा पाई जाती है। पन्ना (मप्र) स्थित नचना कुठार का पार्वती मंदिर अपनी सुंदर नक्काशी और वाद्ययंत्र बजाते शिव-पार्वती के चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। अतः तीनों कथन सत्य हैं।
22
मुण्डित सिर वाली गुप्त कालीन बुद्धमूर्ति कहाँ से प्राप्त हुई है?
(A) एरण (मध्य प्रदेश)
(B) मानकुंवर (प्रयागराज)
(C) जूनागढ़ (गुजरात)
(D) उज्जैन (मध्यप्रदेश)
📝 व्याख्या (Explanation)
गुप्त काल की अत्यंत दुर्लभ और कलात्मक 'मुण्डित सिर वाली बुद्ध प्रतिमा' (Shaven-headed Buddha statue) उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) जिले में स्थित मानकुंवर (Mankunwar) नामक स्थान से प्राप्त हुई है। यह प्रतिमा कुषाणकालीन मथुरा कला शैली की शारीरिक सुदृढ़ता तथा गुप्तकालीन आध्यात्मिक सौम्यता का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है। इस प्रतिमा पर गुप्त संवत 129 (कुमारगुप्त प्रथम के शासनकाल) का अभिलेख भी उत्कीर्ण है। मानकुंवर बुद्ध प्रतिमा गुप्तकालीन बौद्ध मूर्तिकला का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
23
किस शासक को 'सकलोत्तरापथनाथ' (उत्तरी भारत का स्वामी) के नाम से जाना जाता है?
(A) प्रभाकरवर्धन
(B) राज्यवर्धन
(C) हर्षवर्धन
(D) राज्यवर्धन द्वितीय
📝 व्याख्या (Explanation)
वर्धन (पुष्यभूति) वंश के महान सम्राट हर्षवर्धन को चालुक्य अभिलेखों (विशेष रूप से पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख) में 'सकलोत्तरापथनाथ' (अर्थात संपूर्ण उत्तर भारत का अधिपति/स्वामी) की उपाधि से विभूषित किया गया है। हर्षवर्धन ने 606 ई. से 647 ई. तक शासन किया और कन्नौज को अपनी राजधानी बनाकर उत्तर भारत के एक विशाल साम्राज्य का एकीकरण किया। पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हुए युद्ध में हर्षवर्धन को दक्षिण की ओर विस्तार करने से रोका था और उसी विजय के उपलक्ष्य में ऐहोल प्रशस्ति में हर्ष के लिए इस विशेष उपाधि का उल्लेख किया गया है।
24
प्राचीन एवं पूर्व-मध्यकालीन बाजार शब्दावली में निम्न में से कौनसा सुमेलित नहीं है?
(A) हट्टिका - क्रय-विक्रय के लिए छोटी मंडी
(B) पट्टन - बड़े नगरों में वाणिज्य केन्द्र / मण्डी
(C) मण्डपी - स्थानीय बाजार
(D) पेंठ - व्यापारिक मंडी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन एवं पूर्व-मध्यकालीन भारत में व्यापारिक और विपणन (मार्केटिंग) शब्दावली का विवरण इस प्रकार है: 'हट्टिका' (हाट) गांव या कस्बे में क्रय-विक्रय के लिए लगने वाली छोटी बाजार या मंडी होती थी। 'पट्टन' समुद्र या नदी तट पर स्थित बड़े व्यापारिक नगरों और वाणिज्यिक केंद्रों को कहा जाता था जहाँ माल का आयात-निर्यात होता था। 'पेंठ' (या पेट्टा) विशेष रूप से दक्कन और दक्षिण भारत में आवधिक व्यापारिक मंडियों को कहा जाता था। 'मण्डपी' (जहाँ से आधुनिक 'मंडी' शब्द बना) मूल रूप से चुंगी/कर संग्रहण केंद्र तथा मुख्य क्षेत्रीय थोक बाजार होता था, न कि केवल साधारण स्थानीय बाजार। अतः C सुमेलित नहीं है।
25
Q25. खजुराहो के मंदिरों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है? A. इनका निर्माण नागर शैली में किया गया। B. मंदिरों में बलुआ पत्थरों का प्रयोग हुआ। C. स्तंभों तथा अभिलेखों का निर्माण महापाषाणों से किया गया था। D. इन मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों द्वारा करवाया गया था।
(A) इनका निर्माण नागर शैली में किया गया।
(B) मंदिरों में बलुआ पत्थरों का प्रयोग हुआ।
(C) स्तंभों तथा अभिलेखों का निर्माण महापाषाणों से किया गया था।
(D) खजुराहो के मंदिरों के आंतरिक भाग में कामुक कलाकृतियां हैं।
📝 व्याख्या (Explanation)
खजुराहो के मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों द्वारा 950-1050 ईस्वी के मध्य करवाया गया था। ये नागर शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं और बलुआ पत्थरों से निर्मित हैं। महापाषाण (Megalith) संस्कृति का खजुराहो से कोई संबंध नहीं है। कामुक कलाकृतियां मुख्य रूप से बाहरी दीवारों पर स्थित हैं।
26
पाल वंश काल के प्रसिद्ध मूर्ति कलाकार धीमान और विठ्ठपाल किसके समकालीन थे?
(A) धर्मपाल व महिपाल
(B) गोपाल व धर्मपाल
(C) धर्मपाल व देवपाल
(D) देवपाल व महिपाल
📝 व्याख्या (Explanation)
पूर्व-मध्यकालीन बंगाल और बिहार में पाल वंश के शासनकाल में कला और मूर्तिकला की एक नई प्रादेशिक शैली विकसित हुई जिसे 'पाल कला शैली' कहा जाता है। इस शैली के प्रवर्तक दो प्रसिद्ध मूर्तिकार एवं चित्रकार धीमान (Dhiman) और उनका पुत्र विठ्ठपाल (Vitthapala) थे। ये दोनों महान कलाकार पाल वंश के शक्तिशाली शासकों धर्मपाल (770-810 ई.) तथा उनके पुत्र देवपाल (810-850 ई.) के समकालीन थे। इन्होंने कांस्य ढलाई और कसौटी पत्थर की सुंदर मूर्तियाँ बनाईं। नालंदा और विक्रमशिला इनके मुख्य केंद्र थे।
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निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. शिल्पादिकारम B. मणिमेखलै C. जीवकचिन्तामणि D. तोल्लकाप्पियम सूची-II: 1. तोल्लकाप्पियर 2. तिरूत्तक्कदेवर 3. सीतलैसत्तनार 4. इलगोआदिगल
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-3, B-4, C-1, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
दक्षिण भारत के प्रसिद्ध संगम साहित्य और महाकाव्यों का सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'शिल्पादिकारम' (नूपुर की कहानी) महाकाव्य की रचना चेर राजकुमार इलंगो आदिगल ने की थी। 'मणिमेखलै' (शिल्पादिकारम का उत्तर भाग) की रचना बौद्ध व्यापारी सीतलै सत्तनाार ने की। 'जीवक चिंतामणि' (जैन धर्म से संबंधित महाकाव्य) की रचना जैन मुनि तिरुत्तक्कदेवर ने की थी। 'तोलकाप्पियम' संगम काल का सबसे प्राचीनतम तमिल व्याकरण ग्रंथ है जिसकी रचना तोलकाप्पियर ने की थी। अतः सही कूट A-4, B-3, C-2, D-1 है।
28
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. पेडयल B. एनाडि C. नडुकल D. ओररि सूची-II: 1. युद्ध में मरे सैनिकों की स्मृति में बनाई गई पाषाण की मूर्ति 2. सार्वजनिक स्थल 3. गुप्तचर 4. सेनापति की उपाधि
(A) A-4, B-3, C-2, D-1
(B) A-2, B-4, C-1, D-3
(C) A-1, B-2, C-3, D-4
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
दक्षिण भारत के संगम युगीन समाज एवं प्रशासन की शब्दावली का सही मिलान इस प्रकार है: 'पेडयल' (Pedayal) संगम काल में सार्वजनिक स्थानों या चौपालों को कहा जाता था। 'एनाडि' (Enadi) सैन्य प्रमुखों और उत्कृष्ट सेनापतियों को दी जाने वाली एक राजकीय उपाधि थी। 'नडुकल' (Nadukal या वीरक्कल) युद्ध क्षेत्र में वीरगति को प्राप्त हुए योद्धाओं और सैनिकों की स्मृति में स्थापित किए जाने वाले स्मारक पाषाण/वीर स्तंभ थे। 'ओररि' (Orari) संगम राजाओं द्वारा नियुक्त किए जाने वाले गुप्तचरों या जासूसों को कहा जाता था। अतः सही कूट A-2, B-4, C-1, D-3 है।
29
राष्ट्रकूट शासक अमोघवर्ष प्रथम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. गोविन्द तृतीय के पुत्र अमोघवर्ष प्रथम की साहित्य तथा धर्म में अधिक रूचि थी। B. अमोघवर्ष की राजसभा में आदिपुराण के लेखक जिनसेन तथा गणितसार संग्रह के लेखक महावीराचार्य निवास करते थे।
(A) केवल A
(B) केवल B
(C) A और B दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
📝 व्याख्या (Explanation)
राष्ट्रकूट वंश का महान शासक अमोघवर्ष प्रथम (814-878 ई.) अपनी धार्मिक सहिष्णुता, विद्वत्ता और साहित्य अनुरागी प्रवृत्ति के लिए प्रसिद्ध था। वह राष्ट्रकूट राजा गोविंद तृतीय का पुत्र था और उसने 'कविराजमार्ग' (कन्नड़ भाषा की प्रथम कृति) तथा 'प्रश्नोत्तर रत्नमालिका' ग्रंथों की रचना की थी। अमोघवर्ष जैन धर्म का अनुयायी था और उसके दरबार में प्रसिद्ध जैन आचार्य जिनसेन (जिन्होंने 'आदिपुराण' की रचना की), महावीराचार्य (जिन्होंने प्रसिद्ध गणित ग्रंथ 'गणितसार संग्रह' लिखा) तथा शाकटायन (अमोघवृत्ति के लेखक) जैसे महान विद्वान निवास करते थे। अतः दोनों कथन पूरी तरह सत्य हैं।
30
गहडवाल शासक गोविन्द चन्द्र के संबंध में निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार कीजिए: कथन A: गहडवाल शासक गोविन्द चन्द्र की पत्नी कुमार देवी बौद्ध धर्म की अनुयायी थी। कारण R: कुमार देवी ने सारनाथ में धर्मचक्र जिन विहार का निर्माण करवाया।
(A) A और R दोनो सही है, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनो सही है किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
(C) A सही है किन्तु R गलत है।
(D) A गलत है किन्तु R सही है।
📝 व्याख्या (Explanation)
कन्नौज के गहड़वाल वंश के शक्तिशाली शासक गोविंदचंद्र की रानी कुमार देवी बौद्ध धर्म की महान उपासिका थीं (वे उड़ीसा के छीकर शासक की पुत्री थीं)। रानी कुमार देवी ने सारनाथ (जहाँ बुद्ध ने प्रथम धर्मचक्रप्रवर्तन किया था) में एक भव्य बौद्ध विहार का निर्माण करवाया जिसे 'धर्मचक्र जिन विहार' (Dharmachakra Jina Vihara) कहा जाता है। सारनाथ से प्राप्त कुमार देवी के शिलालेख से इस निर्माण की पुष्टि होती है। यह मंदिर पूर्व-मध्यकाल में सारनाथ में बना अंतिम महान बौद्ध निर्माण माना जाता है। कथन A और कारण R दोनों सत्य हैं तथा R, कथन A का सही स्पष्टीकरण है।
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भारत में इस्लामी रहस्यवाद की प्रथम पाठ्यपुस्तक 'कशफ-उल-महजूब' के लेखक कौन थे?
(A) शेख फरीदुद्दीन गंज ए शकर
(B) मानेरी
(C) अली हुजविरी
(D) अता अलिक जुवैनी
📝 व्याख्या (Explanation)
भारत में इस्लामी रहस्यवाद (सूफीवाद) की सबसे पहली और प्रामाणिक पाठ्यपुस्तक 'कशफ-उल-महजूब' (Kashf-ul-Mahjub) के लेखक अली बिन उस्मान अल-हुजविरी थे, जिन्हें दाता गंज बख्श के नाम से भी जाना जाता है। वे 11वीं शताब्दी में गजनवी काल के दौरान लाहौर आए थे। यह पुस्तक फारसी भाषा में लिखी गई सूफी दर्शन की प्रथम कृति मानी जाती है, जिसमें सूफी सिद्धांतों, आध्यात्मिक अवस्थाओं और विभिन्न सूफी संप्रदायों का विस्तृत विवरण दिया गया है। शेख फरीदुद्दीन चिश्ती सिलसिले के महान सूफी संत थे।
32
मुस्लिम लेखक औफी के अनुसार किस चालुक्य शासक ने खम्भात में एक मस्जिद के जीर्णोद्वार के लिए अपने निजी कोष से एक लाख बलोत्र (स्वर्ण मुद्रा) का अनुदान दिया था?
(A) मूलराज
(B) कुमारपाल
(C) भीम प्रथम
(D) जयसिंह सिद्धराज
📝 व्याख्या (Explanation)
मुस्लिम इतिहासकार और संकलनकर्ता नुरुद्दीन मुहम्मद औफी की प्रसिद्ध रचना 'जवामी-उल-हिंयायात' के अनुसार, गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) शासक जयसिंह सिद्धराज (1094-1143 ई.) अपनी धार्मिक सहिष्णुता और न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे। जब खंभात (कैंबे) में एक अंतर-धार्मिक झड़प के दौरान कुछ उपद्रवियों ने एक मस्जिद को नष्ट कर दिया और मिनार तोड़ दी, तो जयसिंह सिद्धराज ने स्वयं वेष बदलकर मामले की निष्पक्ष जांच की। सच्चाई जानने के बाद उन्होंने दोषी पाए गए लोगों को दंडित किया और मस्जिद के पुननिर्माण के लिए अपने व्यक्तिगत राजकोष से एक लाख बलोत्र (मुद्रा) प्रदान किए।
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राजेन्द्र प्रथम के अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: कथन A: राजेन्द्र प्रथम ने कडारम के श्रीविजय साम्राज्य के विरुद्ध सफल सैनिक अभियान किया। कारण R: श्रीविजय साम्राज्य के विरुद्ध राजेन्द्र चोल के अभियान का उद्देश्य भारतीय व्यापारियों के मार्ग में आ रही बाधाओं को दूर करना तथा श्रीलंका व्यापार में आ रही बाधाओं को समाप्त करना था।
(A) A और R दोनों सही हैं, तथा R, A की सही व्याख्या करता है।
(B) A और R दोनों सही हैं किन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है।
(C) A सही है किन्तु R गलत है।
(D) A गलत है किन्तु R सही है।
📝 व्याख्या (Explanation)
चोल साम्राज्य के महान शासक राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ई.) ने 1025 ई. में दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित श्रीविजय (कडारम/मलेशिया-इंडोनेशिया) साम्राज्य पर एक अभूतपूर्व नौसैनिक आक्रमण किया था। इस सैन्य अभियान का मुख्य कारण यह था कि श्रीविजय के शैलेंद्र शासक मलक्का जलडमरूमध्य से होकर चीन और पूर्व की ओर जाने वाले चोल साम्राज्य के तमिल व्यापारियों तथा व्यापारिक जहाजों पर भारी चुंगी लगाते थे और व्यापार मार्ग में रुकावटें पैदा करते थे। राजेंद्र चोल की शक्तिशाली नौसेना ने कडारम के राजा संग्राम विजयातुंगवर्मन को पराजित किया और व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित बनाया। अतः कथन A और कारण R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है।
34
निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. सकलभुवनाश्रय B. शंडमतविर्त्त C. त्यागसमुद्र D. आहवमल्लकुलान्तक सूची-II: 1. वीरराजेन्द्र 2. विक्रमचोल 3. कुलोत्तुंग 4. राजाधिराज प्रथम
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-1, B-3, C-2, D-4
(C) A-4, B-2, C-3, D-1
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
चोल राजवंश के शासकों और उनकी प्रसिद्ध उपाधियों का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'सकलभुवनाश्रय' (संपूर्ण विश्व का आश्रय) की उपाधि वीरराजेंद्र ने धारण की थी। 'शंडमतविर्त्त' (षण्मतों को संरक्षण देने वाला) उपाधि कुलोत्तुंग चोल प्रथम से संबंधित है। 'त्यागसमुद्र' की उपाधि विक्रम चोल ने धारण की थी। 'आहवमल्लकुलान्तक' (चालुक्य राजा आहवमल्ल का संहारक) उपाधि राजाधिराज प्रथम ने कल्याणी के चालुक्यों पर विजय प्राप्त करने के बाद धारण की थी। अतः सही कूट A-1, B-3, C-2, D-4 है।
35
दक्षिण भारत में 'उड्डन कूट्टम' शब्द से तात्पर्य क्या था?
(A) चोल राज्य में छोटे ग्रामों का समूह
(B) चोल प्रशासन में अधिकारियों का समूह
(C) एक प्रकार का चोलकालीन कर
(D) चोलों की पोषित नौसेना
📝 व्याख्या (Explanation)
चोल प्रशासनिक व्यवस्था में 'उड्डन कूट्टम' (Udan-kuttam) सम्राट के अत्यंत समीप रहने वाले तथा उनकी सहायता करने वाले उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और सलाहकारों के समूह/परिषद को कहा जाता था। ये अधिकारी सम्राट के आदेशों को लिपिबद्ध करने, उन्हें विभिन्न विभागों तक पहुंचाने तथा प्रशासनिक निर्णयों के निष्पादन की देखरेख करते थे। चोल प्रशासन अपनी केंद्रीय कार्यकुशलता और स्थानीय स्वायत्तता के लिए प्रसिद्ध था जहाँ उड्डन कूट्टम केंद्रीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाता था।
36
चालुक्यकालीन मंदिरों के संदर्भ में निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. सोमनाथ मंदिर B. आदिनाथ मंदिर C. कर्णेश्वर मंदिर D. रूद्रमहाकाल मंदिर सूची-II: 1. विमल शाह 2. मूलराज - I 3. जयसिंह सिद्धराज 4. कर्ण
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-2, B-4, C-1, D-3
📝 व्याख्या (Explanation)
गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) राजवंश के समय निर्मित प्रमुख मंदिरों और उनके निर्माणकर्ताओं/संरक्षकों का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: प्रभास पाटन के प्रसिद्ध 'सोमनाथ मंदिर' का पत्थरों से जीर्णोद्धार चालुक्य शासक मूलराज प्रथम ने करवाया था। आबू (दिलवाड़ा) के प्रसिद्ध 'आदिनाथ मंदिर' (ऋषभदेव मंदिर) का निर्माण सोलंकी मंत्री विमल शाह ने 1031 ई. में करवाया था। 'कर्णेश्वर मंदिर' का निर्माण सोलंकी राजा कर्णदेव ने करवाया था। सिद्धपुर स्थित भव्य 'रुद्रमहाकाल मंदिर' का निर्माण जयसिंह सिद्धराज द्वारा संपन्न करवाया गया था। अतः सही कूट A-2, B-1, C-4, D-3 है।
37
अलाउद्दीन खिलजी के सैन्य अभियानों और सेनापतियों का मिलान कीजिए: सूची-I (अभियान): सूची-I: A. गुजरात B. मालवा C. देवगिरी D. जालौर सूची-II: 1. उलूग खाँ व नुसरत खाँ 2. आइन-उल-मुल्क मुल्तानी 3. मलिक काफूर 4. कमालुद्दीन गुर्ग
(A) A-3, B-4, C-1, D-2
(B) A-1, B-4, C-3, D-2
(C) A-1, B-2, C-3, D-4
(D) A-3, B-2, C-1, D-4
📝 व्याख्या (Explanation)
दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के प्रमुख सैन्य अभियानों और उनके सेनापतियों का सुमेलित विवरण इस प्रकार है: गुजरात अभियान (1299 ई.) का नेतृत्व उलूग खाँ और नुसरत खाँ ने किया था (जहाँ से मलिक काफूर को खरीदा गया)। मालवा अभियान (1305 ई.) आइन-उल-मुल्क मुल्तानी के नेतृत्व में हुआ जिसमें महलकदेव पराजित हुआ। देवगिरी का दक्षिण अभियान (1306-07 ई.) मलिक काफूर के नेतृत्व में संपन्न हुआ। जालौर अभियान (1311 ई.) का अंतिम रूप से सफल नेतृत्व कमालुद्दीन गुर्ग ने किया था जहाँ कान्हड़देव सोनगरा वीरगति को प्राप्त हुए। अतः कूट A-1, B-2, C-3, D-4 सही है।
38
सल्तनतकालीन विभागों और उनके संस्थापकों का मिलान कीजिए: सूची-I (विभाग): सूची-I: A. दीवान-ए-आरिज B. दीवाने-वकूफ C. दीवाने-खैरात D. दीवाने-रियासत सूची-II: 1. बलबन 2. जलालुद्दीन फिरोज खिलजी 3. अलाउद्दीन खिलजी 4. फिरोज तुगलक
(A) A-1, B-2, C-4, D-3
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-3, B-4, C-1, D-2
(D) A-4, B-3, C-1, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
दिल्ली सल्तनत काल में निर्मित प्रमुख प्रशासनिक विभागों तथा उनके संस्थापकों का सुमेलित रूप इस प्रकार है: 'दीवान-ए-आरिज' (सैन्य विभाग) की स्थापना सुल्तान बलबन ने मंगोल आक्रमणों से रक्षा हेतु की थी। 'दीवान-ए-वकूफ' (व्यय कागजात की जांच का विभाग) की स्थापना जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने की थी। 'दीवान-ए-खैरात' (दान एवं अनाथ कल्याण विभाग) की स्थापना फिरोज शाह तुगलक ने की थी। 'दीवान-ए-रियासत' (बाजार नियंत्रण एवं वाणिज्य विभाग) का गठन अलाउद्दीन खिलजी द्वारा अपनी बाजार व्यवस्था को लागू करने के लिए किया गया था। अतः सही कूट A-1, B-2, C-4, D-3 है।
39
सल्तनतकालीन स्रोतों और उनसे संबंधित विषयों का मिलान कीजिए: सूची-I (स्रोत): सूची-I: A. गुनयात-उल-मुनया B. फतवां-ए-जहाँदारी C. आदाब-उल-हर्ब D. खजाइन-उल-फुतुह सूची-II: 1. फिरोज तुगलक के काल में संकलित एक संगीत ग्रंथ 2. राजनीतिक दर्शन प्रणाली से संबंधित 3. युद्धकला से संबंधित 4. अलाउद्दीन खिलजी के दक्षिण अभियान का विवरण
(A) A-3, B-2, C-1, D-4
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-4, C-1, D-3
(D) A-4, B-2, C-3, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
मध्यकालीन भारत की प्रमुख ऐतिहासिक कृतियों और उनके विषयों का सही मिलान इस प्रकार है: 'गुनयात-उल-मुनया' फिरोज शाह तुगलक के समय रचित भारतीय संगीत पर पहला फारसी ग्रंथ है। 'फतवा-ए-जहाँदारी' जियाउद्दीन बरनी का ग्रंथ है जो सल्तनतकालीन राजनीतिक दर्शन और आदर्श मुस्लिम शासक के सिद्धांतों की व्याख्या करता है। 'आदाब-उल-हर्ब वश-शजात' फख्र-ए-मुदब्बिर द्वारा रचित युद्धकला और सैन्य रणनीति का ग्रंथ है। 'खजाइन-उल-फुतुह' (तारीख-ए-अलाई) अमीर खुसरो की रचना है जिसमें अलाउद्दीन खिलजी की दक्षिण विजयों का आंखों देखा विवरण है। अतः सही कूट A-1, B-2, C-3, D-4 है।
40
इण्डो-इस्लामिक स्थापत्य शैली के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए: A. भारतीय स्थापत्य की मुख्य विशेषता शहतीर/धरणी (Trabeate) प्रणाली है। B. इस्लामिक स्थापत्य की मुख्य विशेषता मेहराब व गुम्बद (Arcuate) प्रणाली है। C. इस शैली की इमारतों में ज्यामितिक व फूलों की डिजाइनों का अंकन किया गया है। D. इस शैली की इमारतों पर कुरान की आयतों को अरबी में लिखा गया है (कैलीग्राफी)।
(A) केवल C और D
(B) केवल B और C
(C) केवल A और B
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
भारत में तुर्क-अफगान आगमन के बाद भारतीय (शहतीर/Trabeate शैली, जिसमें बीम और खंभों का प्रयोग होता था) तथा इस्लामिक (Arcuate शैली, जिसमें मेहराब, गुंबद और डैट का प्रयोग होता था) शैलियों के सम्मिश्रण से 'इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली' का विकास हुआ। इस्लामिक स्थापत्य में मानव व पशु आकृतियों का चित्रण वर्जित होने के कारण भवनों की सजावट के लिए ज्यामितीय आकृतियों, लताओं, फूलों तथा अरबी लिपि में कुरान की आयतों की सुलेखन (Calligraphy) व अरबस्क (Arabesque) शैली का व्यापक प्रयोग किया गया। अतः चारों कथन (A, B, C, D) इंडो-इस्लामिक वास्तुकला की सही विशेषताएं व्यक्त करते हैं।
41
निम्नलिखित में से कौनसा कार्य सुल्तान इल्तुतमिश का नहीं था?
(A) इक्ता प्रणाली की स्थापना
(B) चालीस गुलामों के दल (तुर्कान-ए-चहलगानी) का दमन
(C) शुद्ध अरबी सिक्कों का प्रचलन
(D) दोआब के विद्रोहों का दमन
📝 व्याख्या (Explanation)
दिल्ली सल्तनत के वास्तविक संस्थापक सुल्तान इल्तुतमिश (1211-1236 ई.) ने साम्राज्य को सुदृढ़ करने के लिए अनेक कार्य किए थे, जैसे- भारत में भू-हस्तांतरण की 'इक्ता प्रणाली' की शुरुआत करना, चांदी का 'टंका' और तांबे का 'जीतल' चलाकर 'शुद्ध अरबी सिक्के' जारी करने वाला पहला सुल्तान बनना, तथा अपने वफादार 40 तुर्क दासों का संगठन 'तुर्काने-ए-चहलगानी' (चालीसा दल) गठित करना। परंतु चालीस गुलामों के इस दल की अत्यधिक शक्ति और षड्यंत्रों को समाप्त करने/दमन करने का कार्य बाद में सुल्तान गियासुद्दीन बलबन ने किया था। अतः विकल्प B इल्तुतमिश का कार्य नहीं था।
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सल्तनतकालीन कर व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I (कर): सूची-I: A. उश्र B. खराज C. जकात D. जजिया सूची-II: 1. मुसलमानों से लिया जाने वाला भूमिकर 2. गैर-मुस्लिमों से लिया जाने वाला भूमिकर 3. मुसलमानों पर लगने वाला धार्मिक कर 4. गैर-मुस्लिमों से लिया जाने वाला धार्मिक/संरक्षण कर
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-1, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-4, B-2, C-3, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
दिल्ली सल्तनत में शरीयत के अनुसार मुख्यतः चार प्रकार के कर वसूल किए जाते थे, जिनका सही विवरण इस प्रकार है: 'उश्र' मुस्लिम कृषकों/भूमि स्वामियों से लिया जाने वाला भू-राजस्व (सामान्यतः 1/10 भाग) था। 'खराज' गैर-मुस्लिम (हिंदू) किसानों से लिया जाने वाला भू-राजस्व (1/3 से 1/2 भाग) था। 'जकात' केवल संपन्न मुसलमानों से उनकी आय/संपत्ति पर वसूला जाने वाला धार्मिक कर (2.5%) था जिसका उपयोग कल्याणकारी कार्यों में होता था। 'जजिया' गैर-मुस्लिम प्रजा (जिम्मियों) से उनकी जान-माल की सुरक्षा और सैन्य सेवा से मुक्ति के बदले लिया जाने वाला धार्मिक कर था। अतः कूट A-1, B-2, C-3, D-4 सही है।
43
भक्ति काल के आचार्यों और उनके दार्शनिक सिद्धांतों का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. रामानुज B. मध्वाचार्य C. निम्बार्क D. वल्लभाचार्य सूची-II: 1. शुद्धाद्वैत 2. द्वैताद्वैत 3. द्वैत 4. विशिष्टाद्वैत
(A) A-4, B-3, C-2, D-1
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-3, B-1, C-4, D-2
(D) A-2, B-4, C-1, D-3
📝 व्याख्या (Explanation)
दक्षिण भारत से आरंभ हुए भक्ति आंदोलन के महान दार्शनिक आचार्यों और उनके द्वारा प्रतिपादित दर्शन का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: संत रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैतवाद' दर्शन दिया जिसके अनुसार ईश्वर (ब्रह्म) एक है लेकिन जगत और जीव उसकी विशेषताएं हैं। संत मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' दर्शन का प्रतिपादन किया जिसके अनुसार आत्मा और परमात्मा दो अलग-अलग वास्तविक सत्ताएँ हैं। संत निम्मार्काचार्य ने 'द्वैताद्वैतवाद' (भेदाभेद) का सिद्धांत दिया तथा सनक संप्रदाय की स्थापना की। संत वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैतवाद' और पुष्टिमार्ग का प्रतिपादन किया। अतः सही कूट A-4, B-3, C-2, D-1 है।
44
भारतीय इतिहास में सूफीवाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. शेख अहमद सरहिंदी इब्राहिम लोदी का समकालीन था। B. शेख नासीरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली शेख निजामुद्दीन औलिया का शिष्य था। C. औरंगजेब शेख सलीम चिश्ती का समकालीन था। D. भारत में सूफियों की कादिरी पद्धति सबसे पहले शेख नियामतुल्ला और मखदूम मुहम्मद जिलानी द्वारा लागू की गई।
(A) केवल A और B
(B) केवल A और C
(C) केवल B और C
(D) केवल B और D
📝 व्याख्या (Explanation)
भारत में सूफी संप्रदायों के संदर्भ में कथन B और D सही हैं। शेख नासिरुद्दीन महमूद, जिन्हें 'चिराग-ए-दिल्ली' कहा जाता है, प्रसिद्ध चिश्ती संत शेख निजामुद्दीन औलिया के सबसे प्रमुख शिष्य थे। भारत में कादिरी सिलसिले की स्थापना 15वीं शताब्दी में शाह नियामतुल्ला और मखदूम शाह मुहम्मद जिलानी (उच्छ, पंजाब) द्वारा की गई थी। कथन A गलत है क्योंकि शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद अलिफ सानी) अकबर और जहांगीर के समकालीन थे (न कि इब्राहिम लोदी के)। कथन C गलत है क्योंकि शेख सलीम चिश्ती अकबर के समकालीन थे। अतः केवल B और D सही हैं।
45
सूची-I (संत): A. बाबा फरीद, B. बहाउद्दीन जकारिया, C. मियाँ मीर, D. शाह वलीउल्ला। सूची-II (सिलसिला): 1. कादिरी, 2. चिश्ती, 3. सुहरावर्दी, 4. नक्शबंदी।
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-2, C-1, D-4
(C) A-2, B-3, C-1, D-4
(D) A-4, B-1, C-2, D-3
📝 व्याख्या (Explanation)
सही मिलान: A-2 (बाबा फरीद-चिश्ती), B-3 (बहाउद्दीन जकारिया-सुहरावर्दी), C-1 (मियाँ मीर-कादिरी), D-4 (शाह वलीउल्ला-नक्शबंदी)। अतः सही कूट A-2, B-3, C-1, D-4 है।
46
"बैरम खाँ के पतन और मृत्यु की कहानी एक दुखद प्रभाव छोड़ती है।" यह किस प्रसिद्ध इतिहासकार ने लिखा है?
(A) वी. ए. स्मिथ ने
(B) लेनपूल ने
(C) रशब्रुक विलियम्स ने
(D) डॉ. ए. एल. श्रीवास्तव ने
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल सम्राट अकबर के संरक्षक और महान सेनापति बैरम खाँ के संबंध में प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार वी. ए. स्मिथ (V.A. Smith) ने अपनी पुस्तक 'अकबर द ग्रेट मुग़ल' में लिखा है कि "बैरम खाँ के पतन और मृत्यु की कहानी एक दुखद प्रभाव छोड़ती है।" बैरम खाँ ने हुमायूँ की मृत्यु के बाद द्वितीय पानीपत युद्ध (1556 ई.) में हेमू को पराजित कर अकबर के साम्राज्य की रक्षा की थी। परंतु 1560 ई. में दरबार के राजनीतिक षड्यंत्रों के कारण उनका अकबर से मतभेद हो गया और मक्का जाते समय पाटन (गुजरात) में मुबारक खाँ नामक अफगान ने उनकी हत्या कर दी थी।
47
अकबर द्वारा उठाए गए निम्नलिखित में से किस कदम को इतिहासकारों ने राज्य के धर्म-निरपेक्ष स्वरूप को सुदृढ़ करने वाला सबसे निर्णायक कदम माना है?
(A) इबादत खाने का निर्माण जहाँ सभी सम्प्रदाय के लोग एकत्रित होकर विचार-विमर्श कर सकते थे।
(B) दीन-ए-इलाही को लागू करना।
(C) जजिया और धार्मिक तीर्थयात्रा कर खत्म करना।
(D) अकबर की राजपूत रानियों से शादी।
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल सम्राट अकबर की सुलह-ए-कुल (सार्वभौमिक शांति व सहिष्णुता) नीति के अंतर्गत इतिहासकारों द्वारा 'धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना' की संज्ञा मुख्य रूप से 1563 ई. में 'तीर्थयात्रा कर' की समाप्ति तथा 1564 ई. में गैर-मुस्लिमों पर लगने वाले धार्मिक कर 'जजिया' (Jizya) के उन्मूलन को दी जाती है। इन करों को समाप्त करके अकबर ने सभी धर्मों की प्रजा को कानूनी और सामाजिक रूप से बराबरी का दर्जा दिया। यद्यपि इबादत खाना और दीन-ए-इलाही भी उनकी उदार नीति के अंग थे, परंतु जजिया की समाप्ति राज्य के स्वरूप को धर्मनिरपेक्ष बनाने वाला सबसे निर्णायक कदम था।
48
A. 'जात' पद शाही सोपान (पदानुक्रम) में मनसबदार की व्यक्तिगत स्थिति और उसके वेतन का सूचक था। B. 'सवार' पद घुड़सवारों की उस संख्या का सूचक था जो मनसबदार को सेना में रखने होते थे। C. मनसबदारों को वेतन नकद (नक़दी) अथवा जागीर (भूमि राजस्व हस्तांतरण) दोनों रूपों में दिया जाता था। D. मनसबदारी पद आनुवंशिक (Hereditary) नहीं था और मनसबदार की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाती थी।
(A) केवल A और B
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगलकालीन मनसबदारी प्रणाली सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था का मूल आधार थी, जिसे अकबर ने मंगोलों की दशमलव प्रणाली के आधार पर व्यवस्थित रूप से लागू किया था। इसमें 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत ओहदे, दरबार में प्रतिष्ठा और वेतन का निर्धारण करता था, जबकि 'सवार' पद यह दर्शाता था कि उस मनसबदार को राज्य की सेवा के लिए कितने सशस्त्र घुड़सवार सैनिक और घोड़े रखने अनिवार्य हैं। मनसबदारों को वेतन नकद या जागीर के रूप में दिया जाता था। यह पद आनुवंशिक नहीं था; मनसबदार की मृत्यु के बाद उसका मनसब समाप्त हो जाता था और 'जब्ती नियम' (Law of Escheat) के तहत उसकी संपत्ति राज्य द्वारा जब्त कर ली जाती थी। अतः चारों कथन सही हैं।
49
मुगल प्रांतीय एवं स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों में निम्नलिखित में से कौनसा सही सुमेलित नहीं है?
(A) कारकुन - परगने के हिसाब-किताब को लिपिबद्ध करने वाला लिपिक
(B) शिकदार - परगने में शांति व्यवस्था एवं प्रशासनिक नियंत्रण कायम करना
(C) कानूनगो - परगने की उपज तथा भूमिकर की जमा तथा बकाया का विवरण रखना
(D) आमिल - राजस्व के रूप में प्राप्त आय को नियमित रूप से सीधे सरकार के मुख्यालय भेजना
📝 व्याख्या (Explanation)
शेरशाह सूरी और मुगलों के परगना (तहसील) स्तरीय प्रशासन के अधिकारियों का कार्य विवरण इस प्रकार है: 'शिकदार' परगने का मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता था जो शांति-व्यवस्था बनाए रखता था। 'कानूनगो' पटवारियों का प्रमुख होता था और परगने के कृषि रकबे, उपज, लगान की दरों और बकाया का रिकॉर्ड रखता था। 'कारकुन' परगने का मुख्य लिपिक/मुंशी होता था जो हिसाब-किताब लिखता था। 'आमिल' (या अमलगुजार) का मुख्य कार्य परगने में किसानों से प्रत्यक्ष भू-राजस्व का निर्धारण और संग्रहण (Collection) करना था, जबकि खजाने को मुख्यालय भेजने का कार्य खजांची (पोतदार) का होता था। अतः विकल्प D का विवरण सुमेलित नहीं है।
50
मुगल स्थापत्य कला में 'दोहरे गुम्बद' (Double Dome) का प्राचीनतम/प्रथम उदाहरण किसे माना जाता है?
(A) जामा मस्जिद
(B) हुमायूँ का मकबरा
(C) मोती मस्जिद
(D) एत्मादुदौला का मकबरा
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय उपमहाद्वीप में विशाल 'दोहरे गुंबद' (Double Dome) तथा चारबाग शैली में निर्मित उद्यान का प्रथम पूर्ण विकसित उदाहरण दिल्ली स्थित 'हुमायूँ का मकबरा' (Humayun's Tomb) माना जाता है। इस मकबरे का निर्माण हुमायूँ की बेगम हाजी बेगम (हमीदा बानू बेगम) की देखरेख में फारसी वास्तुकार मीरक मिर्जा गियास द्वारा 1565-1572 ई. के मध्य करवाया गया था। दोहरे गुंबद की तकनीकी विशेषता यह होती है कि इमारत बाहर से अत्यंत विशाल और ऊँची दिखाई देती है जबकि अंदर से छत का अनुपात संतुलित बना रहता है। यह इमारत ताज महल की अग्रगामी मानी जाती है।
51
अकबरकालीन प्रसिद्ध चित्रकार कौन था जिसने बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह का सुंदर चित्र बनाया था?
(A) अबुल हसन
(B) केशव लाल
(C) खेमकरण
(D) फारुख बेग
📝 व्याख्या (Explanation)
फारुख बेग (Farrukh Beg) अकबर और जहांगीर के काल का एक अत्यंत कुशल मध्य एशियाई चित्रकार था। अकबर ने 1600 ई. के आसपास फारुख बेग को दक्कन (बीजापुर) के आदिलशाही दरबार में भेजा था जहाँ उसने बीजापुर के कलाप्रेमी सुल्तान इब्राहिम आदिलशाह द्वितीय का एक प्रसिद्ध और सजीव व्यक्ति-चित्र (Portrait) बनाया था। फारुख बेग की चित्रकला पर फारसी और दक्कनी शैली का गहरा प्रभाव था। जहांगीर ने बाद में फारुख बेग को उसकी उत्कृष्ट कलाकृति के लिए 'नादिर-उल-असर' की उपाधि से सम्मानित किया था।
52
मुगलकालीन वाणिज्यिक एवं आर्थिक शब्दावली का सही मिलान कीजिए: सूची-I: A. ददनी B. सनद C. दस्तक D. हुंडी सूची-II: 1. मुगल शाही आदेश/अधिकार पत्र 2. विनिमय पत्र (Bill of Exchange) 3. प्राथमिक उत्पादकों को अदा किया जाने वाला अग्रिम धन (Advance) 4. कर की छूट के प्रयोजन के लिए यूरोपीय व्यापारियों को दिया जाने वाला आज्ञा पत्र
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-3, B-1, C-4, D-2
(C) A-2, B-4, C-1, D-3
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगलकालीन व्यापार और बैंकिंग शब्दावली का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'ददनी' (Dadni system) व्यापारिक व्यवस्था थी जिसके तहत यूरोपीय या भारतीय व्यापारी दस्तकारों, बुनकरों व किसानों को माल तैयार करने के लिए अग्रिम धन (Advance) देते थे। 'सनद' मुगल सम्राट या सूबेदार द्वारा जारी किया गया आधिकारिक आदेश/विलेख होता था। 'दस्तक' चुंगी/कर रहित व्यापार करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों को दिया जाने वाला पास या परमिट था। 'हुंडी' क्रेडिट और विनिमय पत्र (Bill of Exchange) होता था जिसके माध्यम से धन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित भेजा जाता था। अतः कूट A-3, B-1, C-4, D-2 सही है।
53
मुगलकालीन जागीरदारी प्रथा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा/से कथन सही हैं? A. जागीरदार की मृत्यु के बाद सारी जागीर पुन: राजा (राज्य) के अधीन हो जाती थी (जब्ती सिद्धांत)। B. अकबर के समय जागीरदारों की संख्या में वृद्धि तथा स्थानांतरण की नीति लागू थी। C. वंशानुगत जागीर (वतन जागीर) पर अधिकार को लेकर राजपूतों तथा स्थानीय जमींदारों में संवेदनशीलता थी।
(A) केवल A
(B) केवल B और C
(C) केवल A और B
(D) A, B और C सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगलों की जागीरदारी व्यवस्था के संदर्भ में तीनों कथन सत्य हैं। मुगलों में जागीर भूमि पर जागीरदार का वंशानुगत स्वामित्व नहीं होता था; जागीरदार केवल राजस्व संग्रह का अधिकारी होता था और उसकी मृत्यु या स्थानांतरण पर जागीर राज्य/सम्राट के पास वापस आ जाती थी। अकबर ने जागीरदारों के स्थानीय प्रभाव और गुटबाजी को रोकने के लिए प्रति 3-4 वर्ष में जागीरों के स्थानांतरण की नीति बनाई थी। हालाँकि राजपूत राजाओं को उनकी पैतृक रियासतों में 'वतन जागीर' दी जाती थी जो वंशानुगत होती थी और उसमें हस्तक्षेप करने पर राजपूतों में तीव्र असंतोष पनपता था। अतः सभी कथन सत्य हैं।
54
मुगल काल में स्वायत्त जमींदारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अकबर प्रथम मुगल बादशाह था जिसने स्वायत्त जमींदारों को मुगल प्रशासन का अंग बनाने के उद्देश्य से उन्हें मुगल सैनिक पदानुक्रम में मनसब देना आरंभ किया। B. स्वायत्त जमींदार मुगल बादशाह को एक निश्चित धनराशि वार्षिक पेशकश (Tribute) के रूप में देते थे। C. स्वायत्त जमींदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में होने वाले व्यापार तथा अन्य वस्तुओं पर स्वयं कर निर्धारित करने का अधिकार था।
(A) केवल A और B
(B) केवल B और C
(C) केवल A और C
(D) A, B and C सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल साम्राज्य में स्थानीय वंशानुगत शासकों/सरदारों को 'स्वायत्त जमींदार' (Autonomous Chiefs) कहा जाता था। अकबर ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए राजपूत राजाओं तथा अन्य स्वायत्त जमींदारों को मुगल मनसबदारी व्यवस्था में शामिल किया, जिससे वे साम्राज्य के वफादार स्तंभ बन गए। ये स्वायत्त जमींदार अपनी रियासतों में आंतरिक स्वायत्तता रखते थे और मुगल सम्राट को वार्षिक पेशकश (खिराज/नजराना) देते थे। परंतु कथन C असत्य है क्योंकि उन्हें अंतर-प्रांतीय व्यापार पर मनमाने कर लगाने या मुगल आर्थिक नीतियों का उल्लंघन करने का स्वतंत्र अधिकार नहीं था; चुंगी कर दरें केंद्रीय निर्देशों से नियंत्रित होती थीं। अतः केवल A and B सही हैं।
55
हुमायूँ के मकबरे के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही नहीं है?
(A) चारबाग पद्धति का प्रयोग सर्वप्रथम पूर्ण रूप से हुमायूँ के मकबरे में हुआ।
(B) इसमें स्वतंत्र रूप से निर्मित मीनारें स्थित हैं।
(C) मकबरे का विशाल गुम्बद इरानी/फारसी प्रभाव का द्योतक है।
(D) यह मकबरा एक निष्ठावान पत्नी का अपने स्वर्गीय पति के प्रति श्रद्धांजलि का प्रतीक माना जाता है।
📝 व्याख्या (Explanation)
दिल्ली स्थित हुमायूँ का मकबरा (निर्माण 1565-1572 ई.) मुगल वास्तुकला की एक ऐतिहासिक इमारत है। इसके संबंध में कथन B पूरी तरह असत्य है क्योंकि हुमायूँ के मकबरे में स्वतंत्र रूप से खड़ी मीनारें (Isolated Minarets) नहीं हैं; मुगलों में स्वतंत्र मीनारों का प्रयोग सबसे पहले जहांगीर काल में लाहौर में शाहदरा स्थित जहांगीर के मकबरे तथा बाद में आगरा के ताज महल में दिखाई देता है। हुमायूँ का मकबरा हाजी बेगम द्वारा बनवाया गया था, इसमें पहला पूर्ण चारबाग उद्यान और दोहरा फारसी गुंबद प्रयुक्त हुआ है। अतः विकल्प B गलत कथन है।
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निम्नलिखित में से कौनसी शाहजहाँ कालीन स्थापत्य कला की विशेषता नहीं है?
(A) दाँतेदार/बहुपात्रीय (Cusped) मेहराब
(B) बहुमूल्य रंगीन पत्थरों की पच्चीकारी (पिट्रा ड्यूरा) का प्रयोग
(C) आयताकार भवनों के स्थान पर पूरी तरह वृत्ताकार भवनों का निर्माण
(D) स्थापत्य में संगमरमर और अतिशय अलंकरण की प्रधानता
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल सम्राट शाहजहाँ (1628-1658 ई.) के शासनकाल को 'मुगल वास्तुकला का स्वर्ण युग' कहा जाता है। शाहजहाँकालीन वास्तुकला की मुख्य विशेषताओं में लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर श्वेत संगमरमर का व्यापक प्रयोग, दांतेदार या बहुपात्रीय मेहराबें (Cusped Arches), स्तंभों व दीवारों पर संगमरमर में कीमती रत्नों की पच्चीकारी (Pietra Dura या परचिनकारी) तथा भवनों में उत्कृष्ट सममिति (Symmetry) शामिल थी। परंतु शाहजहाँ ने इमारतों के मूल आयताकार (Rectangular) और वर्गाकार (Square) नक्शों को ही बनाए रखा; पूरी तरह वृत्ताकार (Circular) भवनों का निर्माण शाहजहाँ काल की शैली नहीं थी। अतः कथन C गलत है।
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मुगल काल में 'सुखेत मंडी' (Sukhet Mandi) मुख्य रूप से किसके व्यापार/उत्पादन के लिए जानी जाती थी?
(A) सिल्क/रेशम उत्पादन के लिए
(B) नील (Indigo) उत्पादन के लिए
(C) चांदी की खान के लिए
(D) शोरा उत्पादन के लिए
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल काल में भारत में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए 'नील' (Indigo) एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और मांग वाली नकदी फसल थी। उत्तरी भारत में बयाना (भरतपुर, राजस्थान) तथा सरखेज (गुजरात) नील उत्पादन के दो सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध केंद्र थे। इसके अतिरिक्त अवध और गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में स्थित 'सुखेत मंडी' और आसपास के क्षेत्र भी उच्च गुणवत्ता वाले नील की खेती, प्रसंस्करण और थोक व्यापारिक मंडी के रूप में प्रसिद्ध थे, जहाँ से डच और अंग्रेज व्यापारी बड़े पैमाने पर नील खरीदते थे।
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प्रथम कोंडाना विजय 2. पुरन्दर की संधि पर हस्ताक्षर 3. शिवाजी की आगरा यात्रा 4. सूरत की दूसरी लूट 1. प्रथम कोंडाना विजय: शिवाजी महाराज ने सर्वप्रथम 1647 ई. में कोंडाना दुर्ग पर विजय प्राप्त की थी। (इसी किले को बाद में फरवरी 1670 ई. में तानाजी मालुसरे ने मुगलों से पुनः जीता था, जिसके बाद इसका नाम 'सिंहगढ़' रखा गया)। 2. पुरंदर की संधि: 11 जून 1665 ई. को शिवाजी महाराज और मुगल सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह के मध्य यह संधि संपन्न हुई थी। 3. शिवाजी की आगरा यात्रा: मई 1666 ई. में शिवाजी महाराज मुगल सम्राट औरंगजेब के दरबार में आगरा पहुँचे, जहाँ उन्हें जयपुर भवन में नजरबंद कर दिया गया था। 4. सूरत की दूसरी लूट: अक्टूबर 1670 ई. में शिवाजी महाराज ने सूरत के समृद्ध बंदरगाह को दूसरी बार लूटा था (सूरत की प्रथम लूट जनवरी 1664 ई. में हुई थी)। अतः सही कालक्रम 1, 2, 3, 4 है।
(A) 1, 2, 3, 4
(B) 1, 4, 2, 3
(C) 2, 1, 4, 3
(D) 3, 1, 2, 4
📝 व्याख्या (Explanation)
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का सही कालक्रम (तिथिक्रमानुसार) इस प्रकार है:
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लॉर्ड डलहौजी द्वारा पंजाब को ब्रिटिश साम्राज्य में विलय करने की आधिकारिक घोषणा कब की गई थी?
(A) 13 दिसम्बर 1848
(B) 22 नवम्बर 1848
(C) 29 मार्च 1849
(D) 13 जनवरी 1849
📝 व्याख्या (Explanation)
द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-1849 ई.) में रामनगर, चिलियाँवाला और गुजरात (तोपों का युद्ध) की निर्णायक लड़ाइयों में सिख सेना की पराजय के बाद गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने 29 मार्च 1849 को एक आधिकारिक घोषणा पत्र जारी करके संपूर्ण पंजाब को ब्रिटिश भारतीय साम्राज्य में शामिल (Annex) कर लिया। अंतिम सिख महाराजा दलीप सिंह को पेंशन देकर इंग्लैंड भेज दिया गया और प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया। पंजाब के प्रशासनिक संचालन के लिए सर हेनरी लॉरेंस की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक प्रशासनिक परिषद गठित की गई थी।
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भारतीय समाज में भक्ति आंदोलन के सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. भक्ति आंदोलन मध्ययुगीन हिंदू समाज का एक भक्तिपूर्ण परिवर्तन था जिसमें वैदिक अनुष्ठानों या तपस्वी जीवनशैली के स्थान पर व्यक्तिगत ईश्वर के साथ प्रेम संबंध को प्राथमिकता दी गई। B. भक्ति आंदोलन ने महिलाओं, शूद्रों और समाज के वंचित वर्गों के सदस्यों को आध्यात्मिक मुक्ति का एक समावेशी मार्ग प्रदान किया।
(A) केवल A
(B) केवल B
(C) A और B दोनों
(D) न तो A और न ही B
📝 व्याख्या (Explanation)
मध्यकालीन भारत में 8वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य विकसित हुए भक्ति आंदोलन ने भारतीय समाज और संस्कृति पर गहरा क्रांतिकारी और समावेशी प्रभाव डाला। भक्ति संतों (जैसे कबीर, रविदास, गुरु नानक, मीराबाई, चैतन्य) ने जटिल वैदिक यज्ञीय अनुष्ठानों, जातिगत भेदभाव और बाह्य आडंबरों का विरोध किया। उन्होंने ईश्वर की भक्ति को व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण (सगुण या निर्गुण) के रूप में परिभाषित किया। इस आंदोलन की सबसे बड़ी सामाजिक देन यह थी कि इसने जाति, लिंग और वर्ग के भेदों को तोड़कर महिलाओं, शूद्रों और अछूत समझे जाने वाले समुदायों के लिए भक्ति और मोक्ष के द्वार समान रूप से खोल दिए। अतः दोनों कथन पूरी तरह सत्य हैं।
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मराठा प्रशासन में 'सर-ए-नौबत' का प्रमुख कार्य क्या था?
(A) राजा के जीवन की सुरक्षा की देखभाल करना
(B) जासूसी एवं सूचना एकत्र करना
(C) सेना की भर्ती, संगठन व सेना में अनुशासन बनाये रखना
(D) राजा की अनुपस्थिति में उसके कार्यों की देखभाल करना
📝 व्याख्या (Explanation)
छत्रपति शिवाजी महाराज के अष्टप्रधान परिषद में 'सर-ए-नौबत' (या सेनापति) का पद मराठा सैन्य प्रशासन का सर्वोच्च पद होता था। सर-ए-नौबत का मुख्य दायित्व सेना की नई भर्ती करना, सैनिकों तथा घुड़सवारों का संगठन करना, युद्ध क्षेत्र में सेना का कुशल नेतृत्व करना तथा सेना में कड़ा अनुशासन बनाए रखना था। यह अष्टप्रधान के आठ प्रमुख मंत्रियों में से एक था। राजा की अनुपस्थिति में कार्य देखना 'पेशवा' (प्रधानमंत्री) का कार्य होता था तथा जासूसी व खुफिया विभाग का प्रमुख 'वाकियानवीस' एवं 'जासूस प्रमुख' होता था।
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शिवाजी के प्रशासन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था रैयतवाड़ी प्रथा पर आधारित थी। B. शिवाजी ने भूमि की पैमाइश के आधार पर लगान निर्धारित किया।
(A) केवल A
(B) केवल B
(C) A और B दोनों
(D) न तो A और न ही B
📝 व्याख्या (Explanation)
छत्रपति शिवाजी महाराज की राजस्व प्रणाली मलिक अंबर (अहमदनगर) की भू-राजस्व व्यवस्था से अत्यधिक प्रभावित थी और यह पूरी तरह 'रैयतवाड़ी प्रथा' पर आधारित थी। इस व्यवस्था में राज्य का किसानों (रैयत) से सीधा संपर्क होता था तथा बिचौलियों या जमींदारों के हस्तक्षेप को न्यूनतम कर दिया गया था। शिवाजी ने भूमि की वैज्ञानिक पैमाइश करवाई जिसके लिए 'काठी' (मापक छड़ी) का प्रयोग किया जाता था। भूमि को उपजाऊपन के आधार पर मापकर कुल उपज का प्रारंभ में 33% तथा बाद में स्थानीय करों को समाप्त करके 40% भू-राजस्व निर्धारित किया गया था। अतः दोनों कथन सत्य हैं।
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चौथ की आय का बंटवारा के संदर्भ में निम्नलिखित का मिलान कीजिए: सूची-I: सूची-I: A. बबती B. सहोत्रा C. नाड़गुण्डा D. मोकास सूची-II: 1. 1/4th भाग राजा के लिए 2. 6% पंत सचिव के लिए 3. 3% (राजा की इच्छा/स्वेच्छा पर निर्भर) 4. 66% मराठा सरदारों को
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-1, B-2, C-4, D-3
(C) A-4, B-3, C-2, D-1
(D) A-4, B-1, C-3, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
मराठों द्वारा पड़ोसी राज्यों व क्षेत्रों से वसूले जाने वाले 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) का विभाजन मराठा राज्य के अंतर्गत विभिन्न अधिकारियों और सरदारों में एक निश्चित अनुपात में किया जाता था। इस बंटवारे का सही विवरण इस प्रकार है: 'बबती' (Babti) चौथ का 25% (1/4 भाग) होता था जो सीधे छत्रपति/राजा के लिए आरक्षित था। 'सहोत्रा' (Sahotra) चौथ का 6% भाग था जो पंत सचिव को दिया जाता था। 'नाड़गुण्डा' (Nadgunda) चौथ का 3% भाग था जो राजा के स्वेच्छाविवेक पर निर्भर करता था जिसे वह किसी को भी दे सकता था। 'मोकास' (Mokas) चौथ का सबसे बड़ा भाग (66%) था जो घुड़सवार टुकड़ियाँ रखने वाले मराठा सरदारों में बांटा जाता था। अतः सही कूट A-1, B-2, C-3, D-4 है।
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प्राचीन भारतीय विज्ञान और गणित से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. ब्रह्मगुप्त ने 'ब्रह्मस्फुटसिद्धांत' में पहली बार शून्य को एक स्वतंत्र संख्या के रूप में परिभाषित किया तथा ऋणात्मक संख्याओं (कर्ज) और धनात्मक संख्याओं के गुणन के नियम प्रतिपादित किए। B. आर्यभट्ट ने 'आर्यभटीय' में पृथ्वी की परिधि की गणना की जो आधुनिक गणना के अत्यधिक निकट है, और उन्होंने स्पष्ट किया कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण राहु-केतु द्वारा ग्रसित होने के कारण नहीं बल्कि छाया के कारण होते हैं। C. भास्कराचार्य द्वितीय ने अपने ग्रंथ 'सिद्धांत शिरोमणि' के 'गोलाध्याय' खंड में गुरुत्वाकर्षण के मूल सिद्धांत का उल्लेख न्यूटन से सदियों पूर्व 'आकर्षण शक्ति' के रूप में किया था। D. लल्ल द्वारा रचित 'शिष्यधीवृद्धिदतंत्र' मुख्य रूप से प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सा और गणितीय ज्यामिति के समन्वय पर आधारित एक प्रामाणिक ग्रंथ है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय गणित एवं खगोलशास्त्र के संदर्भ में कथन A, B और C पूरी तरह सत्य हैं। ब्रह्मगुप्त (7वीं सदी) ने शून्य की गणितीय संक्रियाएँ बताईं तथा ऋण व धन संख्याओं के गुणन नियम दिए। आर्यभट्ट (5वीं सदी) ने पृथ्वी की परिधि, उसकी घूर्णन गति तथा ग्रहण के वैज्ञानिक कारण (छाया) का स्पष्ट प्रतिपादन किया। भास्कराचार्य द्वितीय (12वीं सदी) ने 'सिद्धांत शिरोमणि' के गोलाध्याय में पृथ्वी की 'आकर्षण शक्ति' (गुरुत्वाकर्षण) की व्याख्या की थी। परंतु कथन D असत्य है क्योंकि लल्ल (8वीं सदी) द्वारा रचित 'शिष्यधीवृद्धिदतंत्र' मुख्य रूप से 'खगोलशास्त्र और गणित' (Astronomy) का प्रामाणिक ग्रंथ है, न कि शल्य चिकित्सा का (शल्य चिकित्सा सुश्रुत संहिता से संबंधित है)। अतः सही विकल्प B है।
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प्राचीन भारतीय आयुर्वेद एवं रसशास्त्र से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. 'चरक संहिता' में रोगों के उपचार के लिए केवल वनस्पति आधारित औषधियों की अनुमति दी गई है और धातुओं के भस्म के उपयोग को पूरी तरह वर्जित किया गया है। B. 'सुश्रुत संहिता' के 'सूत्रस्थान' में प्लास्टिक सर्जरी (Rhinoplasty), मोतियाबिंद के निष्कासन और मृत शरीर के विच्छेदन की विस्तृत प्रणालियों का वर्णन है। C. नागार्जुन को रसशास्त्र (Alchemy) का महान ज्ञाता माना जाता है, जिन्होंने 'रसरत्नाकर' ग्रंथ में पारे के शुद्धिकरण और उसके औषधीय प्रयोग की विधियाँ बताईं। D. 'नवनीतकम्' गुप्त काल का एक प्रसिद्ध चिकित्सा ग्रंथ है जो मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार के चूर्णों, काढ़ों और मलमों के नुस्खों का संग्रह है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय चिकित्सा इतिहास के संदर्भ में कथन B, C और D सत्य हैं। महर्षि सुश्रुत को प्लास्टिक सर्जरी का जनक कहा जाता है; उन्होंने सुश्रुत संहिता के सूत्रस्थान में नाक का संधान (Rhinoplasty) तथा मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा का विस्तृत वर्णन किया है। नागार्जुन ने 'रसरत्नाकर' में पारे (Mercury) के भस्म और औषधीय प्रयोग से रोगों के निवारण का सिद्धांत दिया। 'नवनीतकम्' (गुप्तकाल) औषधीय नुस्खों का प्रसिद्ध संग्रह ग्रंथ है। परंतु कथन A असत्य है क्योंकि चरक संहिता में वनस्पति आधारित काष्ठौषधियों के साथ-साथ खनिज और धातुओं के सीमित व नियंत्रित भस्म प्रयोग की अवहेलना नहीं की गई है तथा चरक परंपरा में धातुओं का उल्लेख मिलता है। अतः केवल B, C और D सत्य हैं।
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प्राचीन भारतीय भौतिकी, दर्शनशास्त्र और धातु विज्ञान से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. महर्षि कणाद ने 'वैशेषिक सूत्र' में परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए स्पष्ट किया कि परमाणु अविभाज्य और नित्य हैं, तथा दो परमाणुओं के संयोग से 'द्वयणुक' का निर्माण होता है। B. जैन दर्शन के अनुसार, 'पुद्गल' के सूक्ष्मतम अंश को परमाणु कहा जाता है, परंतु वैशेषिक के विपरीत, जैन मत में सभी परमाणु एक ही मूल प्रकृति के होते हैं जो संयोजन के आधार पर भिन्न रूप लेते हैं। C. मेहरौली का लौह स्तंभ अपनी जंग-रोधी क्षमता के लिए प्रसिद्ध है, जिसके वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि इसमें फास्फोरस की उच्च मात्रा और सल्फर व मैंगनीज की कमी इसके स्थायित्व का मुख्य कारण है। D. प्राचीन भारत में 'वूत्ज स्टील' का उत्पादन क्रूसिबल विधि से किया जाता था, जिसकी उच्च कार्बन सामग्री के कारण सीरिया के दमिश्क में विश्व प्रसिद्ध तलवारें बनाई जाती थीं।
(A) केवल A, C और D
(B) केवल B और C
(C) केवल A, B और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय दर्शन, भौतिक शास्त्र एवं धातु विज्ञान (Metallurgy) से संबंधित सभी चारों कथन (A, B, C, D) ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से पूरी तरह सत्य हैं। महर्षि कणाद (वैशेषिक दर्शन) ने सबसे पहले परमाणुवाद (Atomism) का सिद्धांत दिया। जैन दर्शन में भौतिक द्रव्य को 'पुद्गल' कहा गया है और उसके सूक्ष्मतम अविभाज्य अंश को परमाणु माना गया है जो एक ही प्रकृति के होते हैं। दिल्ली स्थित मेहरौली का लौह स्तंभ (चंद्रगुप्त द्वितीय का) 1600 वर्षों से बिना जंग लगे खड़ा है जिसका कारण इसमें फास्फोरस की प्रचुरता तथा एक सुरक्षात्मक पैसिव फिल्म (misawite) का बनना है। दक्षिण भारत में निर्मित 'वूत्ज स्टील' (Wootz Steel) अपनी उच्च कार्बन गुणवत्ता के कारण दमिश्क (Damascus) की प्रसिद्ध लचीली व धारदार तलवारों के निर्माण में प्रयोग होता था।
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प्राचीन भारतीय शिलालेखों, जल विज्ञान और तकनीकी ग्रंथों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. जूनागढ़ शिलालेख (गुजरात) के अनुसार, सुदर्शन झील का निर्माण मौर्य काल में हुआ था और बाद में शक शासक रुद्रदामन तथा गुप्त शासक स्कंदगुप्त ने बिना बेगार लिए अपने निजी कोष से इसका जीर्णोद्धार कराया। B. वराहमिहिर द्वारा रचित 'वृहत्संहिता' के 'दगार्गल' अध्याय में भूजल विज्ञान का विस्तृत वर्णन है, जिसमें वनस्पतियों और दीमकों के टीलों के आधार पर गुप्त जल स्रोतों की खोज के सिद्धांत दिए गए हैं। C. ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के 'अर्थशास्त्र' में 'उदकभाग' नामक जल-कर का उल्लेख है और पानी को ऊपर उठाने के लिए चक्राकार यंत्रों (अरघट्ट या रहट के प्रारंभिक रूप) के प्रयोग का संकेत मिलता है। D. राजा भोज द्वारा रचित 'समरांगण सूत्रधार' में केवल वास्तुकला का विवरण है, इसमें यांत्रिक उपकरणों या 'यंत्रों' (जैसे उड़ने वाले यांत्रिक पक्षी, द्वारपाल रोबोट) का कोई तकनीकी उल्लेख नहीं मिलता है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय जल विज्ञान एवं प्राविधिक इतिहास में कथन A, B और C सत्य हैं। जूनागढ़ अभिलेख (रुद्रदामन) से सिद्ध होता है कि सुदर्शन झील चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतीय राज्यपाल पुष्यगुप्त द्वारा बनवाई गई थी और बाद में अशोक, रुद्रदामन तथा स्कंदगुप्त ने अपने निजी खर्चे (बिना विष्टि/बेगार के) से इसकी मरम्मत करवाई। वराहमिहिर की वृहत्संहिता के 'दगार्गल' अध्याय में दीमकों के टीले (Termite mounds) और विशिष्ट वनस्पति संकेतों से भूजल की खोज का वैज्ञानिक विवरण है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सिंचाई कर 'उदकभाग' (1/5 से 1/3) तथा अरघट्ट का उल्लेख है। परंतु कथन D असत्य है क्योंकि परमार राजा भोज की रचना 'समरांगण सूत्रधार' के 'यंत्रविधान' अध्याय में अनेक स्वचलित यंत्रों, यांत्रिक पक्षियों तथा रोबोटिक द्वारपालों का अद्भुत तकनीकी वर्णन मिलता है। अतः केवल A, B और C सत्य हैं।
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वर्णाश्रम व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. पुरुषसूक्त में वर्णित वर्ण व्यवस्था का मूल उद्देश्य समाज को आंगिक (Organic) एकता प्रदान करना था, न कि जन्म आधारित संस्तरण निर्मित करना। B. गुणात्मक और कर्मात्मक आधार पर विभाजित वर्ण व्यवस्था का उत्तर-वैदिक काल में पूर्णतः अपरिवर्तनीय आनुवंशिक श्रेणियों में रूपांतरण हो गया। C. प्रत्येक आश्रम व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक विकास और सामाजिक ऋणों की मुक्ति के सोपानों के अनुरूप संरचित था। D. संन्यास आश्रम का मुख्य उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मोक्ष प्राप्त करना था, इसका समष्टिगत कल्याण से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय सामाजिक दर्शन और वर्णाश्रम धर्म में कथन A, B और C सही हैं। ऋग्वेद के 10वें मण्डल के पुरुषसूक्त में समाज की रचना एक विराट पुरुष के अंगों से बताकर समाज में आंगिक एकता (Organic Unity) व कार्य-विभाजन दर्शाया गया था न कि उच्च-नीच का भेद। उत्तर वैदिक काल आते-आते जो वर्ण व्यवस्था पूर्व में कर्म व गुण पर आधारित थी, वह जन्मजात व कठोर आनुवंशिक श्रेणियों में बदल गई। चारों आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) मनुष्य के जीवनकाल, कर्तव्यों और ऋण-मुक्ति के चरणों के अनुकूल बनाए गए थे। परंतु कथन D असत्य है क्योंकि संन्यासी समाज से विरक्त होकर भी भ्रमण द्वारा समष्टिगत कल्याण, सामाजिक नैतिक संतुलन और लोक-संग्रह का कार्य करता था। अतः केवल A, B और C सत्य हैं।
69
प्राचीन भारतीय दर्शनशास्त्र के प्रमुख संप्रदायों और उनके सिद्धांतों का मिलान कीजिए: सूची-I (दर्शन): सूची-I: A. सांख्य दर्शन B. वैशेषिक दर्शन C. न्याय दर्शन D. मीमांसा दर्शन सूची-II: 1. परमाणुवाद और असत्कार्यवाद 2. द्वैतवादी प्रकृति-पुरुष विवेकज्ञान और सत्कार्यवाद 3. अपूर्व का सिद्धांत और कर्म की सर्वोच्चता 4. षोडश पदार्थों का विश्लेषण और प्रमाणशास्त्र
(A) A-2, B-1, C-4, D-3
(B) A-1, B-2, C-4, D-3
(C) A-2, B-4, C-1, D-3
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
षड्दर्शन के प्रमुख दार्शनिक संप्रदायों और उनके मूल सिद्धांतों का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: महर्षि कपिल का 'सांख्य दर्शन' प्रकृति और पुरुष का द्वैतवादी भेद तथा 'सत्कार्यवाद' (कारण में कार्य पहले से विद्यमान है) स्वीकार करता है। महर्षि कणाद का 'वैशेषिक दर्शन' जगत की रचना परमाणुओं से मानता है और 'असत्कार्यवाद' (कारण से नया कार्य उत्पन्न होता है) का समर्थन करता है। महर्षि गौतम का 'न्याय दर्शन' 16 पदार्थों के तर्कसंगत विश्लेषण और प्रमाणशास्त्र (चार प्रमाण- प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) पर आधारित है। जैमिनी का 'पूर्व-मीमांसा दर्शन' कर्मकांड, वेदों की नित्यता तथा याग कर्म से उत्पन्न 'अपूर्व' के सिद्धांत की व्याख्या करता है। अतः सही कूट A-2, B-1, C-4, D-3 है।
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प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों का परीक्षण कीजिए: A. वैदिक शिक्षा व्यवस्था का चरम लक्ष्य 'सा विद्या या विमुक्तये' था, जहाँ ज्ञान का तात्पर्य केवल सूचना संग्रह नहीं बल्कि आत्म-साक्षात्कार था। B. 'उपनयन संस्कार' केवल उच्च तीन वर्णों के बालकों के लिए अनिवार्य था, जिसने उन्हें 'द्विज' (दूसरा जन्म) की पात्रता प्रदान की। C. प्राचीन काल में 'समावर्तन संस्कार' गुरु के गृह में प्रवेश के समय औपचारिक शिक्षण की शुरुआत का प्रतीक था। D. 'चरक' और 'घटिका' ऐसी उच्च शिक्षण संस्थाएँ थीं जो क्रमशः चिकित्सा विज्ञान और उन्नत धार्मिक दार्शनिक वाद-विवाद के केंद्रों के रूप में कार्य करती थीं।
(A) A, B, C और D सभी
(B) केवल A और B
(C) केवल B, C और D
(D) केवल A, B और D
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा से संबंधित कथनों में C असत्य है। 'समावर्तन संस्कार' (Convocation/Graduation) औपचारिक शिक्षण की समाप्ति पर गुरु के आश्रम से गृहस्थ जीवन में लौटने/स्नातक होने का प्रतीक था; जबकि शिक्षा की शुरुआत या गुरु गृह में प्रवेश का प्रतीक 'उपनयन संस्कार' तथा 'वेदारंभ संस्कार' था। प्राचीन शिक्षा का चरम लक्ष्य आध्यात्मिक मुक्ति व चरित्र निर्माण था ('सा विद्या या विमुक्तये')। उपनयन संस्कार के बाद ही ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य बालक 'द्विज' कहलाते थे। दक्षिण भारत में उच्च धार्मिक-दार्शनिक शिक्षा के केंद्रों को 'घटिका' तथा फिरते हुए विद्वानों/ज्ञान केंद्रों को 'चरक' कहा जाता था। अतः A, B और D सत्य हैं।
71
प्राचीन सोलह संस्कारों और उनके मुख्य उद्देश्यों का मिलान कीजिए: सूची-I (संस्कार): सूची-I: A. पुंसवन B. जातकर्म C. निष्क्रमण D. वेदारंभ सूची-II: 1. शिशु का बौद्धिक विकास और मेधा शक्ति का संवर्धन 2. गर्भस्थ शिशु के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा 3. सामाजिक जगत से परिचय और प्रकृति के तत्वों के समक्ष प्रस्तुति 4. उपनयन के पश्चात विशिष्ट वैदिक संहिताओं के व्यवस्थित पाठ की शुरुआत
(A) A-2, B-1, C-3, D-4
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-3, C-1, D-4
(D) A-4, B-1, C-3, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
सनातन परंपरा में वर्णित 16 संस्कारों और उनके अनुष्ठानिक उद्देश्यों का सही सुमेलित रूप इस प्रकार है: 'पुंसवन संस्कार' गर्भाधान के तीसरे माह में गर्भस्थ शिशु के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ संतान प्राप्ति हेतु किया जाता था। 'जातकर्म संस्कार' बालक के जन्म के समय उसकी आयु, मेधा शक्ति और बौद्धिक विकास की कामना से जीभ पर शहद/घृत चटाकर किया जाता था। 'निष्क्रमण संस्कार' जन्म के चौथे माह में शिशु को पहली बार घर से बाहर निकालकर सूर्य/प्रकृति व समाज के दर्शन कराने हेतु होता था। 'वेदारंभ संस्कार' उपनयन के बाद गुरुमुख से वेदों के व्यवस्थित अध्ययन की शुरुआत का प्रतीक था। अतः सही कूट A-2, B-1, C-3, D-4 है।
72
प्राचीन भारतीय दर्शन में 'ऋण-त्रय' की अवधारणा और सामाजिक दायित्वों पर विचार कीजिए: A. देव ऋण की मुक्ति व्यक्ति द्वारा यज्ञों के संपादन और प्रकृति के तत्वों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने से होती थी। B. ऋषि ऋण से तात्पर्य प्राचीन ज्ञान परंपरा को अक्षुण्ण रखना है, जिसे ब्रह्मचर्य आश्रम के दौरान स्वाध्याय और वेदाध्ययन द्वारा चुकाया जाता था। C. पितृ ऋण की मुक्ति केवल संन्यास ग्रहण कर संसार का त्याग करने से ही संभव मानी गई थी। D. ऋण-त्रय की यह संपूर्ण अवधारणा व्यक्ति को समाज, संस्कृति और समष्टि के प्रति उत्तरदायी बनाकर स्वार्थपरता को नियंत्रित करती थी।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, B और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन भारतीय धर्मशास्त्रों में मनुष्य के सिर पर तीन मूल ऋणों (ऋण-त्रय) की अवधारणा मानी गई है। इन ऋणों की मुक्ति के संदर्भ में कथन C असत्य है क्योंकि 'पितृ ऋण' की मुक्ति संन्यास ग्रहण करने से नहीं, बल्कि गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करके धर्मानुकूल विवाह करने तथा संतानोंत्पत्ति (संतान परंपरा आगे बढ़ाने) से संभव मानी गई थी। देव ऋण की मुक्ति यज्ञों और देव-पूजन से होती थी; ऋषि ऋण की मुक्ति वेदों के अध्ययन, ज्ञान के संवर्धन और स्वाध्याय से होती थी। यह अवधारणा मनुष्य को स्वार्थ से ऊपर उठाकर प्रकृति, परंपरा और पूर्वजों के प्रति उत्तरदायी बनाती थी। अतः केवल A, B और D सही हैं।
73
बौद्ध शिक्षा प्रणाली और पारंपरिक वैदिक शिक्षा प्रणाली के तुलनात्मक विश्लेषण पर विचार कीजिए: A. वैदिक शिक्षा मुख्य रूप से व्यक्तिगत (गुरु-शिष्य परंपरा) और अरण्य केंद्रित थी, जबकि बौद्ध शिक्षा अनिवार्य रूप से संस्थागत (विहार केंद्रित) थी। B. बौद्ध शिक्षा प्रणाली में प्रवेश के लिए 'प्रव्रज्या संस्कार' आवश्यक था, जिसके उपरांत शिक्षार्थी को 'श्रमण' या 'सामनेर' कहा जाता था। C. वैदिक शिक्षा की भाँति ही बौद्ध विहारों में भी शिक्षा का माध्यम पूर्णतः संस्कृत भाषा ही था, ताकि ज्ञान की शुद्धता बनी रहे। D. बौद्ध शिक्षा में लोकतांत्रिक मूल्यों और सामूहिक चर्चाओं को अत्यधिक महत्व दिया जाता था, जो कि संघ की कार्यप्रणाली के अनुरूप था।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A और B
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
वैदिक तथा बौद्ध शिक्षा प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन में कथन C असत्य है। बौद्ध शिक्षा का माध्यम आम जनमानस की भाषा यानी 'पालि' तथा प्राकृत भाषाएँ थीं (यद्यपि बाद में महायान चरण में संस्कृत का प्रयोग हुआ), ताकि शिक्षा समाज के सभी वर्गों तक सहजता से पहुँच सके, जबकि वैदिक शिक्षा का माध्यम विशेष रूप से संस्कृत था। बौद्ध शिक्षा प्रणाली संघों और विशाल विहारों (जैसे नालंदा, वल्लभी, विक्रमशिला) में संस्थागत रूप से दी जाती थी। इसमें प्रवेश के समय 'प्रव्रज्या' (12 वर्ष की आयु तक के लिए) तथा शिक्षा समाप्ति पर 'उपसंपदा संस्कार' होता था। विहारों में निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लिए जाते थे। अतः केवल A, B और D सत्य हैं।
74
वेदांत दर्शन के प्रमुख आचार्यों और उनके दृष्टिकोणों का मिलान कीजिए: सूची-I (दार्शनिक): सूची-I: A. आदि शंकराचार्य B. रामानुजाचार्य C. मध्वाचार्य D. निम्बार्काचार्य सूची-II: 1. विशिष्टाद्वैतवादः जीव और जगत ब्रह्म के ही विशेषण हैं; चित् और अचित् ईश्वर के शरीर हैं। 2. केवलाद्वैतवादः ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः; माया अनिर्वचनीय है। 3. द्वैतवादः जीव और ईश्वर में शाश्वत और वास्तविक भेद है; पंचभेद का सिद्धांत। 4. द्वैताद्वैतवादः जीव और ब्रह्म में भेद और अभेद दोनों एक साथ सत्य हैं (भेदाभेद)।
(A) A-2, B-1, C-3, D-4
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-2, B-3, C-1, D-4
(D) A-3, B-1, C-4, D-2
📝 व्याख्या (Explanation)
अद्वैत और वैष्णव वेदांत के प्रमुख सिद्धांतों और आचार्यों का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: आदि शंकराचार्य ने 'अद्वैत वेदांत' (केवलाद्वैत) दिया जिसके अनुसार केवल परम ब्रह्म ही सत्य है, जगत माया/मिथ्या है और जीव ब्रह्म से भिन्न नहीं है। रामानुजाचार्य ने 'विशिष्ट-अद्वैत' दिया जिसके अनुसार ब्रह्म एक होते हुए भी जीव (चित्) और जगत (अचित्) रूपी विशेषणों से युक्त है। मध्वाचार्य ने 'द्वैतवाद' दिया जो ईश्वर, जीव और जगत के बीच शाश्वत भेद तथा पंचभेद स्वीकार करता है। निम्बार्काचार्य ने 'द्वैताद्वैतवाद' दिया जिसके अनुसार जीव व ब्रह्म में भेद और अभेद दोनों एक साथ प्रामाणिक हैं। अतः कूट A-2, B-1, C-3, D-4 सही है।
75
प्राचीन भारतीय शिक्षा में महिलाओं की स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: असत्य कथनों का चयन कीजिए: A. ऋग्वैदिक काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार तथा शिक्षा का पूर्ण अधिकार था। B. 'सद्योवधू' वे विदुषियाँ थीं जो आजीवन अविवाहित रहकर अध्ययन और दार्शनिक चिंतन करती थीं। C. 'ब्रह्मवादिनी' वे स्त्रियाँ थीं जो केवल विवाह पूर्व तक शिक्षा प्राप्त करती थीं। D. गार्गी, अपाला और घोषा जैसी विदुषियों का उल्लेख वैदिक ग्रंथों में मिलता है।
(A) केवल A और D
(B) केवल B और C
(C) केवल B, C और D
(D) केवल C
📝 व्याख्या (Explanation)
ऋग्वैदिक काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार का अधिकार था। 'ब्रह्मवादिनी' आजीवन अविवाहित रहकर अध्ययन करने वाली विदुषियाँ थीं, जबकि 'सद्योवधू' विवाह तक शिक्षा प्राप्त करने वाली स्त्रियाँ थीं। प्रश्न के कथन B और C में इन परिभाषाओं को परस्पर विपरीत दिया गया है, अतः ये असत्य हैं। कथन A और D सत्य हैं।
76
न्याय दर्शन की प्रमाणमीमांसा और तर्कशास्त्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों की सत्यता की जाँच कीजिए: A. महर्षि गौतम द्वारा रचित न्याय सूत्र में ज्ञान प्राप्ति के चार स्वतंत्र प्रमाण स्वीकार किए गए हैं: प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। B. न्याय दर्शन के अनुसार, 'अनुमान' में पाँच अवयव (प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहरण, उपनय, निगमन) आवश्यक होते हैं जिन्हें परार्थानुमान कहा जाता है। C. न्याय दर्शन पूर्णतः प्रगामी भौतिकवादी दर्शन है, जो ईश्वर के अस्तित्व को सिरे से नकारता है और केवल भौतिक तत्वों को सत्य मानता है। D. 'व्याप्ति' हेतु और साध्य के बीच का अपरिवर्तनीय और अविनाभावी संबंध है, जो न्याय के अनुमान का तार्किक कोर है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A और B
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
महर्षि गौतम के 'न्याय दर्शन' से संबंधित कथनों में C असत्य है। न्याय दर्शन कोई नास्तिक या केवल भौतिकवादी दर्शन नहीं है; यह एक आस्तिक और तार्किक दर्शन है जो ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करता है तथा ईश्वर को ब्रह्मांड का सनिमित्त कारण और कर्मफलदाता मानता है (भौतिकवादी/नास्तिक दर्शन चार्वाक दर्शन है)। न्याय दर्शन चार प्रमाणों (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) को मानता है। दूसरों को समझाने के लिए किए जाने वाले अनुमान (परार्थानुमान) में पंचावयव वाक्य प्रयुक्त होते हैं। 'व्याप्ति' (Invariable concomitance - जैसे जहाँ-जहाँ धुआँ है वहाँ-वहाँ अग्नि है) अनुमान का तार्किक आधार है। अतः A, B और D सही हैं।
77
योग दर्शन के 'अष्टांग योग' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. 'यम' के अंतर्गत पाँच सामाजिक-नैतिक प्रतिज्ञाएँ शामिल हैं: अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। B. 'नियम' व्यक्तिगत अनुशासन से संबंधित है जिसमें शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान आते हैं। C. यम और नियम को 'बहिरंग योग' कहा जाता है, जबकि धारणा, ध्यान और समाधि को अनिवार्य रूप से 'अंतरंग योग' की श्रेणी में रखा जाता है। D. पतंजलि के अनुसार समाधि का अर्थ केवल चेतना का पूर्ण लोप (अचेतन अवस्था) है, इसका विवेक ख्याति से कोई संबंध नहीं है।
(A) केवल B, C और D
(B) केवल A और B
(C) केवल A, B और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
महर्षि पतंजलि के 'योग सूत्र' में वर्णित अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) के संदर्भ में कथन A, B और C पूरी तरह सत्य हैं। प्रथम पाँच अंगों (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार) को बहिरंग योग तथा अंतिम तीन अंगों (धारणा, ध्यान, समाधि) को अंतरंग योग कहा जाता है। यम सामाजिक नैतिकता तथा नियम व्यक्तिगत शुद्धि का आधार हैं। परंतु कथन D असत्य है क्योंकि समाधि कोई मूर्छा या अचेतन अवस्था नहीं है, बल्कि यह चित्त की एकाग्रता की वह उच्चतम जागरूक अवस्था है जहाँ साधक को प्रकृति और पुरुष के भेद का 'विवेक ज्ञान' (विवेक ख्याति) प्राप्त होता है तथा क्लेशों का नाश होता है। अतः केवल A, B और C सत्य हैं।
78
पूर्व-मीमांसा दर्शन के कर्मकांडीय and भाषाई दर्शन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? A. कुमारिल भट्ट और प्रभाकर मिश्र ने मीमांसा दर्शन को दो भिन्न संप्रदायों में विभक्त किया, जिनके बीच ज्ञान की स्वतः प्रामाणिकता पर गहरा मतभेद था। B. मीमांसा दर्शन के अनुसार वेद 'अपौरुषेय' और नित्य हैं, और उनके शब्दों व अर्थों के बीच का संबंध भी नित्य एवं शाश्वत है।
(A) केवल A
(B) केवल B
(C) A और B दोनों
(D) न तो A और न ही B
📝 व्याख्या (Explanation)
जैमिनी द्वारा प्रतिपादित 'पूर्व-मीमांसा' दर्शन वेदों के कर्मकांड भाग पर आधारित है। इस दर्शन के संदर्भ में दोनों कथन पूरी तरह सत्य हैं। मीमांसा दर्शन वेदों को किसी मनुष्य या ईश्वर द्वारा रचित न मानकर 'अपौरुषेय' (Eternal and uncreated) तथा शाश्वत मानता है, और वेद वाक्यों के शब्द व अर्थ के संबंध को भी नित्य मानता है। बाद में आचार्य कुमारिल भट्ट (भाट्ट मीमांसा) तथा उनके शिष्य प्रभाकर मिश्र (प्राभाकर मीमांसा) ने इसके सिद्धांतों को दो अलग शाखाओं में विकसित किया। दोनों में ज्ञान के प्रामाण्य (ज्ञान की वैधता) तथा ख्यातिवाद (भ्रम के सिद्धांत) को लेकर महत्वपूर्ण दार्शनिक अंतर थे। अतः दोनों कथन सत्य हैं।
79
जैन दर्शन के अनेकांतवाद और स्यादवाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का परीक्षण कीजिए: A. 'अनेकांतवाद' वस्तु के अनंत धर्मात्मक स्वरूप को स्वीकार करने वाला तत्वमीमांसीय सिद्धांत है, जो किसी भी एकांतिक दृष्टिकोण का खंडन करता है। B. 'स्यादवाद' या 'सप्तभंगी नय' अनेकांतवाद का ही भाषाई और तार्किक रूप है, जो सत्य की सापेक्ष अभिव्यक्ति के लिए सात प्रकार के कथनों का विधान करता है। C. स्यादवाद का अर्थ 'शायद' या संशयवाद है, जो यह मानता है कि पूर्ण सत्य कभी भी जाना ही नहीं जा सकता। D. यह दर्शन ज्ञान के आंशिक रूपों को 'नय' कहता है और सातवें स्तर पर 'स्यात् अवक्तव्यम् च' जैसे तार्किक पदों का प्रयोग करता है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
जैन दर्शन के ज्ञानमीमांसा के सिद्धांत 'अनेकांतवाद' और 'स्यादवाद' के संदर्भ में कथन C असत्य है। स्यादवाद का अर्थ अनिश्चितता या घोर संशयवाद (Skepticism) बिल्कुल नहीं है; 'स्यात्' शब्द का अर्थ संशय 'शायद' न होकर सापेक्षता (Relative/In some respect) से है। जैन दर्शन मानता है कि केवल केवलज्ञानी (सर्वज्ञ) ही पूर्ण सत्य जान सकते हैं, जबकि सामान्य जीव वस्तु के केवल आंशिक पहलू (नय) को देख पाते हैं। इसलिए किसी भी दृष्टिकोण को व्यक्त करते समय सापेक्षता सूचक सात कथनों (सप्तभंगी नय- जैसे स्यात् अस्ति, स्यात् नास्ति आदि) का प्रयोग किया जाता है ताकि एकांगी सत्य का भ्रम न हो। अतः कथन A, B और D सही हैं।
80
प्राचीन शास्त्रसम्मत आठ प्रकार के विवाहों और उनके स्वरूप का मिलान कीजिए: सूची-I (विवाह का प्रकार): सूची-I: A. ब्रह्म विवाह B. दैव विवाह C. आर्ष विवाह D. प्राजापत्य विवाह सूची-II: 1. कन्या के पिता द्वारा वर से एक जोड़ी गाय और बैल लेकर धर्म संपादन हेतु कन्या दान करना (आर्ष परंपरा)। 2. विधिवत अनुष्ठान करने वाले पुरोहित (यज्ञकर्ता ऋषि) के साथ कन्या का विवाह कर देना। 3. वेदज्ञ और सदाचारी वर को स्वयं आमंत्रित कर वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित कन्या को बिना कोई मूल्य लिए सौंपना। 4. वर-कन्या को "तुम दोनों साथ मिलकर सामाजिक-धार्मिक कर्तव्यों का पालन करो" का आदेश देकर किया गया विवाह।
(A) A-4, B-2, C-1, D-3
(B) A-1, B-2, C-3, D-4
(C) A-3, B-1, C-2, D-4
(D) A-3, B-2, C-1, D-4
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन धर्मशास्त्रों (जैसे मनुस्मृति) में वर्णित 8 प्रकार के विवाहों में प्रथम चार को प्रशस्त/उत्तम माना गया है, जिनका सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: 'ब्रह्म विवाह' सबसे उत्तम विवाह माना गया है जिसमें पिता वेदज्ञ और सदाचारी वर को अपने घर बुलाकर अलंकृत कन्या का दान बिना किसी मूल्य के करता है। 'दैव विवाह' में यज्ञ अनुष्ठान को विधिपूर्वक संपन्न करने वाले ऋत्विक/पुरोहित को कन्या दान में दी जाती थी। 'आर्ष विवाह' में धर्म कार्य हेतु वर पक्ष से एक जोड़ी गाय-बैल स्वीकार करके कन्या दी जाती थी। 'प्राजापत्य विवाह' में वर-कन्या को साथ मिलकर धर्म का आचरण करने का उपदेश देकर विवाह किया जाता था। अतः सही कूट A-3, B-2, C-1, D-4 है।
81
मौर्यकालीन कला, स्थापत्य एवं अशोक के स्तंभों की विनिर्माण तकनीक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अशोक के एकाश्मक स्तंभों के निर्माण में चुनार और मथुरा के बलुआ पत्थरों का उपयोग किया गया था, जिन्हें विभिन्न टुकड़ों में जोड़कर एक ऊंचे लाट (Shaft) का रूप दिया जाता था। B. मौर्यकालीन मूर्तिकला और स्तंभों की सबसे विशिष्ट तकनीकी विशेषता उनकी 'उत्कृष्ट चमकदार पॉलिश' है, जो ग्रीक-एकेमेनियन प्रभाव से पूरी तरह मुक्त एक स्वदेशी तकनीक थी। C. दीदारगंज से प्राप्त प्रसिद्ध 'चामर-धारिणी' (यक्षी की मूर्ति) मौर्यकालीन दरबारी कला के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में पहचानी जाती है, जिसका निर्माण शाही महलों की शोभा बढ़ाने हेतु किया गया था। D. अशोक के स्तंभों के शीर्ष पर स्थित पशु आकृतियों में 'घोड़ा' (अश्व) गतिशीलता और बुद्ध के गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण) का प्रतीक है, जिसे सारनाथ के सिंह शीर्ष चक्र के आधार पर भी उत्कीर्ण किया गया है। E. बराबर की पहाड़ियों में स्थित 'लोमश ऋषि गुफा' का प्रवेश द्वार काष्ठ वास्तुकला की तर्ज पर बनाया गया है, जो मौर्य काल में आजीवक संप्रदाय को दान की गई चट्टान-कटौती वास्तुकला का प्रारंभिक रूप है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, D और E
(C) केवल D और E
(D) A, B, C, D और E सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मौर्य कला के संदर्भ में कथन D और E सत्य हैं। अशोक के स्तंभों पर बने पशु प्रतीक बुद्ध के जीवन से जुड़े हैं (घोड़ा महाभिनिष्क्रमण/गृहत्याग का प्रतीक है और सारनाथ सिंह शीर्ष की अष्टकोणीय चौकी पर अंकित है)। लोमश ऋषि गुफा (बराबर पहाड़ियाँ) आजीवक संप्रदाय को दी गई प्रारंभिक रॉक-कट गुफा है जिसका मेहराबनुमा प्रवेश द्वार लकड़ी की वास्तुकला की नकल पर तराशा गया है। परंतु कथन A गलत है क्योंकि अशोक के स्तंभ कई टुकड़ों को जोड़कर नहीं, बल्कि 'एक ही पत्थर' से (एकाश्म/Monolithic) बने हैं। कथन B गलत है क्योंकि चमकदार पॉलिश पर ईरानी/एकेमेनियन प्रभाव को लेकर विवाद है। कथन C गलत है क्योंकि यक्षी मूर्तियाँ लोक कला की प्रतीक हैं। अतः केवल D और E सत्य हैं।
82
गांधार, मथुरा और अमरावती मूर्तिकला शैलियों के वैचारिक एवं संरचनात्मक भेदों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का विश्लेषण कीजिए: A. गांधार शैली मुख्य रूप से 'यूनानी-रोमन' (Greco-Roman) कला तकनीकों से प्रभावित थी, जिसमें बुद्ध को घुंघराले बालों, मूंछों और रोमन टोगा जैसी सलवटों वाले वस्त्रों के साथ यथार्थवादी रूप में दिखाया गया। B. मथुरा कला शैली पूर्णतः स्वदेशी थी, जिसमें केवल बौद्ध धर्म की मूर्तियों का निर्माण किया गया, जबकि गांधार शैली में हिंदू और जैन संप्रदायों की मूर्तियां भी प्रचुर मात्रा में बनाई गईं। C. अमरावती शैली में मूर्तियों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से सफेद संगमरमर जैसे चूना पत्थर का उपयोग किया गया था और यह शैली व्यक्तिगत मूर्तियों के बजाय 'आख्यान कला' (Narrative Art) या कथा-पट्टिकाओं पर केंद्रित थी। D. मथुरा शैली की मूर्तियों में चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर (Spotted Red Sandstone) का उपयोग हुआ और यहाँ बुद्ध की प्रारंभिक मूर्तियों में उन्हें आध्यात्मिक शांत मुद्रा के बजाय अत्यधिक ऊर्जस्वित और 'यक्ष' जैसी शारीरिक दृढ़ता के साथ उकेरा गया। E. कनिष्क के शासनकाल के दौरान गांधार और अमरावती दोनों शैलियों को समान रूप से राजकीय संरक्षण प्राप्त हुआ, जबकि कुषाणों का मथुरा शैली से कोई सीधा संबंध नहीं था।
(A) केवल A, B और E
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, C, D और E
📝 व्याख्या (Explanation)
मूर्तिकला की तीनों प्रमुख प्राचीन शैलियों के संदर्भ में कथन A, C और D सत्य हैं। गांधार शैली (उत्तर-पश्चिम) पर ग्रीको-रोमन प्रभाव था जिसमें बुद्ध को यूनानी देवता अपोलो जैसा बनाया गया। अमरावती शैली (सातवाहन संरक्षण) में सफेद संगमरमर जैसे चूना पत्थर पर बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं के 'आख्यान चित्र' बनाए गए। मथुरा शैली में सीकरी के चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ और बुद्ध को बलिष्ठ यक्ष रूप में बनाया गया। परंतु कथन B असत्य है क्योंकि मथुरा शैली में बौद्ध के साथ-साथ हिंदू (विष्णु, शिव) व जैन (तीर्थंकर) मूर्तियां भी बनीं। कथन E असत्य है क्योंकि कुषाणों का मुख्य केंद्र मथुरा और गांधार था, अमरावती सातवाहनों से संरक्षित थी। अतः A, C और D सही हैं।
83
अजंता और एलोरा की गुफाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अजंता की गुफाएं पूरी तरह से बौद्ध धर्म को समर्पित हैं, जिनमें हीनयान और महायान दोनों चरणों का प्रतिनिधित्व मिलता है, और यहाँ भित्ति चित्रकला की उन्नत तकनीक का प्रयोग हुआ है। B. एलोरा की गुफाएं धार्मिक बहुलवाद का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जहाँ बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से संबंधित कुल 34 गुफाएं एक ही कालखंड में राष्ट्रकूटों द्वारा निर्मित की गई। C. अजंता के चित्रों की विनिर्माण तकनीक में चट्टान की सतह पर मिट्टी, गोबर और भूसे के मिश्रण का लेप लगाकर उस पर चूने का प्लास्टर चढ़ाया जाता था और गीले प्लास्टर पर ही रंग लगाए जाते थे। D. एलोरा का प्रसिद्ध 'कैलाशनाथ मंदिर' (गुफा संख्या 16) वास्तुकला के इतिहास में अद्वितीय है क्योंकि इसे नीचे से ऊपर की ओर जोड़ने के बजाय, एक ही विशाल चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर तराशकर बनाया गया है। E. अजंता की गुफाओं को मुख्य रूप से वाकाटक राजाओं और सातवाहनों का संरक्षण प्राप्त हुआ, जबकि एलोरा में राष्ट्रकूट और यादव शासकों की भूमिका प्रमुख थी।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल B, C और E
(C) केवल A, D और E
(D) केवल A, C, D और E
📝 व्याख्या (Explanation)
अजंता और एलोरा गुफा परिसरों (महाराष्ट्र) के संबंध में कथन A, D और E सही हैं। अजंता की सभी 29 गुफाएँ केवल बौद्ध धर्म से संबंधित हैं (वाकाटक व सातवाहन काल)। एलोरा का कैलाश मंदिर (गुफा 16, राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम द्वारा निर्मित) एकाश्म चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर (Top-down monolithic) तराशने की अद्भुत मिसाल है। परंतु कथन B असत्य है क्योंकि एलोरा की 34 गुफाएँ (1-12 बौद्ध, 13-29 हिंदू, 30-34 जैन) एक ही कालखंड में नहीं बल्कि 5वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य अलग-अलग समय पर बनीं। कथन C असत्य है क्योंकि अजंता में फ्रेशको (गीले प्लास्टर) के बजाय 'टेम्परा' (सुखे प्लास्टर) विधि का प्रयोग हुआ था। अतः A, D और E सही हैं।
84
गुप्तकालीन एवं प्रारंभिक मध्यकालीन मंदिर स्थापत्य शैलियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. गुप्त काल को भारतीय मंदिर वास्तुकला का 'क्लासिक युग' माना जाता है, जहाँ प्रारंभिक मंदिर सपाट छत वाले और बिना शिखर के होते थे, जैसे सांची का मंदिर संख्या 17। B. देवगढ़ का 'दशावतार मंदिर' पंचायतन शैली का प्रारंभिक उदाहरण है, जिसमें एक मुख्य ऊंचे चबूतरे पर केंद्रीय मंदिर के साथ चार कोने पर चार सहायक मंदिर स्थित हैं और इसमें एक प्रारंभिक लघु शिखर भी मौजूद है। C. मंदिर वास्तुकला की 'नागर शैली' में गर्भगृह के ठीक ऊपर निर्मित होने वाले शिखर को 'रेखा-प्रसाद' या 'लैटिना' प्रकार कहा जाता है, जिसकी परिणति शीर्ष पर एक वर्गाकार आमलक और कलश में होती है। D. गुप्तकालीन मंदिरों की एक प्रमुख पहचान गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौखट पर 'गंगा और यमुना' नदी देवियों की मूर्तियों का अंकन है, जो पवित्रता के प्रतीक स्वरूप उकेरी जाती थीं। E. भीतरगाँव (कानपुर) का प्रसिद्ध गुप्तकालीन मंदिर पूरी तरह से पत्थरों को तराशकर बनाया गया है, जो अपनी सुदृढ़ पत्थर की नक्काशी के लिए जाना जाता है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल B, C और E
(C) केवल A, C, D और E
(D) A, B, C, D और E सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
गुप्तकालीन मंदिर स्थापत्य कला के संदर्भ में कथन A, B और D सत्य हैं। सांची का मंदिर 17 प्रारंभिक सपाट छत वाला गुप्त मंदिर है। देवगढ़ का दशावतार मंदिर पंचायतन शैली और लघु शिखर युक्त प्रथम मंदिर है। प्रवेश द्वार पर मकरवाहिनी गंगा और कछपवाहिनी यमुना की प्रतिमाएं गुप्त मंदिरों की मुख्य पहचान हैं। परंतु कथन C में आमलक वर्गाकार न होकर 'वृत्ताकार' (Circular disc) होता है। कथन E असत्य है क्योंकि कानपुर स्थित भीतरगाँव का प्रसिद्ध गुप्त मंदिर पत्थरों का नहीं, बल्कि पूरी तरह 'पकी हुई ईंटों' (Terracotta/Bricks) से बना भारत का सबसे प्राचीन ईंटों का मंदिर है। अतः केवल A, B और D सत्य हैं।
85
दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य की 'द्रविड़ शैली' और पल्लव-चोल शासकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. पल्लव वास्तुकला का विकास चार शैलियों- महेंद्र शैली, मामल्ल शैली, राजसिंह शैली और नंदीवर्मन शैली के रूप में क्रमिक रूप से हुआ। B. महाबलिपुरम के पंच रथ मंदिरों में 'द्रौपदी रथ' सबसे बड़ा और विस्तृत नक्काशी वाला पिरामिडाकार रथ है, जबकि 'धर्मराज रथ' सबसे छोटा और साधारण झोपड़ीनुमा है। C. चोल मंदिर वास्तुकला की मुख्य विशेषता गर्भगृह के ऊपर स्थित 'विमान' (Vimana) है, जो नागर शैली के विपरीत कई मंजिलों वाले पिरामिड के रूप में ऊपर की ओर संकुचित होता जाता है। D. तंजौर का प्रसिद्ध 'बृहदेश्वर मंदिर' राजा राजराज चोल प्रथम द्वारा बनवाया गया था, जिसके मुख्य प्रवेश द्वार के विशाल द्वारों को 'गोपुरम' कहा जाता है। E. चोल काल की सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक उपलब्धि 'कांस्य मूर्तिकला' थी, जिसे 'लुप्त मोम विधि' (Lost-wax process) से बनाया जाता था, जिसका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण 'नटराज' की चतुर्भुज मूर्ति है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, C, D और E
(C) केवल B, C और E
(D) A, B, C, D और E सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
द्रविड़ स्थापत्य कला के विकास में कथन A, C, D और E सत्य हैं। पल्लवों ने चार शैलियों में स्थापत्य का विकास किया। चोल मंदिरों में गर्भगृह पर बना 'विमान' बहुमंजिला पिरामिडाकार होता था। राजराज प्रथम का तंजौर बृहदेश्वर मंदिर (1010 ई.) द्रविड़ शैली का चरमोत्कर्ष है जिसमें गोपुरम बने हैं। चोल कांस्य नटराज प्रतिमाएं ढलाई की 'लुप्त मोम विधि' (Cire perdue) से बनी विश्व प्रसिद्ध कृतियां हैं। परंतु कथन B असत्य है क्योंकि महाबलिपुरम के रथों में 'धर्मराज रथ' सबसे बड़ा और पिरामिडाकार है, जबकि 'द्रौपदी रथ' सबसे छोटा और साधारण झोपड़ी (कुटीर) के आकार का है। अतः केवल A, C, D और E सत्य हैं।
86
विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक एवं सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. 'नायनकर व्यवस्था' के तहत नायकों को राजा द्वारा 'अमरम' (भूमि) प्रदान की जाती थी, जिसके बदले उन्हें एक निश्चित सैन्य दल रखना पड़ता था और वे इस भूमि के पूर्णतः वंशानुगत स्वामी होते थे जिन पर राजा का कोई नियंत्रण नहीं था। B. 'आयगर व्यवस्था' के अंतर्गत ग्रामीण प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए 12 अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी, जिन्हें उनके कार्यों के बदले कर-मुक्त भूमि दी जाती थी। C. राजा कृष्णदेवराय के शासनकाल में केंद्रीय नियंत्रण को सुदृढ़ करने के लिए 'चोल' प्रशासनिक मॉडल की स्वायत्तता को और अधिक विस्तारित किया गया। D. साम्राज्य की सैन्य व्यवस्था में 'कंदाचार' विभाग विशेष रूप से नौसेना और तटीय किलाबंदी की देखरेख करता था। E. विजयनगर के शासकों ने बहमनी सुल्तानों के विपरीत, अपनी सेना में मुस्लिम घुड़सवारों और तीरंदाजों को शामिल करने से पूरी तरह परहेज किया।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल B, C और E
(C) केवल A, C, D और E
(D) A, B, C, D और E सभी (या असत्य कथनों का चयन)
📝 व्याख्या (Explanation)
विजयनगर साम्राज्य के संबंध में असत्य कथनों का चयन करने पर A, C, D और E असत्य हैं। नायनकर व्यवस्था में 'अमरम' पाने वाले नायक स्वतंत्र स्वामी नहीं थे; राजा उन्हें कभी भी पदच्युत या स्थानांतरित कर सकता था। विजयनगर काल में चोलों की प्राचीन स्वायत्त ग्रामीण संस्थाएं (उर व सभा) कमजोर हो गईं और केंद्रीय नियंत्रण बढ़ा। 'कंदाचार' विजयनगर का 'सैन्य विभाग/थल सेना' था, न कि केवल नौसेना। देवराय द्वितीय तथा कृष्णदेवराय ने बड़ी संख्या में मुस्लिम धनुर्धरों और घुड़सवारों को अपनी सेना में भर्ती किया था और मस्जिदें भी बनवाई थीं। केवल कथन B (आयगर व्यवस्था में 12 ग्रामीण अधिकारी) सत्य है।
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विजयनगर कालीन आर्थिक संरचना, कर प्रणाली और विदेशी व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. 'शिष्ट' (Shista) विजयनगर साम्राज्य का मुख्य भूमि कर था, जो आमतौर पर कुल उपज का 1/6 भाग होता था, परंतु राजा कृष्णदेवराय ने इसे बढ़ाकर स्थायी रूप से 1/2 कर दिया था। B. विजयनगर काल में विवाह कर एक प्रमुख सामाजिक-आर्थिक कर था, जिसे कृष्णदेवराय ने बाद में जन-कल्याण के उद्देश्य से पूरी तरह समाप्त कर दिया था। C. पुर्तगाली यात्री फर्नाओ नुनिज़ के अनुसार, विजयनगर का आंतरिक व्यापार पूरी तरह से वस्तु-विनिमय पर आधारित था और वहां सिक्कों का प्रचलन नहीं था। D. 'वराह' विजयनगर साम्राज्य का प्रसिद्ध स्वर्ण सिक्का था, जिस पर विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं जैसे बालकृष्ण, वेंकटेश्वर और गरुड़ की आकृतियां अंकित होती थीं। E. विजयनगर के बंदरगाहों पर आयात होने वाली वस्तुओं में अरब देशों से आने वाले घोड़े सबसे प्रमुख थे, जिन पर राजा का एकाधिकार था।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, D और E
(C) केवल A, D और E
(D) A, B, C, D और E सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
विजयनगर साम्राज्य के आर्थिक जीवन में कथन B, D और E सत्य हैं। विजयनगर में विवाह कर (बरम) वर और वधू दोनों पक्षों से लिया जाता था जिसे कृष्णदेवराय तथा अमुकमाल्यदा के संदर्भों में जनहित में माफ कर दिया गया था। 'वराह' (या पगोडा) विजयनगर का मानक स्वर्ण सिक्का था जिस पर विष्णु, गरुड़, उमा-महेश्वर व बालकृष्ण उकेरे होते थे। अरबी व पुर्तगाली घोड़ों का आयात विजयनगर सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। परंतु कथन A असत्य है क्योंकि भू-राजस्व (शिष्ट) सामान्यतः 1/6 से 1/3 के बीच था, इसे कृष्णदेवराय ने 1/2 नहीं किया। कथन C असत्य है क्योंकि विजयनगर में वृहद स्तर पर स्वर्ण, चांदी व तांबे के सिक्कों का प्रचलन था। अतः B, D और E सत्य हैं।
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विजयनगर साम्राज्य की सांस्कृतिक एवं वास्तुकला संबंधी उपलब्धियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. विजयनगर वास्तुकला शैली में चोल, पांड्य और चालुक्य शैलियों का मिश्रण देखने को मिलता है, जिसमें 'कल्याण मंडप' और 'अम्मन सन्नधि' का निर्माण इस शैली की अनूठी विशेषता थी। B. हम्पी का प्रसिद्ध 'विठ्ठलस्वामी मंदिर' राजा हरिहर द्वितीय द्वारा बनवाया गया था, जो अपने 56 नक्काशीदार संगीतमय स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है। C. विजयनगर कालीन मंदिरों में स्तंभों पर सबसे अधिक उत्कीर्ण किया जाने वाला पशु 'सर्कस का हाथी' था, जो राजा की सैन्य शक्ति का प्रतीक माना जाता था। D. 'हजारा राम मंदिर' का निर्माण केवल राजा और उनके शाही परिवार के निजी उपयोग के लिए किया गया था, जिसकी दीवारों पर रामायण के दृश्य उत्कीर्ण हैं। E. विजयनगर काल में धर्मनिरपेक्ष वास्तुकला के उदाहरण के रूप में 'लोटस महल' और 'गजशाला' (Elephant Stables) में इस्लामी मेहराबों और गुंबदों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
(A) केवल A, D और E
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, B और E
(D) A, B, C, D और E सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
विजयनगर कला और स्थापत्य कला के संदर्भ में कथन A, D और E सत्य हैं। विजयनगर शैली में मंदिरों के परिसर में देवताओं के विवाह उत्सव हेतु 'कल्याण मंडप' तथा मुख्य देवी के लिए 'अम्मन सन्नधि' अनिवार्य अंग बने। 'हजारा राम मंदिर' (कृष्णदेवराय द्वारा निर्मित) राजा का निजी मंदिर था जिसकी दीवारों पर रामायण के चित्र तराशे गए हैं। लोटस महल व गजशाला में इंडो-इस्लामिक शैली के मेहराब हैं। परंतु कथन B असत्य है क्योंकि विट्ठलस्वामी मंदिर का निर्माण मुख्य रूप से राजा कृष्णदेवराय (तुलुव वंश) द्वारा करवाया गया था (न कि हरिहर द्वितीय द्वारा)। कथन C असत्य है क्योंकि स्तंभों पर सबसे अधिक उकेरा जाने वाला पशु 'घोड़ा' (या काल्पनिक पशु याली/Yali) था, न कि हाथी। अतः A, D और E सत्य हैं।
89
आजीवक संप्रदाय के इतिहास, सिद्धांतों एवं राजकीय संरक्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में मक्खलि गोशाल और महावीर स्वामी के शुरुआती छह वर्षों के साथ के प्रवास और बाद के वैचारिक मतभेदों का विस्तृत विवरण मिलता है। B. बौद्ध ग्रंथ 'सामञ्जफल सुत्त' में राजा अजातशत्रु और मक्खलि गोशाल के बीच हुए संवाद का वर्णन है, जहां गोशाल के सिद्धांतों को 'नियतिवाद' (नियति/भाग्य ही सर्वोच्च है) कहा गया है। C. मौर्य सम्राट अशोक और उनके पौत्र दशरथ दोनों ने आजीवक संप्रदाय के तपस्वियों के लिए गया (बिहार) के निकट क्रमशः बराबर और नागार्जुन की पहाड़ियों में गुफाओं का निर्माण करवाया था। D. दक्षिण भारत में, विशेषकर चोल और होयसल काल के दौरान, आजीवकों पर 'आजीविका-कासु' नाम का एक विशेष कर लगाया जाता था। E. महावंश के अनुसार, श्रीलंका के राजा पाण्डुकाभय ने अनुराधापुर में आजीवकों के लिए विशेष रूप से मठों का निर्माण करवाया था।
(A) केवल A, C और E
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, B, C और D
(D) A, B, C, D और E सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
प्राचीन आजीवक संप्रदाय (स्थापक मक्खलि गोशाल) के इतिहास और प्रसार के संबंध में सभी पाँचों कथन (A, B, C, D, E) ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह सत्य हैं। भगवती सूत्र में महावीर व गोशाल के संबंधों का उल्लेख है। सामञ्जफल सुत्त में अजातशत्रु के समक्ष गोशाल के अहेतुवाद/नियतिवाद (Determinism) का वर्णन है जिसके अनुसार मनुष्य के सुख-दुख नियति द्वारा पूर्व निर्धारित हैं। अशोक (बराबर में कर्ण चौपार, सुदामा गुफा) व दशरथ (नागार्जुन में गोपी गुफा) ने आजीवकों को गुफाएं दान दी थीं। दक्षिण भारत में उन पर 'आजीविका-कासु' कर लगाया जाता था और श्रीलंका के महावंश में राजा पांडुकाभय द्वारा उनके लिए अनुराधापुर में आवास बनाने का उल्लेख है।
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मुगल वास्तुकला के क्रमिक विकास और उसमें शैलीगत संश्लेषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. हुमायूं का मकबरा भारतीय उपमहाद्वीप में 'चारबाग पद्धति' और 'द्वि-गुंबद' (Double Dome) का प्रथम पूर्ण विकसित उदाहरण है, जो ईरानी शिल्पकार मीरक मिर्जा गियास की देन था। B. अकबर कालीन वास्तुकला में लाल बलुआ पत्थर का आधिक्य है, जहाँ महलों के आंतरिक शहतीरों में राजपूत कालीन 'टोडा पद्धति' (Bracket system) का व्यापक प्रयोग दिखाई देता है। C. जहाँगीर के शासनकाल में पूर्णतः संगमरमर से निर्मित इतमाद-उद-दौला का मकबरा पहला ऐसा स्मारक था जिसमें 'पिट्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) पच्चीकारी तकनीक का सूत्रपात हुआ। D. शाहजहाँ ने संगमरमर के उपयोग के साथ-साथ वास्तुकला में नुकीले महराबों के स्थान पर 'बहु-पात्रीय महराबों' (Cusped Arches) को प्रतिस्थापित किया।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल वास्तुकला के ऐतिहासिक विकासक्रम में चारों कथन (A, B, C, D) पूरी तरह सत्य हैं। हुमायूँ का मकबरा (1570 ई.) चारबाग शैली और दोहरे गुंबद की पहली ऐतिहासिक इमारत है। अकबर के समय (फतेहपुर सीकरी व आगरा किला) लाल बलुआ पत्थर और राजपूत शैली के ब्रैकेट/टोडा प्रणाली का समन्वय हुआ। जहांगीर काल में नूरजहाँ द्वारा निर्मित उसके पिता इतमाद-उद-दौला का मकबरा (आगरा) पूरी तरह संगमरमर से बनी पहली इमारत थी जिसमें पहली बार संगमरमर में कीमती पत्थरों की पच्चीकारी (पिट्रा ड्यूरा) की गई। शाहजहां ने बहुपात्रीय/दांतेदार मेहराबों और संगमरमर के अतिशय प्रयोग को अपनी पहचान बनाया। अतः सभी कथन सत्य हैं।
91
मुगल चित्रकला के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. हुमायूं द्वारा फारस से लाए गए चित्रकार मीर सैयद अली और अब्दुस समद मुख्य रूप से सफवी शैली के प्रतिनिधि थे, जिसमें द्वि-आयामी (Two-dimensional) आलेखन की प्रधानता थी। B. अकबर के काल में 'हमजानामा' का चित्रांकन मुगल चित्रशाला की पहली विशाल परियोजना थी, जिसमें भारतीय रंगों (जैसे सिंदूर और लाजवर्द) के समावेश से एक नई समन्वित शैली का जन्म हुआ। C. जहाँगीर कालीन चित्रकला में यूरोपीय प्रभाव के तहत 'जियोस्कोरो' (प्रकाश और छाया का प्रभाव) और 'परिप्रेक्ष्य' (Perspective) का सूक्ष्म प्रयोग आरंभ हुआ, जिससे चित्रों में त्रि-आयामी (Three-dimensional) गहराई आई। D. शाहजहाँ के काल में राजकीय चित्रों की विधा में चेहरों के पीछे 'प्रभामंडल' (Halo) बनाने की प्रथा पूरी तरह समाप्त कर दी गई क्योंकि सूफीवाद का प्रभाव कम हो रहा था।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल चित्रकला के विकासक्रम के संदर्भ में कथन A, B और C पूरी तरह सत्य हैं। हुमायूँ फारस (ईरान) से मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुस समद को लाया जो सफवी शैली के सिद्धहस्त चित्रकार थे। अकबर के काल में दास्तान-ए-अमीर हमज़ा (हमजानामा) का चित्रांकन हुआ जो सूती कपड़े पर बनाया गया पहला बड़ा काम था और इसमें भारतीय रंगों का प्रयोग हुआ। जहांगीर के काल में यूरोपीय चित्रों के प्रभाव से छाया-प्रकाश (Chiaroscuro) और परिप्रेक्ष्य के माध्यम से चित्रों में त्रि-आयामी (3D) प्रभाव उत्पन्न किया जाने लगा। परंतु कथन D असत्य है क्योंकि शाहजहाँ के काल में भी चेहरों के पीछे दिव्य प्रभामंडल (Halo/आभामंडल) बनाने की परंपरा जारी रही, जो शासक की अलौकिक प्रतिष्ठा दर्शाती थी।
92
मुगलकालीन अनुवाद विभाग और साहित्यिक परियोजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अकबर ने 'मक्ताब खाना' (अनुवाद विभाग) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम समुदायों के मध्य दार्शनिक और सांस्कृतिक खाई को पाटना था। B. महाभारत का फारसी अनुवाद 'रज़्मनामा' (युद्धों की पुस्तक) के नाम से अब्दुल कादिर बदायूँनी, नक़ीब खान और फ़ैज़ी के संयुक्त प्रयासों से संपन्न हुआ। C. अथर्ववेद का फारसी अनुवाद पूर्णतः अब्दुर्रहीम खान-ए-ख़ाना द्वारा किया गया था, जो तुर्की भाषा के भी प्रकांड विद्वान थे। D. दारा शिकोह ने उपनिषदों का फारसी अनुवाद 'सिर्र-ए-अकबर' (महान रहस्य) के नाम से किया, जिसमें उन्होंने उपनिषदों को कुरान में वर्णित 'किताब अल-मकनूं' के रूप में प्रतिपादित किया।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगलों की अनुवाद नीति और साहित्यिक गतिविधियों में कथन A, B और D ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं। अकबर ने फतेहपुर सीकरी में 'मक्ताब खाना' स्थापित किया। महाभारत का फारसी अनुवाद 'रज़्मनामा' (Book of Wars) नाम से बदायूँनी, नकीब खाँ, हाजी इब्राहिम सरहिंदी आदि ने मिलकर किया था। दारा शिकोह (शाहजहां का सबसे बड़ा पुत्र) ने 52 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद 'सिर्र-ए-अकबर' नाम से किया था। परंतु कथन C असत्य है क्योंकि अथर्ववेद का फारसी अनुवाद मुख्यतः हाजी इब्राहिम सरहिंदी (और बाद में बदायूँनी) द्वारा शुरू/संपन्न किया गया था, न कि अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना द्वारा। खान-ए-खाना ने बाबरनामा का तुर्की से फारसी में अनुवाद किया था। अतः A, B और D सही हैं।
93
मुगल वास्तुकला के उत्तरकालीन चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. शाहजहाँ का स्थापत्य 'शाहजहानी संप्रदाय' के रूप में जाना जाता है, जिसमें समरूपता (Symmetry), नौबत-शास्त्रीय संतुलन और विलासिता का समन्वय है। B. औरंगज़ेब के काल में शाही खजाने पर वित्तीय दबाव और शरीयत के कड़े नियमों के कारण भव्य वास्तुकला का ह्रास हुआ, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण लाहौर की 'बादशाही मस्जिद' की सादगी है। C. औरंगज़ेब द्वारा निर्मित औरंगाबाद का 'रबिया-उद-दौरानी का मकबरा' (बीबी का मकबरा) ताज महल की वास्तुकला की हूबहू और अधिक परिष्कृत प्रतिकृति माना जाता है। D. दिल्ली के लाल किले के भीतर 'मोती मस्जिद' का निर्माण औरंगज़ेब ने अपनी व्यक्तिगत प्रार्थनाओं के लिए पूर्णतः सफेद संगमरमर से करवाया था, जो आंतरिक अलंकरण की दृष्टि से उत्कृष्ट है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A और D
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
उत्तरकालीन मुगल वास्तुकला के संदर्भ में कथन A, B और D सत्य हैं। शाहजहाँ का काल मुगल वास्तुकला का चरम काल था जहाँ सममिति और भव्यता का संतुलन था। औरंगजेब के धार्मिक कड़े दृष्टिकोण और युद्धों के कारण विशाल निर्माण रुक गए; हालाँकि उसने लाहौर की बादशाही मस्जिद और दिल्ली के लाल किले में 'मोती मस्जिद' (सफेद संगमरमर से) बनवाई थी। परंतु कथन C असत्य है क्योंकि औरंगाबाद में औरंगजेब द्वारा अपनी बेगम राबिया-उद-दौरानी की याद में बनवाया गया 'बीबी का मकबरा' ताज महल की परिष्कृत नहीं, बल्कि एक 'कुहड़ या घटिया नकल' (Poor replica/ताजमहाल की फुहड़ नकल) मानी जाती है क्योंकि इसमें ताज महल की जैसी नफासत और आनुपातिक सुंदरता नहीं है। अतः A, B और D सही हैं।
94
औरंगजेब और संगीत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. औरंगज़ेब ने रूढ़िवादी धार्मिक दृष्टिकोण के कारण दरबार में शाही संगीतज्ञों को बर्खास्त कर दिया था और सार्वजनिक संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। B. इतिहासकार ख़ाफ़ी ख़ान के अनुसार, जब संगीतज्ञों ने संगीत का 'जनाज़ा' निकाला, तो औरंगज़ेब ने व्यंग्यपूर्वक कहा कि "इसकी कब्र इतनी गहरी खोदना कि कोई आवाज़ बाहर न आ सके।" C. विरोधाभास यह है कि मध्यकालीन भारत में फारसी भाषा में शास्त्रीय संगीत पर सर्वाधिक ग्रंथों की रचना औरंगज़ेब के ही शासनकाल में हुई। D. औरंगज़ेब स्वयं एक कुशल वीणा वादक था और उसने अपने हरम (Zenana) के भीतर संगीत के जारी रहने पर कोई आपत्ति नहीं की।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल सम्राट औरंगजेब और संगीत के संबंधों के विषय में चारों कथन (A, B, C, D) ऐतिहासिक रूप से प्रामाणिक और सत्य हैं। औरंगजेब ने अपने शासनकाल के 10वें वर्ष (1668 ई.) में धार्मिक कट्टरता के कारण दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया तथा शाही गायकों व वादकों को छुट्टी दे दी। जब संगीतकारों ने विरोधस्वरूप दिल्ली में रोते हुए संगीत का जनाजा निकाला, तो औरंगजेब ने कहा कि "इसे इतनी गहराई में दफनाया जाए कि कोई स्वर पुन: न उभरे।" परंतु यह भी ऐतिहासिक सत्य है कि औरंगजेब स्वयं एक सिद्धहस्त 'वीणा वादक' था, हरम में संगीत जारी रहा और उसके काल में भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फारसी में सबसे अधिक पुस्तकें लिखी गईं (जैसे फ़कीरुल्लाह की राग दर्पण)।
95
मुगलकालीन ऐतिहासिक ग्रंथों और आत्मकथाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अबुल फ़ज़ल की 'अकबरनामा' (विशेषकर आइन-ए-अकबर) केवल एक इतिहास ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह अकबर को सूफी सिद्धांत 'इशराक़ी' के तहत 'फ़र-ए-इज़दी' (ईश्वरीय प्रकाश) के रूप में स्थापित करने का दार्शनिक प्रयास है। B. अब्दुल कादिर बदायूँनी की 'मुंतखब-उत-तवारीख' गुप्त रूप से लिखी गई थी, जिसमें अकबर की उदारवादी धार्मिक नीतियों और 'दीन-ए-इलाही' की तीव्र रूढ़िवादी आलोचना की गई है। C. जहाँगीर की आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' पूरी तरह से बख्शी मोतमद ख़ान द्वारा लिखी गई थी, जहाँगीर ने स्वयं इसमें एक भी पृष्ठ नहीं लिखा। D. गुलबदन बेगम द्वारा रचित 'हुमायूंनामा' मुगल हरम के आंतरिक जीवन, पारिवारिक कूटनीति और सामाजिक ताने-बाने की अंतर्दृष्टि प्रदान करने वाला एकमात्र समकालीन आधिकारिक स्रोत है।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A और B
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगल इतिहास-लेखन के संदर्भ में कथन A, B और D पूरी तरह सत्य हैं। अबुल फजल ने अकबरनामा/आइन-ए-अकबरी में अकबर को 'फर-ए-इज़दी' (ईश्वरीय प्रकाश से आलोकित सम्राट) के रूप में चित्रित किया है। बदायूँनी ने अकबर के डर से गुप्त रूप से 'मुंतखब-उत-तवारीख' लिखी जिसमें अकबर की धर्मनिरपेक्ष नीतियों की तीखी आलोचना है। गुलबदन बेगम (बाबर की पुत्री) द्वारा रचित 'हुमायूँनामा' मुगल राजपरिवार और हरम के अंदरूनी जीवन पर प्रकाश डालने वाली अनूठी पुस्तक है। परंतु कथन C असत्य है क्योंकि जहांगीर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहांगीरी' (जहांगीरनामा) का अधिकांश भाग अपने हाथों से लिखा था (17वें वर्ष तक), उसके बाद अस्वस्थता के कारण इसे पूरा करने का दायित्व मोतमद खान (इकबालनामा-ए-जहांगीरी के लेखक) को सौंपा गया था। अतः A, B और D सही हैं।
96
उत्तर-मुगल काल में चित्रकला और संगीत के प्रादेशिक विस्थापन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. मोहम्मद शाह 'रंगीला' के शासनकाल में दिल्ली दरबार में चित्रकला का पुनरुत्थान हुआ, जिसमें निधामल जैसे चित्रकारों ने दरबारी विलासिता और रात्रिकालीन दृश्यों को मुख्य विषय बनाया। B. 1739 में नादिर शाह के आक्रमण के बाद दिल्ली के चित्रकार पहाड़ी राज्यों (जैसे कांगड़ा, गुलेर) और राजपूत रियासतों की ओर पलायन कर गए, जिससे 'पहाड़ी चित्रकला शैली' का तेजी से विकास हुआ। C. मोहम्मद शाह के दरबारी संगीतज्ञ सदारंग और अदारंग ने 'ख्याल' गायन शैली को परिष्कृत कर उसे जनप्रिय बनाया, जो इससे पूर्व केवल एक हाशिए की विधा थी।
(A) केवल A और B
(B) केवल B और C
(C) A, B और C सभी
(D) केवल C
📝 व्याख्या (Explanation)
18वीं शताब्दी में उत्तर-मुगल काल के दौरान कला और संस्कृति के केंद्रों में आए बदलावों से संबंधित तीनों कथन (A, B, C) पूरी तरह सत्य हैं। उत्तर मुगल बादशाह मुहम्मद शाह 'रंगीला' (1719-1748 ई.) के समय दिल्ली में कला का पुनरुत्थान हुआ और निधामल व चित्रमन जैसे चित्रकारों ने रात्रिकालीन उत्सवों के चित्र बनाए। 1739 में नादिरशाह के विनाशकारी आक्रमण और दिल्ली की तबाही के बाद दिल्ली के प्रसिद्ध चित्रकार भागकर पहाड़ी क्षेत्रों (गुलेर, कांगड़ा, बसोहली) तथा राजस्थान पहुँचे जिससे कांगड़ा/पहाड़ी शैली का स्वर्ण काल शुरू हुआ। संगीत के क्षेत्र में मुहम्मद शाह के दरबारी संगीतकार नियामत खाँ 'सदारंग' और फिरोज खाँ 'अदारंग' ने ध्रुपद के स्थान पर 'ख्याल' गायन को अत्यंत लोकप्रिय और समृद्ध बनाया।
97
Q97. फतेहपुर सीकरी के स्थापत्य परिसरों के दार्शनिक और प्रशासनिक महत्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. 'इबादत खाना' वह स्थान था जहाँ अकबर ने प्रारंभ में केवल सुन्नी उलेमाओं को और बाद में सभी धर्मों (जैन, पारसी, ईसाई, हिंदू) के आचार्यों को दार्शनिक विमर्श के लिए आमंत्रित किया। B. 'दीवान-ए-खास' का केंद्रीय स्तंभ, जिसके शीर्ष पर एक वृत्ताकार मंच है और जहाँ से चार संकीर्ण पुल निकलते हैं, अकबर के 'ब्रह्मांडीय केंद्र' और संप्रभुता के केंद्रीय विचार को निरूपित करता है। C. 'पंचमहल' की वास्तुकला पूरी तरह से ईरानी पिरामिड नुमा शैली पर आधारित है, जिसमें बौद्ध विहारों या पारंपरिक भारतीय छतरियों के तत्वों का पूर्ण अभाव है। D. बुलंद दरवाजा अकबर द्वारा पश्चिमी भारत (गुजरात विजय) के उपलक्ष्य में निर्मित अर्ध-अष्टकोणीय प्रवेश द्वार है, जिस पर ईसा मसीह से संबंधित सूक्तियाँ उत्कीर्ण हैं।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A और B
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
अकबर द्वारा बसाई गई राजधानी फतेहपुर सीकरी के स्थापत्य से संबंधित कथन A, B और D सत्य हैं। इबादत खाना (1575 ई.) में अकबर ने सभी धर्मों के विद्वानों के साथ धार्मिक-दार्शनिक चर्चाएं कीं। दीवान-ए-खास का प्रसिद्ध नकाशीदार केंद्रीय खंभा अकबर की निरपेक्ष सत्ता और सर्व-धर्म सम्भाव के केंद्र का प्रतीक है। बुलंद दरवाजा (176 फीट ऊँचा) अकबर द्वारा 1572-73 ई. की गुजरात विजय की स्मृति में बनवाया गया भव्य प्रवेश द्वार है जिस पर ईसा मसीह का कथन (संसार एक पुल है...) फारसी में अंकित है। परंतु कथन C असत्य है क्योंकि 5 मंजिला 'पंचमहल' (हवा महल) की वास्तुकला ईरानी नहीं, बल्कि 'पारंपरिक भारतीय बौद्ध विहारों' और पिरामिडनुमा छतरियों की शैली पर आधारित है। अतः A, B और D सही हैं।
98
मुगल काल में फारसी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं के साहित्यिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. अकबर के दरबार में अब्दुर्रहीम खान-ए-ख़ाना और बीरबल (ब्रह्म) ने ब्रजभाषा काव्य परंपरा को संरक्षण दिया, जिसने रीतिकाल की पृष्ठभूमि तैयार की। B. मलिक मुहम्मद जायसी ने शेरशाह सूरी के काल में 'पद्मावत' की रचना की, लेकिन अकबर के काल में तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' को टोडरमल और मानसिंह जैसे शाही मनसबदारों का अप्रत्यक्ष सहयोग प्राप्त था। C. शाहजहाँ के काल में 'लहरी' और 'आसफ़ खानी' जैसे ग्रंथों के माध्यम से संस्कृत के कवियों (जैसे जगन्नाथ पंडितराज) को 'कविंद्र' की उपाधि देकर सम्मानित किया गया था। D. 'उर्दू' भाषा का उद्भव सैन्य शिविरों की भाषा के रूप में शाहजहाँ के काल में दिल्ली की 'उर्दू-ए-मुअल्ला' के रूप में हुआ, जिसे औरंगज़ेब ने राजभाषा घोषित कर फारसी को प्रतिस्थापित कर दिया।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A, C और D
(C) केवल B और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगलकालीन प्रादेशिक व क्षेत्रीय भाषाओं के विकास में कथन A, B और C ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं। अकबर के काल में ब्रजभाषा काव्य का विकास हुआ और खान-ए-खाना (रहीम) तथा बीरबल ने ब्रज में कविताएं लिखीं। अवधी भाषा में मलिक मोहम्मद जायसी ने पद्मावत (शेरशाह काल) तथा गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस (अकबर काल) लिखी जिन्हें राजा मानसिंह व टोडरमल का सानिध्य प्राप्त था। शाहजहाँ ने संस्कृत विद्वान जगन्नाथ पंडितराज (रसगंगाधर के लेखक) को 'पंडितराज' तथा कविंद्र सरस्वती को 'कविंद्र' की उपाधि दी। परंतु कथन D असत्य है क्योंकि औरंगजेब ने उर्दू को राजभाषा घोषित नहीं किया था; मुगलों की आधिकारिक राजभाषा अंत तक 'फारसी' ही रही। उर्दू का विकास लश्करी/शाही शिविरों की भाषा के रूप में हुआ था। अतः A, B और C सही हैं।
99
मुगल चित्रकला के संगठनात्मक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. मुगल चित्रशाला (Karkhana/Atelier) में श्रम का विशिष्ट विभाजन था, जहाँ एक ही चित्र को बनाने में 'तारह' (रेखांकनकार), 'अमेज़िश' या 'रंग आमीज़ी' (रंग भरने वाला) और 'चेहरा कुशाई' (चेहरा बनाने वाला उस्ताद) मिलकर कार्य करते थे। B. 'वस्ली' (Wasli) वह विशेष रूप से तैयार किया गया बहु-परतीय कागज था, जिसके ऊपर चित्रकार अपनी आकृतियों को अंतिम रूप देते थे। C. मीर कलम (Calligrapher) का स्थान चित्रशाला में चित्रकार से नीचा माना जाता था, क्योंकि आकृतियों का निर्माण अक्षरों के लेखन से अधिक कठिन था। D. चित्रशाला का सर्वोच्च अधिकारी 'दरोगा-ए-किताबखाना' होता था, जो पांडुलिपियों के निर्माण, संरक्षण और सामग्री की आपूर्ति की देखरेख करता था।
(A) केवल A, B और D
(B) केवल A, B और C
(C) केवल B, C और D
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
मुगलों की शाही चित्रशाला (कारखाना) के संगठनात्मक ढांचे में कथन A, B और D पूरी तरह सत्य हैं। मुगल चित्रशाला में एक चित्र को पूरा करने में कुशल कलाकारों का समूह काम करता था- 'तरह' (आउटलाइन खींचने वाला मुख्य चित्रकार), 'रंग-आमीजी' (रंग भरने वाला) तथा 'चेहरा-कुशाई' (चेहरे के हाव-भाव और सजीवता उकेरने वाला मास्टर आर्टिस्ट)। चित्र बनाने के लिए हाथ से बने कागजों की कई परतों को चिपकाकर मजबूत 'वस्ली' (Wasli paper) तैयार किया जाता था। चित्रशाला की व्यवस्था दरोगा-ए-किताबखाना के अधीन होती थी। परंतु कथन C असत्य है क्योंकि इस्लामिक व मुगल संस्कृति में 'सुलेखक' (Calligrapher/मीर कलम या खुशकती) का सामाजिक व शाही दर्जा चित्रकार से कहीं अधिक 'ऊँचा और प्रतिष्ठित' माना जाता था। अतः A, B और D सही हैं।
100
सूफी मत और भक्ति आंदोलन का मुगलकालीन साहित्य एवं कला पर प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: A. दारा शिकोह द्वारा रचित 'मज्म-उल-बहरैन' (दो समुद्रों का मिलन) का मूल दर्शन सूफी तसव्वुफ और हिंदू वेदांत के बीच तात्विक समानता को सिद्ध करना था। B. मुगल काल में कृष्ण भक्ति शाखा के कवियों (जैसे रसखान) के भजनों को फारसी गज़लों की तर्ज पर शाही दरबारों के संगीतमय जलसों में गाया जाता था। C. जहाँगीर कालीन मुगल चित्रों में सूफी संतों और कबीर जैसे संतों के साथ राजाओं की मुलाकातों के काल्पनिक चित्र यह दर्शाने के लिए बनाए जाते थे कि संप्रभु को आध्यात्मिक गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त है।
(A) A, B और C सभी
(B) केवल A और C
(C) केवल B और C
(D) केवल A
📝 व्याख्या (Explanation)
सूफीवाद और भक्ति आंदोलन के सांस्कृतिक प्रभाव से संबंधित तीनों कथन (A, B, C) पूरी तरह सत्य हैं। शाहजहाँ के विद्वान पुत्र दारा शिकोह ने 'मज्म-उल-बहरैन' (Confluence of the Two Oceans) नामक प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा जिसमें उसने सूफी तसव्वुफ और हिंदू अद्वैत वेदांत को एक ही परम सत्य तक पहुँचने के दो मार्ग सिद्ध किया। मुगल काल में कृष्ण भक्त कवि रसखान (सैयद इब्राहिम) और सूरदास के पदों का संगीत सम्मेलनों में खूब गायन होता था। जहांगीर और शाहजहां के काल में मुगलों की यथार्थवादी चित्रकला में 'जहांगीर द्वारा सूफी शेख हुसैन को प्राथमिकता देना' तथा 'कबीर और रैदास की काल्पनिक आध्यात्मिक गोष्ठी' जैसे दिव्य चित्र बनाए गए जो शासक की आध्यात्मिक निष्ठा दर्शाते थे। अतः तीनों कथन सही हैं।
101
राजस्थान राज्य में पेटेंट सूचना केंद्र (Patent Information Centre - PIC) कहाँ स्थित है?
(A) जयपुर
(B) जोधपुर
(C) उदयपुर
(D) कोटा
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights - IPR), पेटेंट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतकों (GI Tags) के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा अनुसंधानकर्ताओं को सहायता प्रदान करने के लिए 'पेटेंट सूचना केंद्र' (Patent Information Centre) राज्य की राजधानी जयपुर में स्थित है। यह केंद्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), राजस्थान सरकार के अधीन कार्यरत है। यह राजस्थान के नवाचारों, हस्तशिल्प (जैसे सांगानेरी प्रिंट, ब्लू पॉटरी) तथा शोधकर्ताओं के पेटेंट पंजीकरण में तकनीकी परामर्श एवं सहायता प्रदान करता है।
102
राजस्थान राज्य संस्कृत शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (SI SERT) कहाँ स्थित है?
(A) डबोक, उदयपुर
(B) घूघरा घाटी, अजमेर
(C) रातानाडा, जोधपुर
(D) महापुरा, जयपुर
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में संस्कृत शिक्षा के संवर्धन, पाठ्यक्रम निर्माण, शोध तथा संस्कृत शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु स्थापित 'राजस्थान राज्य संस्कृत शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान' (RS SERT/SI SERT Sanskrit) महापुरा, जयपुर में स्थित है। यह संस्थान राज्य में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक संस्कृत विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को संस्कृत में लागू करने तथा संस्कृत की पाठ्यपुस्तकों के निर्माण व संशोधन का नोडल कार्य करता है।
103
राजस्थान आर्थिक समीक्षा के अनुसार राज्य में चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की संख्या (दिसंबर 2025 तक) में कौनसा सुमेलित नहीं है?
(A) राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (Government Medical Colleges) - 06
(B) राजमेस (RAJMES) संचालित चिकित्सा महाविद्यालय - 24
(C) E.S.I. चिकित्सा महाविद्यालय - 01
(D) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) - 01
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में विकल्प A गलत सुमेलित है। राजस्थान में दिसंबर 2025 तक पूर्णतः राजकीय (पुराने/परंपरागत) चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या 6 से अधिक है तथा राज्य सरकार द्वारा 'राजमेस' (Rajasthan Medical Education Society - RAJMES) के तहत नए सोसाइटल मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं जिनकी संख्या 24 है। राज्य में अलवर स्थित 1 ESI मेडिकल कॉलेज तथा जोधपुर में 01 AIIMS (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) कार्यरत है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या के आंकड़े में विसंगति होने के कारण विकल्प A सही उत्तर है।
104
P.M. उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA Scheme) के संबंध में निम्नलिखित में से सत्य कथन कौनसा/से हैं? A. यह योजना जून 2023 में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई। B. यह केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका वित्तीय आवंटन C:S, 60:40 है। C. यह केंद्र व राज्य के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शैक्षणिक, प्रशासनिक तथा भौतिक ढाँचे के विकास व संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करती है। D. यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के स्तंभों- सुलभता, समानता, जवाबदेही, सामर्थ्य एवं गुणवत्ता के अनुरूप तैयार की गई है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल B, C और D
(C) केवल A, B और D
(D) केवल A, C और D
📝 व्याख्या (Explanation)
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जून 2023 में पूर्ववर्ती 'रुसा' (RUSA) योजना को पुनर्गठित करके 'प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान' (PM-USHA) योजना शुरू की गई। कथन A, B, C, D के संदर्भ में यह योजना मुख्य रूप से 'राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों' पर केंद्रित है। इसका वित्त पोषण केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में होता है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्रमुख स्तंभों (Equity, Access, Quality) को हासिल करने के लिए राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रयोगशालाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुसंधान परिसरों के विकास हेतु बजट प्रदान करती है। कथन B, C और D इसके मुख्य प्रावधानों को सत्य रूप में व्यक्त करते हैं।
105
राजस्थान में उच्च शिक्षा से संबंधित प्रमुख योजनाओं के समूह में कौन-कौन सी योजनाएँ शामिल हैं? A. कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी वितरण योजना B. स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस C. रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम
(A) केवल A और B
(B) केवल B और C
(C) A, B और C तीनों
(D) केवल A और C
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान सरकार की योजनाओं में उच्च शिक्षा (Higher Education) से सीधे संबंधित योजनाओं में कथन A और B शामिल हैं। 'कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी वितरण योजना' के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाली 12वीं की मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा हेतु स्कूटी दी जाती है। 'स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस' योजना के तहत राज्य के 500 मेधावी विद्यार्थियों को विदेश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में निशुल्क उच्च शिक्षा (स्नातक/पीजी/पीएचडी) हेतु छात्रवृत्ति दी जाती है। जबकि कथन C 'रानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम' स्कूली शिक्षा (स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं के सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग) का कार्यक्रम है। अतः केवल 1 और 2 सही उत्तर हैं।
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राजस्थान में सरकारी स्कूलों में 'निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण योजना' के संदर्भ में असत्य कथन कौनसा/से हैं? A. राजकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से कक्षा-8 तक के सभी विद्यार्थियों को निःशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। B. कक्षा 9 से 12 तक की सभी छात्राओं तथा SC/ST/Non-Payee Income Tax Payer परिवारों के छात्रों को निःशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। C. इसकी निगरानी शाला दर्पण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जाती है।
(A) A, B और C तीनों
(B) केवल A और B
(C) केवल A और C
(D) इनमें से कोई नहीं (सभी कथन सत्य हैं)
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित 'निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना' के संदर्भ में तीनों कथन (A, B, C) पूरी तरह सत्य हैं। राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत समस्त छात्र-छात्राओं को बिना किसी भेदभाव के शत-प्रतिशत निशुल्क पाठ्यपुस्तकें (राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल द्वारा मुद्रित) वितरित की जाती हैं। कक्षा 9 से 12 में सभी बालिकाओं तथा विशेष वर्गों (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, तथा जिनके अभिभावक आयकरदाता नहीं हैं) के बालकों को निशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। इस योजना में पुस्तकों की मांग, संकलन व वितरण का पूरा प्रबंधन 'शाला दर्पण' (Shala Darpan) पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी रूप से किया जाता है। अतः कोई भी कथन असत्य नहीं है।
107
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के संदर्भ में सत्य कथनों का समूह कौनसा है? A. यह RTE कानून भारत में 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी रूप से लागू हुआ। B. यह 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा अनुच्छेद 21-A के तहत मौलिक अधिकार बनाया गया। C. इसे 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009' (RTE Act 2009) कहा जाता है। D. वर्ष 2026-27 से इसे राजस्थान में नर्सरी, LKG और UKG (पूर्व-प्राथमिक/प्री-प्राइमरी) कक्षाओं हेतु भी विस्तारित किया गया है।
(A) केवल A और B
(B) केवल A, C और D
(C) केवल A, B और C
(D) A, B, C और D सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 के संबंध में सभी चारों कथन सत्य हैं। 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21-A जोड़कर 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया। संसद द्वारा RTE Act 2009 पारित किया गया जो पूरे देश में 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। इस कानून के तहत निजी स्कूलों की 25% सीटों पर कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की सिफारिशों के तहत राजस्थान सरकार ने RTE के दायरे को 3 वर्ष से 6 वर्ष के बच्चों यानी प्री-प्राइमरी (नर्सरी, LKG, UKG) कक्षाओं तक भी विस्तारित करने के महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अतः चारों कथन सत्य हैं।
108
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और इसके क्रियान्वयन के बारे में राजस्थान के संदर्भ में कौनसे कथन सत्य हैं? A. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 29 जुलाई 2020 को लागू/स्वीकृत की गई थी। B. इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 'सार्थक' (SARTHAQ) योजना के अंतर्गत 27 अध्यायों में 297 कार्य/लक्ष्य निर्धारित किए गए। C. इनमें से 202 कार्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सौंपे गए हैं। D. राजस्थान राज्य में इन कार्यों के प्रभावी समन्वय हेतु 6 विशेष समितियों का गठन किया गया है।
(A) केवल A, B और C
(B) केवल A और B
(C) केवल A
(D) A, B, C और D चारों
📝 व्याख्या (Explanation)
भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) 29 जुलाई 2020 को घोषित की गई थी जो 34 वर्ष पुरानी शिक्षा नीति 1986 का स्थान लेती है। स्कूली शिक्षा में NEP 2020 के व्यवस्थित क्रियान्वयन के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा 'सार्थक' (SARTHAQ - Students' and Teachers' Holistic Advancement Through Quality Education) की शुरुआत की गई जिसमें 297 टास्क तय किए गए हैं। इनमें से 202 टास्क राज्य स्तर पर लागू होने हैं। राजस्थान में NEP 2020 के प्रावधानों (जैसे 5+3+3+4 ढांचा, बाल वाटिका, मातृभाषा में शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा) के सुचारू समन्वय और अनुश्रवण के लिए 6 राज्य स्तरीय समितियों का गठन किया गया है। अतः चारों कथन सत्य हैं।
109
राजस्थान के प्रमुख मॉडल स्कूलों और उनके प्रारंभ होने के वर्षों का मिलान कीजिए: सूची-I (विद्यालय का प्रकार): सूची-I: A. महात्मा गाँधी गवर्नमेन्ट स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) B. प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इण्डिया (PM-SHRI School) C. स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल D. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालय सूची-II: 1. 2019-20 2. 2022-23 3. 2014-15 4. 2017-18
(A) A-1, B-2, C-3, D-4
(B) A-2, B-3, C-4, D-1
(C) A-3, B-2, C-1, D-4
(D) A-4, B-3, C-2, D-1
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में स्कूली शिक्षा के प्रमुख विशेष एवं मॉडल विद्यालयों के प्रारंभ वर्ष का सही सुमेलित विवरण इस प्रकार है: महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर वर्ष 2019-20 से शुरू किए गए थे। पीएम-श्री (PM SHRI) योजना केंद्र सरकार द्वारा सितंबर 2022 (सत्र 2022-23) में देश भर के स्कूलों के अपग्रेडेशन हेतु शुरू की गई। स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल (शिक्षा दृष्टि से पिछड़े ब्लॉक में अंग्रेजी माध्यम स्वामी विवेकानंद स्कूल) सत्र 2014-15 से संचालित हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय योजना वर्ष 2017-18 से कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के बालकों के लिए शुरू की गई। अतः कूट A-1, B-2, C-3, D-4 सही है।
110
राजस्थान में 'कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालयों' (KGBV) के संदर्भ में कौनसा कथन असत्य है?
(A) कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय योजना केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2004-05 में प्रारंभ की गई थी।
(B) ये विद्यालय केवल शहरी क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं।
(C) यह कक्षा 6 से 12 तक अध्ययनरत बालिकाओं के लिए आवासीय शिक्षण सुविधा प्रदान करते हैं।
(D) ये विद्यालय मुख्य रूप से SC, ST, OBC, BPL तथा अल्पसंख्यक वर्गों की वंचित बालिकाओं हेतु लक्षित हैं।
📝 व्याख्या (Explanation)
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) योजना वर्ष 2004-05 में देश के शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों (EBBs) में शुरू की गई थी। इसके संबंध में कथन B पूरी तरह असत्य है क्योंकि KGBV मुख्य रूप से 'ग्रामीण एवं दूरस्थ शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों' (Educational Backward Blocks) में स्थापित किए गए हैं, न कि केवल शहरी क्षेत्रों में। इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक की SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक एवं BPL परिवार की बालिकाओं को 75% आरक्षण के साथ निशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन व शिक्षण सामग्री दी जाती है। अतः विकल्प B गलत कथन है।
111
राजस्थान में प्रारंभिक कक्षाओं में बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान हेतु 'निपुण राजस्थान अभियान' (Nipun Rajasthan Campaign) कब से प्रारंभ किया गया था?
(A) 5 जुलाई 2021
(B) 30 अक्टूबर 2021
(C) 5 अक्टूबर 2024
(D) 1 जुलाई 2023
📝 व्याख्या (Explanation)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 3 तक) के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान (Foundational Literacy and Numeracy - FLN) दक्षता प्राप्त करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा 5 जुलाई 2021 को 'निपुण भारत' (NIPUN Bharat) मिशन शुरू किया गया था। इसी तर्ज पर राजस्थान राज्य में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 'निपुण राजस्थान अभियान' का औपचारिक शुभारंभ 30 अक्टूबर 2021 को किया गया। इसके तहत कक्षा 3 तक के प्रत्येक बच्चे को वर्ष 2026-27 तक अर्थ के साथ पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणितीय संक्रियाओं को हल करने में सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
112
राजस्थान सरकार द्वारा बजट घोषणा के तहत 8वीं, 10वीं व 12वीं उत्तीर्ण मेधावी विद्यार्थियों को टैबलेट/लैपटॉप/साइकिल आदि खरीदने हेतु DBT ई-वाउचर योजना के तहत कितनी राशि का ई-वाउचर दिए जाने का प्रावधान है?
(A) ₹10,000
(B) ₹20,000
(C) ₹15,000
(D) ₹25,000
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान सरकार द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने और प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) ई-वाउचर योजना लागू की गई है। इसके तहत बोर्ड परीक्षाओं (कक्षा 8वीं, 10वीं तथा 12वीं) में राज्य व जिला स्तर पर मेरिट में स्थान प्राप्त करने वाले अथवा निर्धारित कट-ऑफ हासिल करने वाले विद्यार्थियों को स्वयं की पसंद का स्मार्ट टैबलेट, लैपटॉप अथवा साइकिल खरीदने के लिए सीधे ऑनलाइन ₹25,000 मूल्य का ई-वाउचर (E-Voucher) प्रदान किए जाने का प्रावधान किया गया है।
113
राजस्थान में बालिका शिक्षा फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले प्रसिद्ध 'गार्गी पुरस्कार' में कुल कितनी राशि प्रदान की जाती है?
(A) ₹2000 + ₹2000
(B) ₹3000 + ₹3000
(C) ₹2000 + ₹3000
(D) ₹3000 + ₹4000
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की कक्षा 10वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहन देने हेतु 'गार्गी पुरस्कार' दिया जाता है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के अवसर पर प्रदान किया जाता है। गार्गी पुरस्कार के तहत कुल ₹6,000 की राशि दो समान किस्तों में- ₹3,000 (कक्षा 11 में नियमित अध्ययनरत रहने पर प्रथम किस्त) तथा ₹3,000 (कक्षा 12 में नियमित अध्ययनरत रहने पर द्वितीय किस्त) के रूप में प्रमाण पत्र के साथ बालिका के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है।
114
राजस्थान में 'बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार' (Balika Protsahan Puraskar) किन्हें प्रदान किया जाता है?
(A) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान से कक्षा X उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को
(B) केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कक्षा XII उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को
(C) माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE) से कक्षा XII में 75% या अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को
(D) CBSE से कक्षा X में 90% से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान बालिका शिक्षा फाउंडेशन द्वारा संचालित 'बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार योजना' का लाभ उन मेधावी छात्राओं को दिया जाता है जो माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान (RBSE), अजमेर द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं (कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय) की मुख्य परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक प्राप्त करती हैं। इस योजना के तहत पात्र छात्राओं को एकमुश्त ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है (जबकि कक्षा 10वीं की मेधावी बालिकाओं को गार्गी पुरस्कार दिया जाता है)।
115
NEP 2020 के अंतर्गत राजस्थान सरकार बजट घोषणा के तहत प्रत्येक जिले में कितने उन्नत व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालय (Advanced Vocational Senior Secondary Schools) खोले जाने प्रस्तावित हैं?
(A) प्रत्येक जिले में एक
(B) प्रत्येक जिले में दो
(C) प्रत्येक जिले में पाँच
(D) प्रत्येक जिले में दस
📝 व्याख्या (Explanation)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) में स्कूली स्तर से ही विद्यार्थियों को कौशल विकास और रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। इसी क्रम में राजस्थान सरकार द्वारा अपने बजट प्रावधानों में राज्य के युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल (जैसे IT, एआई, ऑटोमोटिव, सोलर टेक्नीशियन, हस्तशिल्प) सिखाने हेतु राज्य के प्रत्येक जिले में 2 'उन्नत व्यावसायिक उच्च माध्यमिक विद्यालय' (Advanced Vocational Senior Secondary Schools) स्थापित करने की घोषणा की गई है, जहाँ नियमित पढ़ाई के साथ अत्याधुनिक वोकेशनल लैब्स होंगी।
116
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (Global Terrorism Index - GTI) 2024 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और असत्य कथनों की पहचान कीजिए: A. यह इंडेक्स इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी किया गया। B. इस रिपोर्ट में अफगानिस्तान को आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देश बताया गया है। C. भारत 6.428 स्कोर के साथ 14वें स्थान पर रहा।
(A) केवल A और B
(B) केवल B और C
(C) केवल B
(D) A, B और C तीनों
📝 व्याख्या (Explanation)
GTI 2024 के अनुसार, अफगानिस्तान शीर्ष पर है। भारत की रैंक 14वीं है। प्रश्न में 2026 का उल्लेख गलत था।
117
हाल ही में महिला एवं बाल विकास को समर्पित राष्ट्रीय संस्था WPSF ने वाणी जैन (Vani Jain) को राष्ट्रीय खेलकूद विभाग का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है, वाणी जैन का संबंध किस खेल से है?
(A) शतरंज (Chess)
(B) क्रिकेट
(C) फुटबॉल
(D) तीरंदाजी
📝 व्याख्या (Explanation)
हाल ही में महिला सशक्तिकरण और बाल विकास के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय संगठन महिला एवं बाल विकास मंच/WPSF ने राजस्थान की अंतर्राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी (Chess Player) वाणी जैन को अपने राष्ट्रीय खेलकूद विभाग का नया ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। वाणी जैन ने शतरंज के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई पदक जीते हैं। ब्रांड एंबेसडर के रूप में वे देश की बालिकाओं और युवा महिला एथलीटों को खेलों से जुड़ने, शतरंज जैसी मानसिक स्पर्धाओं में आगे बढ़ने और फिटनेस के प्रति जागरूक करने का कार्य करेंगी।
118
रायसीना डायलॉग 2025 के संदर्भ में कौनसा कथन असत्य है? (बाकी विकल्प तदनुसार अपडेट करें)
(A) रायसीना डायलॉग का 11वाँ संस्करण 5-7 मार्च 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
(B) इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब मुख्य अतिथि रहे।
(C) इसकी थीम "Samskāra: Assertion, Accommodation, Advancement" रखी गई थी।
(D) यह सम्मेलन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और भारत के गृह मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।
📝 व्याख्या (Explanation)
रायसीना डायलॉग का आयोजन विदेश मंत्रालय (MEA) और ORF द्वारा किया जाता है, गृह मंत्रालय द्वारा नहीं।
119
हाल ही में राज्य के बाहर देश की राजधानी में राजस्थान की कला, संस्कृति और व्यापार प्रोत्साहन हेतु "राजस्थान मंडपम्" (Rajasthan Mandapam) के नाम से देश का सबसे बड़ा आधुनिक कन्वेंशन सेंटर कहाँ बनाया जा रहा है?
(A) दिल्ली में
(B) जयपुर में
(C) जोधपुर में
(D) अलवर में
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान सरकार द्वारा देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित राजस्थान हाउस/बीकानेर हाउस परिसर की तर्ज पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक सम्मेलनों, हस्तशिल्प प्रदर्शनियों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु "राजस्थान मंडपम्" (Rajasthan Mandapam) का निर्माण नई दिल्ली में किया जा रहा है। भारत मंडपम और यशोभूमि की तर्ज पर बनने वाला यह अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर दिल्ली में राजस्थान के ब्रांड, पर्यटन, वस्त्र उद्योग और निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का मुख्य केंद्र बनेगा।
120
हाल ही में गुरुग्राम (हरियाणा) में भारत की पहली तरलीकृत पेट्रोलियम गैस ऑटोमेटेड टेलर मशीन (LPG ATM / ATM-LPG) लॉन्च की गई है, इसे किस महारत्न कंपनी द्वारा लॉन्च किया गया है?
(A) रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड
(B) हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)
(C) ऑयल इंडिया लिमिटेड
(D) भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)
📝 व्याख्या (Explanation)
हाल ही में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने गुरुग्राम में भारत का पहला LPG ATM लॉन्च किया है, जो ग्राहकों को 24x7 LPG सिलेंडर रिफिल की सुविधा प्रदान करेगा।
121
हाल ही में आयोजित 'राष्ट्रीय खनन सम्मेलन 2026' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सत्य कथनों की पहचान कीजिए: A. यह सम्मेलन केंद्रीय खनन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित किया गया। B. इसका आयोजन 21-24 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के स्कोप कन्वेंशन सेंटर में हुआ। C. इस सम्मेलन का विषय "आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) निधि का प्रभावी उपयोग" था।
(A) केवल A और B
(B) केवल B और C
(C) केवल A और C
(D) A, B और C सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
भारत सरकार के केंद्रीय खान/खनन मंत्रालय (Ministry of Mines) द्वारा 21-24 मार्च 2026 के मध्य नई दिल्ली स्थित स्कोप (SCOPE) कन्वेंशन सेंटर में चार दिवसीय 'राष्ट्रीय खनन सम्मेलन 2026' का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के पारदर्शी और प्रभावी उपयोग पर विचार-विमर्श करना था, विशेष रूप से देश के आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts and Blocks) में। सम्मेलन में सतत खनन, शून्य कार्बन उत्सर्जन और आधुनिक खनन तकनीकों पर रोडमैप पेश किया गया। अतः तीनों कथन पूरी तरह सत्य हैं।
122
हाल ही में राजस्थान के किस स्थान पर होंडा (Honda) कंपनी का पहला इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माण संयंत्र स्थापित किए जाने की घोषणा की गई है?
(A) जावर (उदयपुर) में
(B) किशोरपुरा (कोटा) में
(C) टपूकड़ा (खैरथल-तिजारा / अलवर) में
(D) सीतापुरा (जयपुर) में
📝 व्याख्या (Explanation)
जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी होंडा (Honda Motor Co.) ने राजस्थान में अपने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माण विनिर्माण क्षेत्र को विस्तार देते हुए राज्य के टपूकड़ा (Tapukara, जिला खैरथल-तिजारा / पूर्व अलवर) स्थित अपने औद्योगिक संयंत्र परिसर में भारत के पहले समर्पित इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की स्थापना की घोषणा की है। टपूकड़ा ऑटोमोबाइल विनिर्माण का मुख्य केंद्र है। इस नए संयंत्र में इलेक्ट्रिक कार और टू-व्हीलर की बैटरी असेंबली व उत्पादन किया जाएगा, जिससे राजस्थान में ऑटोमोटिव और क्लीन एनर्जी सेक्टर में भारी निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
123
राजस्थान कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को उनके किस राजस्थानी कहानी संग्रह के लिए वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' प्रदान किया गया है?
(A) रुआना कहानी संग्रह के लिए
(B) सारस कहानी संग्रह के लिए
(C) निमोही कहानी संग्रह के लिए
(D) भरखमा कहानी संग्रह के लिए
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान कैडर के प्रसिद्ध IAS अधिकारी और साहित्यकार डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को राजस्थानी भाषा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु उनके चर्चित राजस्थानी कहानी संग्रह 'रुआना' (Ruana) के लिए केंद्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2025 का 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' प्रदान किया गया है। डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी इससे पूर्व अपने राजस्थानी उपन्यास 'भरखमा' के लिए भी साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। उनकी कृतियों में राजस्थानी ग्रामीण संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और यथार्थवादी सामाजिक ताने-बाने का सुंदर चित्रण मिलता है।
124
हाल ही में राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड (RSGL) को आईओटी (IoT) आधारित स्मार्ट गैस वितरण प्रणाली हेतु राष्ट्रीय स्तर पर किस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है?
(A) ब्रॉन्ज अवार्ड
(B) सिल्वर अवार्ड
(C) गोल्ड अवार्ड
(D) डायमंड अवार्ड
📝 व्याख्या (Explanation)
राजस्थान सरकार के उपक्रम राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड (RSGL) को शहरी गैस वितरण (CGD) क्षेत्र में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक के माध्यम से स्मार्ट गैस पाइप्ड आपूर्ति, ऑनलाइन प्रेशर ट्रैकिंग और डिजिटल बिलिंग प्रणाली लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन श्रेणी में 'गोल्ड अवार्ड' (Gold Award) से सम्मानित किया गया है। RSGL ने जयपुर, कोटा, नीमराणा आदि शहरों में सीएनजी और पीएनजी वितरण नेटवर्क को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है।
125
हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम में चयनित मुक्केबाज हर्ष चौधरी का संबंध राजस्थान के किस जिले से है?
(A) सीकर
(B) झुंझुनू
(C) अलवर
(D) जयपुर
📝 व्याख्या (Explanation)
अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप और एशियाई मुक्केबाजी स्पर्धाओं के लिए भारतीय मुक्केबाजी टीम में चयनित प्रतिभावान मुक्केबाज हर्ष चौधरी (Harsh Chaudhary) राजस्थान के जयपुर जिले के निवासी हैं। हर्ष चौधरी लाइट हैवीवेट (80 किग्रा) भार वर्ग के राष्ट्रीय चैंपियन मुक्केबाज हैं जिन्होंने राष्ट्रीय खेलों और खेलो इंडिया यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। वे जयपुर स्थित क्रीड़ा परिषद की बॉक्सिंग अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त खिलाड़ी हैं।
126
हाल ही में भारतीय सेना (Indian Army) द्वारा युद्ध अभ्यास 'बैटलफील्ड थंडर' (Battlefield Thunder) का आयोजन राजस्थान में कहाँ किया गया था?
(A) पुणे में
(B) अल्मोड़ा में
(C) जैसलमेर (पोकरण) में
(D) अमृतसर में
📝 व्याख्या (Explanation)
भारतीय सेना की सुदर्शन चक्र कोर (Sudarshan Chakra Corps) तथा वायुसेना द्वारा संयुक्त रूप से अत्याधुनिक युद्ध तकनीकों, ड्रोन अटैक, आर्टिलरी गन फायरिंग और नेटवर्किंग नेटवर्क के परीक्षण हेतु विशाल सैन्य अभ्यास 'बैटलफील्ड थंडर' (Battlefield Thunder) का आयोजन राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती जिले जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज (Pokhran Range) के विशाल रेगिस्तानी इलाके में किया गया। इस अभ्यास में स्वदेशी पिनाका रॉकेट सिस्टम, के-9 वज्र तोपों और मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का एकीकृत संचालन किया गया।
127
मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को किस तिथि को ईरान का नया सर्वोच्च धार्मिक व राजनीतिक नेता (Supreme Leader) नियुक्त किए जाने की घोषणा हुई?
(A) 8 मार्च 2026
(B) 20 मार्च 2026
(C) 18 मार्च 2026
(D) 28 मार्च 2026
📝 व्याख्या (Explanation)
ईरान की विशेषज्ञों की असेंबली (Assembly of Experts) द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए 8 मार्च 2026 को मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei - अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे पुत्र) को ईरान का नया सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) नियुक्त किया गया। ईरान के राजनीतिक और धार्मिक पदानुक्रम में सर्वोच्च नेता ही देश की न्यायपालिका, सशस्त्र बलों (IRGC), विदेश नीति और सामरिक निर्णयों का अंतिम प्राधिकारी होता है। इस नियुक्ति को मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
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'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट' (World Happiness Report) 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सत्य कथनों की पहचान कीजिए: A. यह रिपोर्ट गैलप, ऑक्सफोर्ड वेलबीइंग रिसर्च सेंटर और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) द्वारा मिलकर जारी की जाती है। B. इस रिपोर्ट के अनुसार फिनलैंड लगातार 9वीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना है। C. अफगानिस्तान 147वें स्थान के साथ सूची में सबसे कम खुशहाल (निचले) देश के रूप में रहा।
(A) केवल A और B
(B) केवल B और C
(C) केवल A और C
(D) A, B और C सभी
📝 व्याख्या (Explanation)
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (UN-SDSN), गैलप (Gallup) तथा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से जारी 'वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026' के संदर्भ में तीनों कथन (A, B, C) पूरी तरह सत्य हैं। 20 मार्च को 'अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस' पर जारी इस रिपोर्ट में यूरोपीय देश फिनलैंड (Finland) ने लगातार 9वें वर्ष (9th consecutive time) दुनिया के सबसे खुशहाल देश का शीर्ष स्थान हासिल किया है। डेनमार्क, आइसलैंड और स्वीडन शीर्ष स्थानों में शामिल हैं। वहीं युद्ध व मानवीय संकट से जूझ रहा अफगानिस्तान 147वें पायदान पर विश्व का सबसे दुखी/कम खुशहाल देश रहा। अतः सभी कथन सत्य हैं।
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'अंतर्राष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस 2026' (International Day of Women Judges 2026) के संदर्भ में असत्य कथन की पहचान कीजिए: A. यह दिवस प्रतिवर्ष 15 मार्च को मनाया जाता है। B. इसका मुख्य उद्देश्य न्याय प्रणाली में महिलाओं की भागीदारी, समानता और प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देना है। C. 2026 की आधिकारिक थीम- "Women Judges on the Bench and Beyond: Protecting Access to Justice" थी।
(A) केवल A
(B) केवल B और C
(C) केवल A और C
(D) A, B और C तीनों
📝 व्याख्या (Explanation)
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा घोषित 'अंतर्राष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस' (International Day of Women Judges) के संदर्भ में कथन A असत्य है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय दिवस प्रतिवर्ष '10 मार्च' (10th March) को मनाया जाता है, न कि 15 मार्च को। वर्ष 2026 में 10 मार्च को मनाए गए इस दिवस की आधिकारिक थीम "Women Judges on the Bench and Beyond: Protecting Access to Justice" थी। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में लैंगिक विविधता लाने, महिला जजों के योगदान को रेखांकित करने तथा महिलाओं के लिए न्याय तक पहुंच सुगम बनाना है। अतः केवल कथन A असत्य है।
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भारत का पहला 'ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन' (OTEC) पावर प्लांट कहाँ विकसित किया जा रहा है?
(A) नोएडा में
(B) कावरत्ती (लक्षद्वीप) में
(C) निकोबार में
(D) तपोवन में
📝 व्याख्या (Explanation)
राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT, चेन्नई) द्वारा भारत का पहला 'समुद्री तापीय ऊर्जा रूपांतरण' (Ocean Thermal Energy Conversion - OTEC) संयंत्र लक्षद्वीप की राजधानी 'कावरत्ती' (Kavaratti, Lakshadweep) में स्थापित किया जा रहा है। यह संयंत्र समुद्र की ऊपरी सतह के गर्म पानी तथा गहराई (1000 मीटर) के ठंडे पानी के तापमान में अंतर (कम से कम 20°C) का उपयोग करके नवीकरणीय बिजली पैदा करेगा। साथ ही इस प्लांट से निकलने वाले उप-उत्पाद के रूप में प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर पीने योग्य मीठा पानी (Desalinated Water) भी लक्षद्वीप निवासियों को प्राप्त होगा।
131
एक दुकानदार ने एक वस्तु के अंकित मूल्य पर 10% की छूट दी और इस प्रकार ₹400 रुपये का लाभ अर्जित किया। यदि वह वस्तु को 20% छूट पर बेचता, तो उसे लाभ के रूप में ₹330 अर्जित होते। वस्तु का अंकित मूल्य (Marked Price) क्या था?
(A) ₹500
(B) ₹600
(C) ₹700
(D) ₹800
📝 व्याख्या (Explanation)
मान माना वस्तु का अंकित मूल्य (MP) = M रुपये तथा क्रय मूल्य = C रुपये है। प्रथम स्थिति: छूट = 10%, तो विक्रया मूल्य SP1 = 0.90 M। लाभ = SP1 - C = 0.90 M - C = 400 रुपये ---(समीकरण 1) द्वितीय स्थिति: छूट = 20%, तो विक्रय मूल्य SP2 = 0.80 M। लाभ = SP2 - C = 0.80 M - C = 330 रुपये ---(समीकरण 2) समीकरण 1 में से समीकरण 2 घटाने पर: (0.90 M - C) - (0.80 M - C) = 400 - 330, 0.10 M = 70, M = 70 / 0.10 = ₹700. अतः वस्तु का अंकित मूल्य ₹700 था। (विकल्प C सही उत्तर है)।
132
एक दुकानदार ने एक सिलाई मशीन को 10% की हानि पर ₹1080 में बेचा। उसे इसे किस कीमत पर बेचना चाहिए ताकि उसे 10% का लाभ हो? (₹ में)
(A) ₹1320
(B) ₹1285
(C) ₹1250
(D) ₹1200
📝 व्याख्या (Explanation)
प्रथम स्थिति में विक्रय मूल्य (SP1) = ₹1080, हानि = 10%। क्रय मूल्य (CP) = SP1 × (100 / (100 - हानि%)) = 1080 × (100 / 90) = ₹1200. अब दुकानदार 10% लाभ अर्जित करना चाहता है। नया विक्रय मूल्य (SP2) = CP × ((100 + लाभ%) / 100) = 1200 × (110 / 100) = ₹1320. अतः 10% लाभ कमाने के लिए सिलाई मशीन को ₹1320 में बेचा जाना चाहिए। (विकल्प A सही उत्तर है)।
133
आनंद एक वस्तु की कीमत में 50% बढ़ोतरी करता है और फिर 20% की छूट देता है और उसे बालाजी को बेच देता है। बालाजी इसे आनंद द्वारा खरीदी गई राशि से ₹20 अधिक में बेचता है। नया विक्रय मूल्य वस्तु के मूल क्रय मूल्य से 30% अधिक है। बालाजी का लाभ प्रतिशत क्या है?
(A) 8.33%
(B) 9.4%
(C) 6.5%
(D) 10%
📝 व्याख्या (Explanation)
माना आनंद का क्रय मूल्य = 100x। अंकित मूल्य = 150x। आनंद का विक्रय मूल्य (बालाजी का क्रय मूल्य) = 150x का 80% = 120x। बालाजी का विक्रय मूल्य = 100x + 30% = 130x। प्रश्नानुसार, बालाजी का विक्रय मूल्य = आनंद का क्रय मूल्य + 20, अतः 130x = 100x + 20 => 30x = 20 => x = 2/3। बालाजी का क्रय मूल्य = 120 * (2/3) = 80 रुपये। बालाजी का विक्रय मूल्य = 130 * (2/3) = 86.67 रुपये। लाभ = 6.67 रुपये। लाभ % = (6.67 / 80) * 100 = 8.33%।
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एक दुकानदार अपनी वस्तु पर अंकित मूल्य क्रय मूल्य से 40% अधिक अंकित करता है। वह अपने ग्राहकों को नकद भुगतान पर 5% की छूट देता है। उसे छूट का भुगतान करने के बाद ₹1064 मिलते हैं। उसका लाभ कितना है (रुपये में)?
(A) ₹264
(B) ₹285
(C) ₹250
(D) ₹200
📝 व्याख्या (Explanation)
मान माना वस्तु का क्रय मूल्य (CP) = 100x रुपये। अंकित मूल्य (MP) = 100x + 40% = 140x रुपये। नकद छूट = 5%। विक्रय मूल्य (SP) = 140x × (95 / 100) = 133x रुपये। प्रश्नानुसार, छूट के बाद प्राप्त राशि SP = 133x = ₹1064। x = 1064 / 133 = 8। वस्तु का क्रय मूल्य CP = 100 × 8 = ₹800। दुकानदार का लाभ = SP - CP = 1064 - 800 = ₹264। अतः दुकानदार का शुद्ध लाभ ₹264 है। (विकल्प A सही उत्तर है)।
135
यदि किसी वस्तु पर दी गई छूट अंकित मूल्य के पांचवें हिस्से के बराबर है और हानि छूट की आधी है, तो हानि का प्रतिशत क्या है?
(A) 10(1/9)%
(B) 11(1/9)%
(C) 12(2/9)%
(D) 12(1/4)%
📝 व्याख्या (Explanation)
मान माना वस्तु का अंकित मूल्य (MP) = 100 रुपये। छूट (Discount) = MP का 1/5 वां हिस्सा = 100 / 5 = 20 रुपये। विक्रय मूल्य (SP) = MP - Discount = 100 - 20 = 80 रुपये। प्रश्नानुसार, हानि (Loss) = छूट की आधी = 20 / 2 = 10 रुपये। हम जानते हैं कि क्रय मूल्य (CP) = SP + Loss = 80 + 10 = 90 रुपये। हानि प्रतिशत (Loss %) = (Loss / CP) × 100 = (10 / 90) × 100 = 100 / 9 = 11(1/9)%. अतः हानि प्रतिशत 11(1/9)% है। (विकल्प B सही उत्तर है)।
136
मैंने ₹5400 में दो मेजें खरीदीं। मैंने उनमें से एक को 5% हानि पर तथा दूसरी को 7% लाभ पर बेच दिया। कुल सौदे में मुझे न लाभ हुआ न हानि। मेजों का अलग-अलग क्रय मूल्य ज्ञात कीजिए:
(A) ₹3150, ₹2250
(B) ₹3000, ₹2400
(C) ₹3325, ₹2075
(D) ₹3400, ₹2000
📝 व्याख्या (Explanation)
मान माना पहली मेज का क्रय मूल्य = X रुपये तथा दूसरी मेज का क्रय मूल्य = Y रुपये। कुल मूल्य X + Y = ₹5400 ---(समीकरण 1). सौदे में कुल मिलाकर न लाभ हुआ न हानि (नो प्रॉफिट नो लॉस), इसका अर्थ है कि पहली मेज पर हुई हानि की राशि दूसरी मेज पर हुए लाभ की राशि के बराबर है। X का 5% = Y का 7% => 5X = 7Y => X / Y = 7 / 5. अर्थात दोनों मेजों के क्रय मूल्य का अनुपात X : Y = 7 : 5 है। अनुपाती योग = 7 + 5 = 12। पहली मेज का मूल्य X = (7 / 12) × 5400 = 7 × 450 = ₹3150। दूसरी मेज का मूल्य Y = (5 / 12) × 5400 = 5 × 450 = ₹2250 (या ₹2250)। अतः मेजों का मूल्य क्रमशः ₹3150 तथा ₹2250 है। (विकल्प A सही उत्तर है)।
137
अंकित मूल्य पर 12% की छूट के बाद भी एक दुकानदार को 21% लाभ होता है। उसने अपनी वस्तुओं का अंकित मूल्य उनके क्रय मूल्य से कितने प्रतिशत अधिक पर निर्धारित किया हुआ है?
(A) 40%
(B) 37.5%
(C) 41.2%
(D) 36.7%
📝 व्याख्या (Explanation)
मान माना वस्तु का क्रय मूल्य (CP) = 100 रुपये। लाभ = 21%, अतः विक्रय मूल्य (SP) = 100 + 21 = 121 रुपये। अंकित मूल्य (MP) पर छूट = 12%। अर्थात MP का 88% = SP = 121 रुपये। MP × (88 / 100) = 121 => MP = (121 × 100) / 88 = 137.5 रुपये। अंकित मूल्य क्रय मूल्य से कितना अधिक है = 137.5 - 100 = 37.5 रुपये। अंकित मूल्य का प्रतिशत अधिकता = (37.5 / 100) × 100 = 37.5%। अतः दुकानदार ने अंकित मूल्य क्रय मूल्य से 37.5% अधिक निर्धारित किया है। (विकल्प B सही उत्तर है)।
138
एक दुकानदार अपने सामान का मूल्य उनके क्रय मूल्य से 20% अधिक अंकित करता है। वह तीन-चौथाई सामान को अंकित मूल्य पर बेचता है तथा शेष सामान को अंकित मूल्य के 50% पर बेचता है। कुल सौदे में उसका लाभ प्रतिशत निर्धारित कीजिए:
(A) 7%
(B) 8%
(C) 5%
(D) 4%
📝 व्याख्या (Explanation)
कुल क्रय मूल्य = 100 रुपये। अंकित मूल्य = 120 रुपये। 3/4 सामान (75 इकाइयाँ) 120 रुपये पर = 90 रुपये। शेष 1/4 सामान (25 इकाइयाँ) 60 रुपये (50% ऑफ 120) पर = 15 रुपये। कुल विक्रय मूल्य = 105 रुपये। लाभ = 5%।
139
एक व्यापारी अंकित मूल्य पर 12% की छूट देता है। वह अपनी वस्तुओं का मूल्य क्रय मूल्य से कितने प्रतिशत अधिक पर अंकित करे ताकि उसे 10% लाभ हो?
(A) 25%
(B) 30%
(C) 20%
(D) 35%
📝 व्याख्या (Explanation)
सूत्रानुसार: (अंकित मूल्य / क्रय मूल्य) = (100 + लाभ%) / (100 - छूट%) माना क्रय मूल्य (CP) = 100 रुपये। लाभ = 10%, अतः विक्रय मूल्य (SP) = 110 रुपये। छूट = 12%, अर्थात अंकित मूल्य (MP) का 88% = 110 रुपये। MP × 88/100 = 110 => MP = (110 × 100) / 88 = 125 रुपये। अंकित मूल्य क्रय मूल्य से कितना अधिक है = 125 - 100 = 25 रुपये। अधिकता प्रतिशत = (25 / 100) × 100 = 25%। अतः व्यापारी को वस्तु का मूल्य क्रय मूल्य से 25% अधिक अंकित करना चाहिए। (विकल्प A सही उत्तर है)।
140
एक घड़ी को 15% लाभ पर बेचा गया। यदि इसका मूल्य 5% कम होता तथा इसे ₹21 कम में बेचा गया होता तो 10% लाभ होता। घड़ी का क्रय मूल्य ज्ञात कीजिए:
(A) ₹225
(B) ₹200
(C) ₹250
(D) ₹180
📝 व्याख्या (Explanation)
प्रारंभिक SP = 115x. नया CP = 95x, नया SP = 95x * 1.10 = 104.5x. अंतर = 115x - 104.5x = 10.5x. 10.5x = 21, अतः x = 2. क्रय मूल्य = 100x = 200 रुपये।
141
तर्कशास्त्र प्रश्न: कथन: हितेश ने मोहित को बताया कि गांव के बाहरी इलाके में पीपल के पेड़ के पास एक भूत रहता था। निष्कर्ष:
(A) पीपल के पेड़ गांव के बाहरी इलाके में उगते हैं।
(B) भूत पीपल के पेड़ों पर रहते हैं।
(C) हितेश को शायद भूतों की कहानियों पर विश्वास था।
(D) मोहित को भूतों से डरना चाहिए।
📝 व्याख्या (Explanation)
दिए गए कथन में हितेश द्वारा मोहित से भूत की कहानी/बात कहे जाने का उल्लेख है। विकल्पों का विश्लेषण: (A) और (B) अति-सामान्यीकृत कथन हैं जो केवल एक घटना से सिद्ध नहीं होते। (D) मोहित के डरने की बात कथन से अप्रासंगिक है। परंतु निष्कर्ष (C) "हितेश को शायद भूतों की कहानियों पर विश्वास था" कथन का सबसे तार्किक और संभावित निष्कर्ष है, क्योंकि कोई व्यक्ति जब किसी स्थान पर भूत के रहने की बात कहता है, तो यह उसकी भूतों के अस्तित्व/कहानियों में विश्वास या धारणा को व्यक्त करता है। अतः विकल्प C सही निष्कर्ष है।
142
तर्कशास्त्र प्रश्न: कथन: अधिकांश राजनेता झूठे हैं। हरीश झूठ बोलता है। निष्कर्ष:
(A) हरीश एक राजनेता है।
(B) जो झूठ नहीं बोलते वे राजनेता नहीं होते।
(C) कुछ राजनेता झूठ नहीं बोलते।
(D) आप केवल झूठ बोलकर लाभ उठा सकते हैं।
📝 व्याख्या (Explanation)
दिए गए कथन "अधिकांश राजनेता झूठे हैं" का तार्किक अर्थ यह है कि राजनेताओं का बड़ा हिस्सा (बहुमत) झूठ बोलता है, परंतु 'सभी' राजनेता झूठे नहीं हैं। इसका सीधा निष्कर्ष यह निकलता है कि "कुछ राजनेता झूठ नहीं बोलते" (कम से कम कुछ ईमानदार हैं)। हरीश के झूठ बोलने से यह सिद्ध नहीं होता कि वह राजनेता ही है (अन्य लोग भी झूठ बोल सकते हैं), इसलिए A गलत है। कथन C पूर्णतः तार्किक रूप से दिए गए वाक्य से निकलता है। अतः विकल्प C सही निष्कर्ष है।
143
तर्कशास्त्र प्रश्न: कथन: एकाधिकार की विशेषता है- प्रतियोगिता की अनुपस्थिति या गिरावट। एबीसी कंपनी को पता चलता है कि इसका संचालन प्रतिस्पर्धी उद्योगों में है। निष्कर्ष:
(A) एबीसी कंपनी एक सेवा उद्योग में है।
(B) एबीसी कंपनी सरकारी स्वामित्व कंपनी है।
(C) एबीसी का बाजार एकाधिकार नहीं है।
(D) एबीसी कंपनी का कोई घरेलू प्रतियोगी नहीं है।
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन में स्पष्ट कहा गया है कि 'एकाधिकार' (Monopoly) का अर्थ प्रतियोगिता का न होना है। चूंकि एबीसी (ABC) कंपनी जिस उद्योग में काम कर रही है, वह 'प्रतिस्पर्धी' (Competitive) है, अर्थात वहाँ प्रतियोगिता मौजूद है। अतः तार्किक रूप से एबीसी कंपनी का उस बाजार में एकाधिकार (Monopoly) नहीं है। विकल्प A, B और D कथन में दी गई जानकारी से परे और अप्रासंगिक हैं। अतः केवल निष्कर्ष C पूरी तरह से सही और तार्किक है।
144
कथन: एक बुद्धिमान व्यक्ति बरसाती दिनों के लिए बचाता है। निष्कर्ष: 1. बुद्धिमान व्यक्ति भविष्य के प्रति सतर्क रहते हैं। 2. जो भविष्य के प्रति सतर्क नहीं हैं, वे बुद्धिमान नहीं हैं। विकल्प: A) केवल 1, B) 1 और 2, C) केवल 2, D) इनमें से कोई नहीं।
(A) केवल 1
(B) 1 और 2
(C) केवल 2
(D) 1 और 3
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन का अर्थ है: यदि व्यक्ति बुद्धिमान है, तो वह बचत करता है। निष्कर्ष 1 सीधा अर्थ है। निष्कर्ष 2 कथन का 'Contrapositive' है (यदि बचत नहीं, तो बुद्धिमान नहीं), जो तार्किक रूप से सही है। अतः सही उत्तर B होगा।
145
सिलोगिज्म प्रश्न: कथन: 1. कुछ व्यक्ति गणित में कमजोर हैं। 2. वे सभी, जो गणित में कमजोर हैं, संगीतकार हैं। निष्कर्ष: कुछ संगीतकार गणित में कमजोर हैं। यह निष्कर्ष निकलता है-
(A) निश्चित रूप से सत्य
(B) अप्रासंगिक
(C) संभाव्य सत्य
(D) निश्चित रूप से असत्य
📝 व्याख्या (Explanation)
दिए गए कथनों का वेन आरेख/तर्कशास्त्र विश्लेषण करने पर: कथन 2 के अनुसार "गणित में कमजोर सभी लोग ⊂ संगीतकार"। चूंकि कथन 1 के अनुसार कुछ व्यक्ति गणित में कमजोर हैं, तो वे सभी व्यक्ति संगीतकार के वर्ग के अंतर्गत आते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि संगीतकारों के समूह का वह हिस्सा जो गणित में कमजोर लोगों से आच्छादित है, निश्चित रूप से गणित में कमजोर है। अर्थात "कुछ संगीतकार गणित में कमजोर हैं" एक 'निश्चित रूप से सत्य' (Definitely True) निष्कर्ष है। अतः विकल्प A सही है।
146
कथन व निष्कर्ष प्रश्न: कथन: बॉम्बे और जाफरा के बीच सड़क मार्ग से 900 किमी की दूरी समुद्र के रास्ते 280 किमी तक कम हो जाएगी। इससे ईंधन पर प्रति वर्ष ₹7.92 करोड़ की बचत होगी। निष्कर्ष: A. समुद्री परिवहन सड़क परिवहन से सस्ता है। B. ईंधन को अधिक सीमा तक बचाना चाहिए।
(A) यदि केवल निष्कर्ष I कथन का अनुसरण करता है;
(B) यदि केवल निष्कर्ष II कथन का अनुसरण करता है;
(C) यदि या तो निष्कर्ष I या II कथन का अनुसरण करता है;
(D) यदि न तो निष्कर्ष I न ही II कथन का अनुसरण करते हैं
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन में दी गई जानकारी से स्पष्ट है कि समुद्री मार्ग सस्ता है (ईंधन की बचत)। निष्कर्ष I कथन का तार्किक परिणाम है। निष्कर्ष II एक सुझाव है जो कथन से सीधे नहीं निकलता। अतः केवल I अनुसरण करता है।
147
कथन व निष्कर्ष प्रश्न: कथन: अच्छी आवाज एक प्राकृतिक उपहार है लेकिन किसी को संगीत के क्षेत्र में बेहतर और उत्कृष्ट बनाने के लिए अभ्यास करते रहना पड़ता है। निष्कर्ष: A. प्राकृतिक उपहार को पोषण और देखभाल की आवश्यकता होती है। B. भले ही आपकी आवाज अच्छी न हो, लेकिन आप अभ्यास कर सकते हैं।
(A) यदि केवल निष्कर्ष I कथन का अनुसरण करता है;
(B) यदि केवल निष्कर्ष II कथन का अनुसरण करता है;
(C) यदि या तो निष्कर्ष I या II कथन का अनुसरण करता है;
(D) यदि न तो निष्कर्ष I न ही II कथन का अनुसरण करते हैं
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन कहता है कि उत्कृष्टता के लिए अभ्यास आवश्यक है, जो निष्कर्ष I (पोषण/देखभाल) का समर्थन करता है। निष्कर्ष II कथन के मूल भाव से मेल नहीं खाता।
148
कथन व निष्कर्ष प्रश्न: कथन: स्वदेशी कच्चे तेल के उत्पादन की तुलना में घरेलू मांग तेजी से बढ़ रही है। निष्कर्ष: A. कच्चे तेल का आयात करना चाहिए। B. घरेलू मांग को कम किया जाना चाहिए।
(A) यदि केवल निष्कर्ष I कथन का अनुसरण करता है;
(B) यदि केवल निष्कर्ष II कथन का अनुसरण करता है;
(C) यदि या तो निष्कर्ष I या II कथन का अनुसरण करता है;
(D) यदि न तो निष्कर्ष I न ही II कथन का अनुसरण करते हैं
📝 व्याख्या (Explanation)
जब किसी देश में किसी अनिवार्य ऊर्जा संसाधन (जैसे कच्चे तेल) का घरेलू उत्पादन उसकी मांग से कम होता है, तो मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए तात्कालिक व व्यावहारिक समाधान 'आयात' (Import) करना ही होता है। केवल मांग को कम कर देना पूरी तरह व्यावहारिक नहीं है क्योंकि आर्थिक गतिविधियां ऊर्जा पर निर्भर हैं। अतः निष्कर्ष I (कच्चे तेल का आयात करना चाहिए) कथन से निकलने वाला तार्किक और व्यावहारिक कदम है। अतः केवल निष्कर्ष I अनुसरण करता है।
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कथन व निष्कर्ष प्रश्न: कथन: कंपनी X के पास गुणवत्ता और नवीनतम डिजाइन के कैमरों के निर्माण का रिकॉर्ड है कि मौसम की स्थिति के बावजूद आपका एक भी शॉट खराब न हो। निष्कर्ष: A. X को छोड़कर कोई अन्य कंपनी कैमरा उद्योग में प्रतिष्ठित नहीं है। B. कोई भी व्यक्ति कैमरा X के साथ स्वीकार्य शॉट ले सकता है।
(A) यदि केवल निष्कर्ष I कथन का अनुसरण करता है;
(B) यदि केवल निष्कर्ष II कथन का अनुसरण करता है;
(C) यदि या तो निष्कर्ष I या II कथन का अनुसरण करता है;
(D) यदि न तो निष्कर्ष I न ही II कथन का अनुसरण करते हैं
📝 व्याख्या (Explanation)
निष्कर्ष I एक चरम दावा है। निष्कर्ष II में 'कोई भी व्यक्ति' का दावा कथन में नहीं है, क्योंकि कैमरा केवल एक उपकरण है, कौशल का उल्लेख नहीं है।
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कथन व निष्कर्ष प्रश्न: कथन: जब तक हमारा देश आर्थिक समानता प्राप्त नहीं करता, तब तक राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र निरर्थक होगा। निष्कर्ष: A. राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र साथ-साथ चलते हैं। B. आर्थिक समानता वास्तविक राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र की ओर ले जाती है।
(A) यदि केवल निष्कर्ष I कथन का अनुसरण करता है;
(B) यदि केवल निष्कर्ष II कथन का अनुसरण करता है;
(C) यदि या तो निष्कर्ष I या II कथन का अनुसरण करता है;
(D) यदि न तो निष्कर्ष I न ही II कथन का अनुसरण करते हैं
📝 व्याख्या (Explanation)
कथन में स्पष्ट कहा गया है कि 'आर्थिक समानता' के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र का कोई वास्तविक मूल्य/अर्थ नहीं रहेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि अर्थपूर्ण और वास्तविक लोकतंत्र तथा राजनीतिक स्वतंत्रता की स्थापना के लिए 'आर्थिक समानता' अनिवार्य पूर्व शर्त है। निष्कर्ष II (आर्थिक समानता वास्तविक राजनीतिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र की ओर ले जाती है) दिए गए कथन का सटीक और प्रत्यक्ष तर्कसंगत सार है। अतः केवल निष्कर्ष II कथन का अनुसरण करता है। (विकल्प B सही उत्तर है)।
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